वाघा-अटारी बॉर्डर
- फोटो : सोशल मीडिया
पुणे की वर्मा ने बताया कि रावलपिंडी में उनके पिता ने बहुत मेहनत से घर बनाया था। जब वे अपने पैतृक घर पहुंचीं तो उन्हें यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि उस घर में रहने वाले लोगों ने घर में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं किया था। इससे भी ज्यादा अच्छा लगा कि उस घर में रहने वाले लोग बहुत प्यारे थे। उन्होंने बताया कि हालांकि बहुत ज्यादा लोग उन्हें हमउम्र के नहीं मिले लेकिन जो भी लोग वहां उनसे मिले, उन्होंने उनके साथ अपने घर की बुजुर्ग महिला की तरह व्यवहार किया और भरपूर सम्मान दिया।