मैं कराची में अपने दूर के रिश्तेदार के घर में सात महीने तक फंसी हुई थी। मुझे वहां पर कोई तकलीफ नहीं थी लेकिन कुछ कमी सी थी। दूर के रिश्तेदार के घर कितने दिन रहें, यही बात मुझे मानसिक पीड़ा दे रही थी। मैं जल्द अपने घर लौटूं, इसके लिए लगातार इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में थी। मेरे पिता इंदौर के सांसद शंकर लालवानी से मिल मेरी वापसी के प्रयास कर रहे थे।