पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान।
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पार्टी के पास प्रदेश में कोई बड़ा चेहरा नहीं है, जो अपने बूते आप को जिताने की स्थिति में ला सके। पहले नवीन जयहिंद प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते चेहरा रहे लेकिन पार्टी की जड़े मजबूत नहीं हुईं। उनको लेकर पार्टी में विरोधी सुर भी उठे, बगावत तक हुई। इसके बाद आप प्रदेश में लगभग रसातल में चली गई। अब प्रदेश प्रभारी की कमान सांसद सुशील गुप्ता के हाथ में है और कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर आप में आ चुके हैं, बावजूद इसके पार्टी की पैठ धरातल पर मजबूत नहीं हो रही। दिल्ली और पंजाब की तरह हरियाणा में पार्टी का कैडर नहीं है। आदमपुर उपचुनाव में आप को केजरीवाल के दिल्ली मॉडल का ही सहारा था, जिसकी हवा जनता ने निकाल दी। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी आदि मुद्दों पर आप ने चुनाव लड़ा, लेकिन जनता का साथ नहीं मिला।