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13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला नरसंहार के दौरान बाग में मौजूद नहीं थे ऊधम सिंह, पढ़ें असली सच

Sat, 13 Apr 2019 04:14 PM IST
खुशबू गोयल अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
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उधम सिंह - फोटो : self
कहा जाता है कि 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला नरसंहार के दौरान ऊधम सिंह बाग में मौजूद थे, जबकि वे वहां उपस्थित ही नहीं थे। इस बात का खुलासा एक किताब में किया गया है, पढ़ें खबर।
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जलियांवाला बाग में शहीदी कुआं - फोटो : PTI
नरसंहार से संबंधित कई पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, जिनमें जिक्र है कि ऊधम सिंह गोलीकांड के दौरान जलियांवाला बाग में मौजूद थे और उन्होंने कैकस्टन हॉल में माइकल उडवायर को गोली मार कर जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लिया था। लेकिन हाल ही में प्रकाशित हुई खोजी लेखक राकेश कुमार की नई पुस्तक ‘ऊधम सिंह हीरो इन दी कोज ऑफ इंडियन फ्रीडम’ में लिखा है कि ऊधम सिंह बाग में उपस्थित नहीं थे और हत्याकांड का दोषी रेजीनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर था न कि माइकल उडवायर।
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जलियांवाला बाग हत्याकांड - फोटो : PTI
नरसंहार के दौरान जलियांवाला बाग में ऊधम सिंह के मौजूद नहीं होने का खुलासा नेशनल आर्काइव लंदन से जारी हुई तीन फाइलों में भी किया गया है। ब्रिटिश लाइब्रेरी लंदन से जारी हुई एक फाइल में भी अंग्रेज अधिकारियों द्वारा की गई तफ्तीश के रिकार्ड में यह जानकारी मिली है। दस्तावेजों के मुताबिक, पांच जून 1940 को अदालत में जज के सामने ऊधम सिंह ने कहा था कि जब जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ, तब वह पूर्वी अफ्रीका में थे।

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जलियांवाला बाग हत्याकांड - फोटो : PTI
20 जून 1940 को ब्रिटिश सरकार ने जांच करवाई थी कि जलियांवाला बाग हत्याकांड में ऊधम सिंह के परिवार व रिश्तेदार की मौत हुई थी या नहीं। जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला था। रिकार्ड में यह भी लिखा है कि हत्याकांड के दौरान ऊधम सिंह अमृतसर और सुनाम में भी नहीं थे। लेखक के मुताबिक, जलियांवाला हत्याकांड के लिए माइकल उडवायर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनरल डायर दोषी था।

 
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जलियांवाला बाग हत्याकांड
11 अप्रैल 1919 को अमृतसर शहर सेना के हवाले कर दिया गया था। फौज की कमांड डायर के पास थी। उडवायर उस समय लाहौर में था। हंटर कमेटी के सामने डायर ने इस बात को स्वीकार किया था कि गोली चलाने का फैसला उसका अपना था। हंटर कमेटी और फौजी कमीशन ने डायर को दोषी ठहराकर 23 मार्च 1920 को उसे नौकरी से हटा दिया था। फौजी कमीशन ने फैसला दिया था कि उसे भारत में और कोई नौकरी न दी जाए व उसका वेतन आधा कर दिया जाए।

 
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जलियांवाला बाग हत्याकांड
13 मार्च 1940 को लंदन के कैकस्टन हाल में माइकल उडवायर, मार्कर्स ऑफ जैटलैंड, लुईसडेन और लार्ड लैमिंगटन पर छह गोलियां चलाई गई थीं। उडवायर मौके पर मर गया था, जबकि बाकी जख्मी हो गए थे। ये सभी भारत के गवर्नर रह चुके थे और भारत की आजादी के विरुद्ध थे। ऊधम सिंह ने पहली दो गोलियां जैटलैंड को मारी थीं। ऊधम सिंह जब मौके पर पकड़े गए तो उन्होंने पूछा था कि क्या जैटलैंड मर गया।
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जलियांवाला बाग हत्याकांड
माइकल उडवायर ने पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर होते हुए विशेष अदालतों के जरिए गदर लहर के महान शूरवीरों करतार सिंह सराभा, विष्णु गणेश पिंगले, भाई जगत सिंह, भाई हरनाम सिंह और डॉ. मथुरा दास समेत कई को फांसी दी थी। लेखक ने एक और खुलासा किया है कि प्रमाणिक एतिहासिक तथ्य के मुताबिक ऊधम सिंह का नाम मोहम्मद सिंह आजाद था न कि राम मोहम्मद सिंह आजाद। ऊधम सिंह को बचपन में शेर सिंह के नाम से जाना जाता था, बाद में उन्हें कई नामों से जाना गया।
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