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बुजुर्ग दंपती ने घर को बगीचे में बदला, लगाव ऐसा कि पौधों को सुनाते हैं गाना, देखें तस्वीरें

Tue, 03 Nov 2020 02:13 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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- फोटो : अमर उजाला
बागवानी के प्रति जुनून कैसा होना चाहिए, यह कोई पंचकूला सेक्टर-15 के हाउस नंबर 251 में रहने वाले विनोद कुमार सरीन से सीखे। पीजीआई से सेवानिवृत्त सरीन के घर में 530 से ज्यादा गमले हैं, जिसमें 180 से ज्यादा किस्मों के पौधे लगे हैं। इनमें 40 से ज्यादा बोनसाई हैं और 80 से ज्यादा कैक्टस हैं।

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- फोटो : अमर उजाला
कैक्टस की कुछ ऐसी वेराइटी है, जो ट्राइसिटी के चुनिंदा बगीचों में ही मिलेंगी। वे रोज के छह घंटे सिर्फ पौधों की देखभाल में देते हैं। सरीन बताते हैं कि सेवानिृवत्त होने के बाद उन्होंने किसी क्लब की सदस्यता लेने की बजाय बागवानी में ही निवेश का फैसला लिया। इससे जो रिटर्न मिला है, उसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता।
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- फोटो : अमर उजाला
उनकी पत्नी सुनीता बताती हैं कि पौधों ने उनकी और उनके पति की जिंदगी बदल दी है। पौधे से न सिर्फ सकारात्मक ऊर्जा मिलती है बल्कि जिंदगी में सुकून के साथ शांति आ गई है। वीके सरीन पहले कभी-कभार गुस्सा कर जाते थे लेकिन जब से बागवानी शुरू की है, तब से वे काफी संयमित हो गए हैं। उनके अंदर एक ठहराव सा आ गया है। वे अपने गमलों से इतना ज्यादा प्यार करते हैं कि रोज हर पौधे को छूते हैं। उसे निहारते हैं। बात करते हैं। वे उन्हें संगीत भी सुनाते हैं।

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- फोटो : अमर उजाला
हर माह 8-10 हजार रुपये खर्च 
आमतौर पर माना जाता है कि बागवानी में ज्यादा खर्च नहीं होता, लेकिन सरीन हर माह आठ से दस हजार रुपये खर्च करते हैं। यह खर्च माली, दवाई, गमले और खाद पर होता है। उन्होंने बताया कि गमले अधिक होने की वजह से खर्च ज्यादा आता है। वे पौधे भी खुद ही तैयार करते हैं। जब बड़े हो जाते हैं तो उन्हें रिश्तेदार व दोस्तों को गमले सहित उपहार के तौर पर देते हैं। यही वजह कि उनके हर गमले देखने में बहुत ही खूबसूरत लगते हैं। सरीन दंपती ने बताया कि उनके घर के सामने से गुरजने वाले कई लोग सिर्फ उनके गार्डन को देखने आते हैं।
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हर 20 दिन बाद गमलों की बदल देते हैं सेटिंग
बागवानी में दिलचस्पी बढ़ने से उनके नजरिए में काफी बदलाव आया है। अपने रचनात्मक कार्यों में भी वे नयापन ढूंढ़ते हैं। यही वजह है कि वे हर 20 दिन बाद गमलों की सेटिंग बदल देते हैं। जो छत पर गमले रखे होंगे, उसे वे नीचे रख देंगे। लाइन में रखे पौधों में भी काफी वेराइटी देखने को मिली। गुलाबी रंग का फूल होगा तो उसके साथ सफेद रंग का फूल वाला गमला रहेगा। बड़े पत्तियों वाले गमले के साथ छोटी पत्ती वाला गमला होगा। कहने का मतलब है कि एक लाइन में एक जैसे गमले नहीं दिखेंगे।
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- फोटो : अमर उजाला
सफल बागवानी के राज
सरीन ने बताया कि उनकी सफल बागवानी का राज यह है कि वे हर साल मानसून के सीजन में गमलों की मिट्टी व खाद को बदल देते हैं। इससे पौधे ऊर्जावान व खिले-खिले रहते हैं। उनके गमलों में एक ट्राली मिट्टी व हाफ ट्राली खाद लगती है। वे अपने गमलों में पानी शाम के बाद देते हैं। उनका मानना है कि यदि रात में पानी दिया जाए तो पौधे को फायदा अधिक मिलता है। उन्होंने यह भी बताया है कि हर पौधे को पानी की अलग मात्रा की जरूरत रहती है। किसी पौधे में तीन दिन पानी न डाला जाए तो काम चल जाएगा तो वहीं किसी पौधे में रोजाना पानी डालना पड़ता है।
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