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पठानकोट, अंबाला और चंडीगढ़ एयरबेस हैं बेहद खास, यहीं पर चिनूक, अपाचे और राफेल तैनात

Thu, 30 Jul 2020 12:12 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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राफेल के जाबांज पायलेटों के साथ वायुसेना प्रमुख। - फोटो : भारतीय वायुसेना
वेस्टर्न एयर कमांड के अंतर्गत वैसे तो कई एयरफोर्स स्टेशन मौजूद हैं। मगर तीन एयरफोर्स स्टेशन अंबाला, पठानकोट और चंडीगढ़ इन तीनों की भूमिका रणनीतिक लिहाज से बेहद अहम है। इसीलिए करीब सवा साल में इंडियन एयरफोर्स दुश्मन को करारा जवाब देने के लिए सजग हो रही है। पहले चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन को एडवांस हेलीकॉप्टर चिनूक की सौगात मिली। 
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राफेल विमान - फोटो : स्पेशल अरेंजमेंट
वहीं पिछले साल सितंबर में वेस्टर्न एयर कमांड के एक और महत्वपूर्ण एयरफोर्स स्टेशन पठानकोट को दुनिया के सबसे खतरनाक लड़ाकू हेलीकॉप्टर अपाचे की स्क्वाड्रन मिली। उसके बाद अब 29 जुलाई को वेस्टर्न एयर कमांड के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन को राफेल की ताकत मिल गई है। चिनूक बहुत कम समय में भारतीय सेना की बटालियन उनके हथियारों, टैंकों व अन्य उपकरणों को फील्ड एरिया से वेस्टर्न कमांड के अग्रिम मोर्चे तक पहुंचाने की क्षमता रखता है।
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चिनूक हेलीकॉप्टर - फोटो : बोइंग इंडिया
ट्रांसपोर्ट श्रेणी के इस चिनूक हेलीकॉप्टर चंडीगढ़ में इसलिए तैनात किए गए हैं, क्योंकि चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन की पहुंच चीन और पाकिस्तान सीमा से ज्यादा दूर नहीं है। एलओसी और एलएसी पर तैनात सेना और वायुसेना की बटालियनों को तमाम लॉजिस्टिक और हथियारों की सप्लाई चिनूक के साथ-साथ ग्लोबमास्टर हरक्यूलिस और एएन-32 जैसे ट्रांसपोर्ट विमानों के जरिये जल्द से जल्द पहुंचाई जा सकती है। इसलिए चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन एयरफोर्स के ट्रांसपोर्ट एयरबेस के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है इसीलिए चिनूक की तैनाती यहां की गई है।

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राजपथ पर चिनूक - फोटो : Ravi Batra
इसी तरह पठानकोट में तैनात अपाचे आंधी-तूफान, दिन-रात व बारिश हर परिस्थिति में दुर्गम से दुर्गम इलाकों और घनी पहाड़ियों के बीच में जाकर टारगेट को नेस्तनाबूद कर सकता है। पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पाकिस्तान बॉर्डर से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसलिए ये एयरफोर्स स्टेशन भी पाकिस्तान को बहुत ज्यादा अखरता है। इसी एयरफोर्स स्टेशन को पाक समर्थित आतंकवादी भी अपना निशाना बना चुके हैं। इसी के मद्देनजर खतरनाक लड़ाकू अपाचे की यहां तैनाती कर इस एयरफोर्स स्टेशन की ताकत को भी बढ़ा दिया गया है।
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भारतीय वायुसेना का अपाचे - फोटो : PTI
उधर, लड़ाकू विमान राफेल तो अपने साथ मिसाइल समेत अन्य कई ऐसे हथियारों से सजा हैं। ये विमान एयर-टू-एयर और एयर- टू-सरफेस अटैक करने में माहिर है। नई जनरेशन के ये लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर वेस्टर्न एयर कमांड के अधीन इसलिए तैनात किए गए हैं, क्योंकि हालात बिगड़ने पर ये विमान और हेलीकॉप्टर तुरंत चीन और पाकिस्तान के खिलाफ अपना अपना मोर्चा संभाल लें।
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चिनूक - फोटो : ANI
एयरस्ट्राइक भी और संहारक बनेगी
इंडियन एयरफोर्स राफेल के आने के बाद इस बात से भी आश्वस्त है कि उनकी अब एयर स्ट्राइक क्षमता और बढ़ गई है। एयरफोर्स के एक अधिकारी के अनुसार राफेल यदि एयर स्ट्राइक में इस्तेमाल किए जाते हैं, तो बिना बॉर्डर क्रॉस किए 600 किलोमीटर दूरी तक टारगेट को लोकेट करके उसे तबाह किया जा सकता है। गत वर्ष पुलवामा अटैक के बाद पाकिस्तान के खिलाफ एयरफोर्स का एयर स्ट्राइक मिराज विमानों ने किया था। मगर अब राफेल भी ऐसे ऑपरेशंस में शामिल हो जाते हैं तो एयर स्ट्राइक की ताकत दोगुनी हो जाएगी। बता दें कि मिराज और राफेल फ्रांस की कंपनी दासो ने ही बनाया हैं।

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