नवरात्र के मौके पर हम आपको माता के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताते हैं, जहां उन्हें मानने और पुण्य पाने के लिए लोग 'घोर पाप' करते हैं। देखिए तस्वीरों में।
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अमृतसर भद्रकाली मंदिर
ये मंदिर है अमृतसर में 1500 वर्ष पुराना प्राचीन माता भद्रकाली मंदिर। मंदिर को 1500 वर्ष पूर्व शंकराचार्य ने बनाया था। वह माता काली के भगत थे। मंदिर की सेवा महंतों की 16वीं पीढ़ी कर रही हैं। मंदिर की देखरेख का जिम्मा अब चंदन देवी पर है।
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अमृतसर भद्रकाली मंदिर
चंदन देवी ने बताया कि यह मंदिर विश्व में एक ऐसा मंदिर है, जिसमें मां भद्रकाली की पीठ पर माता वैष्णो देवी का मंदिर है हालांकि इसके अलावा ऐसे हिमाचल प्रदेश के कल्लू व पाकिस्तान के लाहौर में स्थित हैं। लेकिन इस तरह दो माताओं का इकट्ठा मंदिर नहीं है।
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अमृतसर भद्रकाली मंदिर
चंदन देवी बताती हैं कि इस मंदिर में हर साल मई माह में मेला लगता है, जो एक महीना चलता है। इस मेले में देश-विदेश से श्रद्धालु मां के दर पर माथा टेकने और मन्नत मांगने के लिए आते है। इस दौरान मेले में शराब और मांस का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
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नवरात्र पर मंदिरों में भक्तों की खासी भीड़ रही
चंदन देवी ने बताया कि मंदिर में शराब व मांस का ही प्रसाद चढ़ेगा, यह मंदिर की एक पुरानी परंपरा है। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु प्रसाद के रुप में मीट व शराब चढ़ाते हैं। बाद में जो श्रद्धालु इसे लेने के इच्छुक हो उन्हें बांट दिया जाता है।
माता वैष्णो देवी मंदिर में शाकाहारी प्रसाद ही चढ़ाया जाता है। चंदन देवी ने बताया कि मेले से 5 दिन पूर्व उनका परिवार घर में न खाना बनाता है और न सिर धोता है क्योंकि यह रीति उनके परिवार में 16 सौ वर्ष पुरानी चली आ रही है।