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अमेरिका में फंसे 100 भारतीय लौटे, वतन की माटी चूमी, जय हिंद बोले, बताया- कैसा है न्यूयार्क का हाल

Sat, 23 May 2020 12:13 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जीरकपुर ( पंजाब)
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वतन लौटे 100 भारतीय - फोटो : अमर उजाला
पटियाला के रहने वाले मेहताब सिंह जैसे ही मोहाली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाहर निकले तो माटी को चूमकर बोले जय हिंद। यही तो है स्वदेश लौटने की खुशी। ऐसी खुशी सिर्फ मेहताब के चेहरे पर ही नहीं दिखाई दे रही थी बल्कि यह खुशी आने वाले उन 100 यात्रियों के चेहरों पर भी थी जो न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, ह्यूस्टन और अन्य जगह से आए थे। अपनों का इंतजार करते हुए मोहाली के इंटनरेशनल एयरपोर्ट पर उनके संबंधियों की कतार लगी हुई थी। कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन में फंसे इन यात्रियों का प्लेन जैसे ही लैंड किया तो एयरपोर्ट में मौजूद उनके संबंधियों के चेहरे खिल उठे। आइए पढ़ते हैं अमेरिका से लौटे भारतीयों की जुबानी...
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- फोटो : अमर उजाला
मैं जनवरी में घूमने के लिए न्यूयॉर्क गया था। मुझे मार्च में वापस लौटना था लेकिन जैसे ही मार्च आया तो लॉकडाउन लग गया। यह कहना हैपटियाला के रहने वाले हरप्रीत सिंह का। हरप्रीत सिंह ने कहा कि न्यूयॉर्क में कोरोना का प्रकोप ज्यादा था। ऐसे में जैसे ही इस बीमारी के बारे में लोगों को मालूम पड़ा तो लॉकडाउन हो गया। ऐसे में वहां रुकने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं था। इस दौरान वह घर से बाहर तक नहीं निकले। इंटरनेशनल फ्लाइट्स बंद हो चुकी थीं। ऐसे में किसी तरह से समय काटा जा रहा था। हरप्रीत सिंह ने कहा कि अपने घर लौटने में वह काफी खुद महसूस कर रहे हैं। इस फ्लाइट के बारे में उनको जब मालूम पड़ा तो उन्होंने टिकट करवाई। टिकट के दाम भी ज्यादा थे लेकिन क्या करते, घर लौटना तो जरूरी था।
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- फोटो : अमर उजाला
पटियाला के रहने वाले मेहताब सिंह ने बताया कि वह दो माह पहले न्यू जर्सी में घूमने के लिए गए थे। उनको यह पता नहीं था कि कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन हो जाएगा। न्यू जर्सी में जैसे ही कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन लगा तो उनकी हालत खराब हो गई। मेहताब सिंह ने बताया कि उनको कई बार यह लगा कि आखिरकार वह यहां आए ही क्यों। 

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- फोटो : अमर उजाला
मेहताब सिंह ने बताया कि उन्होंने काफी प्रयास किया कि किसी तरह से इंडिया वापस लौट जाएं। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। न्यूयॉर्क में तो सामाजिक दूरी जैसी कोई चीज ही नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि दो माह कैसे कटे वह खुद ही जानते हैं। मेहताब सिंह ने कहा कि जो न्यूयॉर्क में मुसीबत ज्यादा है। उन्होंने बताया कि दो माह के दौरान वह अपनी बहन के घर के बाहर तक नहीं निकले। यहां अपने घर में रहना ही ठीक है। 
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- फोटो : अमर उजाला
लुधियाना की रहने वाली सरिता खन्ना ने बताया कि वह अपनी बेटी के पास टेक्सास के ह्यूस्टन सिटी में नवंबर में गईं थीं। तीन माह के लिए ही वह अपनी दवाएं ले गईं थीं। उनका वीजा भी 20 मई तक के लिए ही था। उनका वीजा एक्सपायर हो गया था। ऐसी स्थिति में क्या करतीं। उनको जब मालूम पड़ा कि 21 मई की फ्लाइट है तो उन्होंने एक दिन का वीजा एक्सटेंड करवाया। इसमें 500 डॉलर लगे और उसके बाद तीन गुना किराया देकर फ्लाइट की टिकट खरीदी। सरिता खन्ना ने एयरपोर्ट पर पहुंचते ही कहा कि यहां लौटकर उनको काफी अच्छा लग रहा है। उन्होंने बताया कि वह काफी समय से अपनी दवाएं नहीं खा रहीं थी। ऐसे में अब कम से कम जिंदगी तो ठीक से चलेगी।
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