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जिंदादिली इसे कहते हैं, एसिड अटैक पीड़िताओं का रैम्प वॉक

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जिंदादिली की सही मिसाल देखनी है तो इस फैशन शो को देखिए, रैंप पर कैटवॉक करने लगी मॉडल्स देशभर की एसिड एटैक पीड़िताएं हैं। देखिए, शो की तस्वीरें।
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जिंदादिली इसे कहते हैं, एसिड अटैक पीड़िताओं का रैम्प वॉक

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लुधियाना में एसिड अटैक पीड़ित करीब एक दर्जन युवतियों ने रैंप पर जब कैटवॉक किया तो लोगों की तालियों से उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया। घर की चारदिवारी में सिमटी जिंदगी को मानों पंख लग गए और एसिड अटैक पीड़ितों ने भविष्य में इसी तरह जिंदगी की उड़ान भरने की ठान ली।
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एसिड अटैक फाइटर्स को यह मंच उपलब्ध कराया फोर्टिस अस्पताल और छांव फाउंडेशन ने। गुरु नानक देव भवन में शनिवार देर शाम चैरिटी कार्यक्रम ‘ब्यूटीफुल यू’ का आयोजन किया गया। फोर्टिस और छांव फाउंडेशन ने मिलकर इन फाइटर्स को जीने की राह दिखाने का प्रयास किया, उनमें उम्मीद भरी और उन्हें अलग अंदाज में दुनिया के सामने पेश करने की पहल की।

जिंदादिली इसे कहते हैं, एसिड अटैक पीड़िताओं का रैम्प वॉक

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डीसी रजत अग्रवाल ने युवतियों के साहस की तारीफ की और उनको जीवन में आगे बढ़ने और समाज की मुख्यधारा में आकर पूरी मजबूती के साथ काम करने के लिए प्रेरित किया। फैशन शो में पहला राउंड ब्राइडल रहा। रंग बिरंगी ब्राइडल ड्रेसेज में सजी एसिड अटैक पीड़ित युवतियों का हौसला और अदाएं उपस्थित लोगों के दिल को छू गईं।
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दूसरे वेस्टर्न राउंड में एसिड अटैक पीड़िता रूपा की कलेक्शन को शोकेस किया गया। इस राउंड में डॉक्टर्स एसिड विक्टिम के साथ रैंप पर चले। रूपा के काम और उनकी क्रिएशन को वाहवाही मिली।
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काबिलेजिक्र है कि 15 साल की उम्र में रूपा पर उनकी सौतेली मां ने ही तेजाब फेंक दिया था। कई सालों तक वह अपना चेहरा छिपाती रही, लेकिन बाद में जिंदादिली के साथ दुनिया को फेस किया और एक फैशन डिजाइनर के तौर पर अपनी पहचान स्थापित की।
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फोर्टिस के डायरेक्टर विवान सिंह गिल ने कहा कि चैरिटी से इकट्ठा रकम को पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास पर खर्च किया जाएगा। इस शो का मकसद एसिड अटैक से पीड़ित युवतियों की जिंदादिली और बहादुरी को दुनिया के सामने लाना था।
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एसिड अटैक पीड़ित करीब एक दर्जन युवतियों ने शनिवार देर शाम रैंप पर जब कैटवॉक किया तो लोगों की तालियों से उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया। घर की चारदिवारी में सिमटी जिंदगी को मानों पंख लग गए और एसिड अटैक पीड़ितों ने भविष्य में इसी तरह जिंदगी की उड़ान भरने की ठान ली।
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