नोट बंदी का असर अब थोक बाजार पर भी खुलकर दिखने लगा है। इसका खामियाजा भी आम जनता पर पड़ रहा है। नोट की चोट से दाल की थोक मंडी थर्रा गई है। विभिन्न राज्यों से आने वाली दाल की आवक बुरी तरह प्रभावित होने से जमाखोरी का खतरा बढ़ गया है। पेमेंट क्लीयर नहीं होने से तीन दिन से कारोबार ठप है और आवक न के बराबर। ऐसे में आने वाले दिनों में दाल के रेट फिर से चढ़ने से जनता पर महंगाई की मार पड़ सकती है।
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नोटबंदी का असर
- फोटो : PTI
दिल्ली मंडी से होती है दाल की आवक- उतर भारत में दाल सप्लाई की सबसे बड़ी मंडी दिल्ली मंडी है। यहां भाव तय होते हैं और अंबाला समेत हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल, जम्मू एवं कश्मीर, उत्तराखंड और यूपी के कुछ हिस्सों में बड़े पैमाने पर सप्लाई होती है। तीन दिनों से दाल बाजार में जबरदस्त मंदी है। कारोबारियों को उम्मीद थी कि एक या दो दिन में व्यापार पटरी पर आ जाएगा, लेकिन अभी भी दिक्कतें कम होती नहीं दिख रही हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
इसलिए मंदी झेल रही दाल मंडी- दिल्ली दाल मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार गर्ग, महामंत्री दीपक गोयल व कोषाध्यक्ष सुभाष गर्ग ने बताया कि दिल्ली मंडी में दाल की आवक मध्यप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र से होती है। यहीं से मूंग, उड़द, चना, मसूर, मूठ, अरहर, हरड़ इत्यादि दालों की आवक थोक के भाव दिल्ली आती है और यहां आगे सप्लाई होती है। जो दालें विदेश से मंगवाई जाती हैं, वो भी मुंबई में ही डॉक पर उतरती हैं और वहां से दिल्ली आती हैं। अचानक करेंसी बदलने के कारण अरबों रुपये की पेमेंट रुक गई और बैंकों में कारोबारियों के लाखों रुपये के चेक अटके हैं। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है।
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एडवांस पेमेंट न होने से बढ़ी दिक्कत- महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश से दाल की खेप खरीदने को विभिन्न एजेंटों के माध्यम से पहले एडवांस पेमेंट करनी पड़ती है। एडवांस पेमेंट इस वक्त संभव नहीं है, इसलिए पिछले तीन दिनों से सप्लाई ठप है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में भी दाल उत्पादकों के पास मजदूर नहीं मिल रहे हैं। लिहाजा कामकाज प्रभावित है। आने वाले दिनों में हालात नहीं सुधरे और पेमेंट क्लीयर नहीं हुई तो स्टॉकिंग के कारण दाम बढ़ सकते हैं।
आवक ठप, जमाखोरी पर नजर- दाल कारोबार से जुड़े सिटी व कैंट के कारोबारियों ने बताया कि दिल्ली दाल बाजार में जो हालात हैं, उसकी सूचना अंबाला के दाल कारोबारियों को लग चुकी है। क्योंकि यहां अंबाला में भी दाल की आवक इस वक्त न की बराबर रह गई है। अब कारोबारी जो भी दाल निकालेगा, वो अपने गोदामों से निकालेगा और खुद ही रेट बढ़ाकर कृत्रिम महंगाई पैदा करेगा। कारोबारियों ने बताया कि ऐसी स्थिति में यह खेल हमेशा खेला जाता है, क्योंकि मार्केट में दाल की डिमांड तो उतनी है, लेकिन सप्लाई कम हो रही है।