प्रॉपर्टी, उसकी रजिस्टरी और बंटवारे से जुड़ी यह खबर आपके बड़े काम की हो सकती है। देख लीजिए, कहीं ऐसा न हो कि आपको पछताना पड़े।
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प्रधानमंत्री आवास योजना
यह मामला हरियाणा के रोहतक में देखने को मिल रहा है। बेनामी संपत्ति पर केंद्र सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक के डर से लोग परिवार में ही संपत्ति बांटने लगे हैं। इस प्रवृत्ति के जोर पकड़ने से परिवार में डीड कराने वालों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
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लोगों को डर है कि जिस तरह कालाधन बाहर निकालने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले साल आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की थी, उसी तरह बेनामी संपत्ति को बाहर निकालने के लिए कोई कठोर कदम उठा सकते हैं। इससे पहले की केंद्र सरकार कोई सख्त कदम उठाए लोग अपनी संपत्ति को सुरक्षित कर लेना चाहते हैं।
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यही वजह है कि मार्च के आखिरी सप्ताह में काफी संख्या में लोग रजिस्ट्री करवाने के लिए तहसील पहुंच रहे हैं। हालांकि, डीसी से लेकर तहसीलदार तक साफ कर चुके हैं कि नए वित्तीय वर्ष में रजिस्ट्री बंद होने की बात केवल अफवाह है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल 2015-16 में प्रॉपर्टी में मंदी के चलते 16 हजार के करीब रजिस्ट्री हुई।
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फरवरी माह में दंगों के बाद मार्च माह में प्रॉपर्टी बाजार में ठहराव आ गया। दंगों के दंश से उबरने के बाद रोहतक में नवंबर माह तक हर रोज 50 से 60 की औसत से रजिस्ट्री हुई। इसी बीच कालाधन पर प्रहार करने के लिए आठ नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी लागू कर दी। इस वजह से कई महीने तक प्रॉपर्टी बाजार में सन्नाटा पसरा गया।
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लोग रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए बैंकों के बाहर कतार में लगे रहे। हालांकि, अब हालात पटरी पर लौट चुके हैं, लेकिन नोटबंदी के बाद लोगों के बीच यह बहस चल रही है कि बेनामी संपत्ति को लेकर भी सरकार कड़े नियम बना सकती है। इससे बचने के लिए लोग अपनी प्रॉपर्टी को टुकड़ों में बांट रहे हैं। प्रॉपर्टी पत्नी के साथ-साथ बच्चों के नाम कर रहे हैं।
तहसील में पहले जहां 50 से 60 रजिस्ट्री होती थी, लेकिन अब यह संख्या 100 के पार जा चुकी है। इसमें से करीब 50 प्रतिशत रजिस्ट्री ब्लड इन रिलेशन यानी फैमिली डीड से संबंधित है। नोटबंदी के बाद फैमिली डीड की संख्या बढ़ गई है।
- गुलाब सिंह, तहसीलदार