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जमीन अंग्रेजों की थी, कब्रिस्तान के लिए मांगी पर बन गया मंदिर

Sat, 07 Nov 2015 08:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा(हरियाणा)
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अंग्रेजों की जमीन थी, मुस्लिमों ने कब्रिस्तान के लिए मांगी थी, लेकिन बाबू नानक चंद ने मुस्लिमों की ये चाहत पूरी नहीं होने दी। तस्वीरों में जानिए कैसे? रिपोर्टः डीडी गोयल, सिरसा
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जमीन अंग्रेजों की थी, कब्रिस्तान के लिए मांगी पर बन गया मंदिर

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ये प्राचीन मंदिर स्थित है डबवाली में स्थित बीएड कॉलेज भगवान श्री कृष्ण कॉलेज ऑफ एजूकेशन (फॉर वूमेन) में। करीब एक शताब्दी पूर्व बने मंदिर का अब जीर्णोद्धार शुरू हो गया है। वर्षों पुरानी खंडि़त मूर्तियों को मर्यादा अनुसार हरिद्वार लेजाकर नदी में विसर्जित किया जाएगा।
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कॉलेज प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट सुभाष चंद्र ने बताया कि मंदिर की जगह पर बाबा बादामपुरी का डेरा था। जिसमें शिवलिंग स्थापित था। उनके बाद बागडोर मीमे शाह के पास आई थी। वर्ष 1940-41 में मुसलमानों ने इस जमीन को कब्रिस्तान के लिए मांगा। बाबू नानक चंद मंदिर को बचाए रखने के लिए अंग्रेजों से मिले। अंग्रेजों ने उनसे 600 रूपए की मांग की। उस समय 600 रूपए भी बहुत बड़ी रकम थी।

जमीन अंग्रेजों की थी, कब्रिस्तान के लिए मांगी पर बन गया मंदिर

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बाबू नानक चंद ने पाई-पाई इक्ट्ठी करके अंग्रेजों को दी। जिसके बाद मंदिर सुरक्षित हो गया। वर्ष 1979-80 में कॉलेज की नींव रखी गई। करीब सौ वर्ष पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है। खंडित हो चुके शिवलिंग की जगह मर्यादा अनुसार नया शिवलिंग रखा गया है। इसके अतिरिक्त मंदिर में शिव परिवार, राधा कृष्ण, मां भगवती तथा बालाजी की मूर्तियां स्थापित की गई हैं।
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मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के बाद हवन यज्ञ करते हुए प्रबंधक कमेटी सदस्य। इसमें ठेकेदार सौरभ गर्ग बंटी, अरूण जिंदल, नीरज जिंदल, पुष्पा जिंदल, कॉलेज प्रधानाचार्या पूनम गुप्ता, मनोज गुप्ता, सुरेंद्र धुनिका, डॉ. पीके अग्रवाल, पवन कुमार, डॉ. प्रदीप कुमार लोहगढ़, शशिकांत शर्मा ने आहुति डाली। हवन यज्ञ पं. पवन कुमार, कैलाश शास्त्री, हरिओम शास्त्री, कमल के सानिध्य में संपन्न हुआ।
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