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प्यार में हरियाणवी बहु बनी सिंगापुर की गोरी, ढो रही गोबर

Mon, 29 Jun 2015 11:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डबवाली,सिरसा(हरियाणा)
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फिरे फसलां देणा पूछदी, गोरी जटट् नाल ब्याही लग्ग दी। यह पंजाबी गीत सिंगापुर की आतिक नूर विद्या यति पर सटीक बैठता है। भारतीय युवक से प्रेम संबंध निभाने के लिए यह युवती नौकरी, परिवार को छोड़ हरियाणा के गांव गोरीवाला में आकर बस गई। मल्टीनेशनल कंपनी के मॉल में कार्य करने वाली नूर यहां चूल्हा-चौका के साथ खेती में पति का हाथ बंटाती है, यहां तक कि पशुओं को नहलाने के साथ उनकी देखभाल कर रही है। रिपोर्ट: डीडी गोयल
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विदेशी युवती की दिनचर्या ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। गांव गोरीवाला निवासी मनदीप ने पंजाब की एक आईटीआई से इलैक्ट्रीशियन का कोर्स करने के बाद वर्ष 2006 में सिंगापुर गया। वहां एक कंपनी में उसे इलैक्ट्रीशियन सुपरवाइजर की नौकरी मिली। वहां मॉल में शॉपिंग करते समय उसकी मुलाकात मॉल कंट्रोल कर रही आतिक नूर विद्या यति से हुई। पंजाबी मुंडे ने फिर फ्रेंडशिप के लिए परपोज किया। दोनों एक-दूसरे को समझने लगे।

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करीब तीन साल तक चली फ्रेंडशिप के बाद नूर ने शादी का प्रस्ताव रखा। बिना मौका गंवाए 2011-12 में दोनों ने शादी कर ली। शादी करने के बाद अपने परिजनों को मनाने के लिए मनदीप भारत लौट आया। परिजनों को विश्वास में लेकर उसने अपनी नूर को यहां बुला लिया। अगस्त 2013 में गांव गोरीवाला आई नूर पर भारतीय रंग चढ़ चुका है। पेंट-शर्ट और स्कर्ट पहनने वाली गोरी पंजाबी सूट में नजर आती है।

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सिर पर चुनरी, मत्थे पर सिंदूर, चूड़ियां और पांवों में जूती पहने नूर गोरी से पंजाबी बहू के रूप में नजर आती है। अपने मुल्क में अंग्रेजी भाषा बोलने और समझने वाली लड़की हिंदी और पंजाबी भाषा भी समझने लगी है। गुरुद्वारा जाती है चूल्हा-चौका के साथ पशुपालन की जिम्मेदारी भी संभालती है। आतिक नूर विद्या यति ने बताया कि मैं थोड़ी-थोड़ी पंजाबी बोलना सीख गई हूं। सत श्री अकाल कहना बेहद अच्छा लगता है। पंजाबी संस्कृति बहुत मुश्किल है, पर इसको समझने के बाद जीवन में उतारने का मजा ही कुछ और है।
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जसवंत कौर के अनुसार करीब दो वर्ष पहले जब नूर गांव आई थी, तो फसलों के बारे में जानकारी न होने पर उससे पूछने लगी मॉम, वट् इज दिस। अंग्रेजी मेरी समझ से परे थी। मनदीप ने मतलब समझाया। बाद में जैसे मैं ग्वार की फली तोड़ रही थी, ठीक उसी तरह तोड़ने लगी। धीरे-धीरे उनकी विदेशी बहू सब काम सीख गई है। मनदीप सिंह ने बताया कि भारतीय संस्कृति को समझते हुए नूर ने बिना दबाव के अपना पहनावा बदला। वर्ष 2014 में बेटे अरमान को जन्म दिया, जो अब एक साल का हो चुका है। पंजाबी बहू की तरह वह अपने दायित्व का निर्वाह कर रही है।
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