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हाथों की मेहंदी तक उतरी नहीं...कि उजड़ गया सुहाग, तस्वीरें

Tue, 02 Jun 2015 02:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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अभी-अभी शादी हुई थी। हाथों से मेहंदी भी नहीं उतरी थी, कि उसका सुहाग उजड़ गया। अब वह किसके सहारे जिएगी। रह-रह कर होश में आती वह बस इतना कहती और फिर बेसुध हो जाती। तस्वीरों में पूरा मामला।
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हाथों की मेहंदी तक उतरी नहीं...कि उजड़ गया सुहाग, तस्वीरें

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ये दर्दनाक नजारा चंडीगढ़ में उस वक्त देखने को मिला, जब सीवरेज 30 मिनट में तीन जिंदगियों को लील गया। 3 मजदूर एक-एक करके सीवरेज में उतरे और जिंदा वापस नहीं लौटे। जहरीली गैस के कारण उनकी सांसों की डोर टूट चुकी थी। बचा तो सिर्फ, तीन जोड़ी चप्पल, उतारे गए कपड़े और घर से लाए खाने के टिफिन।
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दरअसल, चंडीगढ़ में सेक्टर-31 स्थित 3 बीआरडी एरिया में सीवरेज की सफाई करने मैनहोल में उतरे तीन कर्मचारियों की मौत हो गई। इस हादने जहां नगर निगम की लापरवाही की पोल खोल दी, वहीं तीन परिवारों को जिंदगी भर के लिए दर्द दे दिया। तीनों परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। तीनों कर्मचारी एक रस्सी और कमजोर सीढ़ी के सहारे मैनहोल में उतरे, मगर उसके बाद बाहर नहीं आए।

हाथों की मेहंदी तक उतरी नहीं...कि उजड़ गया सुहाग, तस्वीरें

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लोगों का कहना है कि अगर कर्मचारियों को सेफ्टी उपकरण दिए जाते तो शायद हादसा न होता। तीनों के शवों को फायर विभाग के कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला। यही नहीं सीवरेज की सफाई करने आए चार कर्मचारियों में से तीन तो नए ही थे, जिन्हें काम की ज्यादा जानकारी भी नहीं थी। फायर कर्मचारियों ने 45 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला। उनके शरीर में काफी पानी भर गया था। तीनों को जीएमएसएच-16 ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत बताया।
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जनस्वास्थ्य विभाग के अनुसार सीवरेज के मैनहोल काफी दिनों से बंद होते हैं, उनमें मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस होती है, जोकि काफी खतरनाक होती है। जब किसी मैनहोल की सफाई करनी होती है तो उसके और उसके आसपास के 4 से 5 मैनहोल के ढक्कनों को खोला जाता है, ताकि ये दोनों गैसें निकल जाएं। इसके बाद कर्मचारी एक मोमबत्ती जलाकर बाल्टी में रखता है और मैनहोल के नीचे भेजता है अगर मोमबत्ती बुझ जाती है, तो इसका मतलब है कि अभी भी गैसें हैं। अगर मोमबत्ती जलती रहती है, तो इसका मतलब नीचे ऑक्सीजन गैस है और कर्मचारी मेनहोल में सफाई के लिए उतर सकता है। एक ठेकेदार के अनुसार अब तो गैस की जांच के लिए अलग से भी उपकरण आ गए हैं।
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हादसे में बचे एक कर्मी ने बताया कि उन कर्मचारियों के पास सिर्फ एक रस्सी थी। जो सीढ़ी थी, वह भी काफी कमजोर थी। नियम के अनुसार जब भी इस तरह के मैनहोल की सफाई का काम होता है तो सुपरविजन के लिए नगर निगम के अधिकारी मौजूद होने चाहिए, लेकिन मौके पर निगम अधिकारी नहीं थे।
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भाजपा पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि वह घटना की सूचना मिलती ही पहुंच गए थे। जब वह पहुंचे तो वहां पर कोई भी सेफ्टी उपकरण नहीं थे, लेकिन कुछ देर बाद वहां पर किसी ने पानी की बाल्टी समेत ऑक्सीजन सिलेंडर रख दिया। उनका कहना है कि ठेकेदार पर एक मौत पर 10 लाख का जुर्माना लगाना चाहिए और यह राशि मृतक के परिवार को दी जानी चाहिए।
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