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अभिमन्यु की संघर्ष गाथा: जाट आंदोलन की आग में जला घर, चुनावी हार से टूटा सियासी सफर; और खाली हाथ रह गए कैप्टन

Sat, 28 Feb 2026 02:45 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

कैप्टन अभिमन्यु के जीवन में बीते कुछ साल राजनीतिक और व्यक्तिगत मोर्चों पर भारी उतार-चढ़ाव से भरे रहे। जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में उनका पुश्तैनी घर जला दिया गया। परिवार पर जानलेवा हमला हुआ। इस दौरान उन्होंने काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उसके बाद उन्हें लगातार दो चुनावों में हार का सामना करना पड़ा और अब लगभग दस साल बाद घर जलाने के आरोपियों को बरी कर दिया गया।
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jat andolan - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
जिस घर से संवेदनाएं और यादें जुड़ी थीं वो जला दिया गया। 10 तक कानूनी लड़ाई और सियासत में पिछड़ते कदम... आखिर में कैप्टन अभिमन्यु के हाथ खाली ही रह गए। कैप्टन अभिमन्यु 2014 में नारनौंद हलके से चुनाव जीतने के बाद सियासत में अपने चरम पर पहुंच गए थे। 

मनोहर सरकार के वित्त मंत्री का ओहदा मिला था लेकिन जाट आंदोलन के दौरान 19 व 20 फरवरी 2016 को उनकी कोठी जला दी गई थी। इस घर और वहां रखे एक-एक सामान से उनकी यादें जुड़ी थीं।
 
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा का दृश्य - फोटो : फाइल फोटो
उनके पिता, मां, पत्नी, बच्चों और परिवार की यादें। कोठी की आग की तपिश ने अभिमन्यु के दिल को झुलसा दिया। कोठी जलाने के मामले में वे जैसे-जैसे कानूनी लड़ाई में आगे बढ़ रहे थे राजनीति में उनके कदम पीछे होते जा रहे थे। 
 
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा में फूंकीं पूर्व वित्त मंत्री की कोठी - फोटो : फाइल फोटो
आंदोलन के बाद हुए किसी भी चुनाव में कैप्टन अभिमन्यु को जीत नहीं मिली। सामाजिक रूप से अभिमन्यु पर समझौते दबाव बढ़ रहा था तो लंबी अदालती लड़ाई से परिवार भी थक चुका था। आखिरकार खापों के कहने पर उन्होंने समझौता कर लिया।

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पंचकूला में सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद बाहर आते सर्वखाप प्रतिनिधि व अन्य - फोटो : सर्वखाप पंचायत
राजनीतिक मोर्चे पर भी नहीं मिली सफलता
कैप्टन अभिमन्यु को भाजपा में मंझा हुआ रणनीतिकार माना जाता है। एक समय में न सिर्फ प्रदेश बल्कि उनकी राष्ट्रीय राजनीति में भी पहचान थी। वह दो बार भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले कैप्टन अभिमन्यु को भाजपा का राष्ट्रीय प्रवक्ता भी बनाया गया था। 
 
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पंचकूला में सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद बाहर आते सर्वखाप प्रतिनिधि व अन्य - फोटो : सर्वखाप पंचायत
2014 के लोकसभा चुनाव में कैप्टन अभिमन्यु उत्तर प्रदेश के सहप्रभारी थे। 1998 और 2004 में रोहतक से कैप्टन अभिमन्यु ने लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। 2009 में उन्होंने नारनौंद से विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन इसमें भी उनके हिस्से हार ही आई। 
 
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा में फूंकीं पूर्व वित्त मंत्री की कोठी - फोटो : फाइल फोटो
2014 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन अभिमन्यु नारनौंद से जीत दर्ज करने में कामयाब रहे और वित्त मंत्री बनाए गए। जाट आंदोलन के बाद हुए दो विधानसभा चुनावों में किस्मत ने साथ नहीं दिया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
 
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा में फरवरी 2016 में पूर्व वित्तमंत्री की कोठी से आग के बाद उठता धुआं - फोटो : फाइल फोटो
कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलाने के मामले में सभी 56 आरोपी बरी
साल 2016 में जाट आरक्षण हिंसा के दौरान रोहतक में हरियाणा के तत्कालीन वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने 56 आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। सीबीआई की पंचकूला अदालत में 60 लोगों के खिलाफ विस्तृत जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों विजेंद्र, प्रदीप और श्रीभगवान की मौत हो गई जबकि एक रोहतक के गांव चिड्ड वाली के धर्मेंद्र हुड्डा को भगोड़ा (पीओ) घोषित किया जा चुका है। बाकी 56 आरोपियों पर मुकदमा चला जिसमें शुक्रवार को यह फैसला आया।

 

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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा का दृश्य - फोटो : फाइल फोटो
कोर्ट ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा है। पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने के कारण सभी को बरी किया जाता है। इस केस में जेल में रोहतक के खेड़ी साध निवासी प्रदीप बंद हैं। उनको चार महीने पहले ही गिरफ्तार किया गया था।

 

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jat andolan - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
जमानत पर छूटने के कारण वे बाद में कोर्ट में पेश नहीं हुए जिस कारण भगोड़ा घोषित किया गया था। अब उनकी रिहाई भी हो सकती है। सीबीआई के आरोपपत्र के अनुसार इन सभी पर आरोप था कि 19 फरवरी 2016 की दोपहर व 20 फरवरी की सुबह उग्र भीड़ के रूप में ये सभी कैप्टन अभिमन्यु के आवास पहुंचे और हमला कर दिया। तब कैप्टन अभिमन्यु के भतीजे रोहित राज सिंधु के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 
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अदालत का आदेश - फोटो : istock
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आंदोलन के दौरान हथियारों और पेट्रोल बम से लैस भीड़ ने कोठी में जबरन प्रवेश किया और परिसर में खड़े वाहनों को आग के हवाले कर दिया। घर के भीतर लूटपाट का आरोप लगा कहा था कि घर के अंदर मौजूद लोगों को नुकसान पहुंचाने की नीयत से पेट्रोल बम फेंके, जिससे कोठी में आग फैल गई और करोड़ों की संपत्ति जल गई। 

 
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