जन्म तो ले लिया, लेकिन मां बाप अपनाना नहीं चाहते। उसकी शक्ल तक नहीं देखना चाहते और उसे जनने वाली भी खुद एक बच्ची है तो अब नवजात का क्या होगा।
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- फोटो : Baby Physio London
रेप पीड़िता के मां बाप ने अपनाने से इंकार किया
पीड़िता के पिता ने मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखकर बच्चे के गोद लेने की प्रक्रिया शुरू करने की अपील की है। पत्र में यह भी लिखा है कि बच्ची के भविष्य को देखते हुए वह जन्म लेने वाले बच्चे को स्वीकार नहीं करना चाहता है। उसने यहां तक लिखा कि वह जन्मे बच्चे की शक्ल नहीं देखना चाहता। इस बारे में प्रशासन की ओर से पहले ही बता दिया गया था कि यदि पैरेंट़्स बच्चे को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं तो वे बच्चे के गोद लेने की प्रक्रिया की ओर कदम बढ़ाएंगे।
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new born baby dead
लिंग तक पहचानने के लिए नहीं देखा
डिलीवरी के बाद नवजात के लिंग की पहचान के लिए अस्पताल प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। दस साल की बच्ची के पिता ने जन्मे नवजात को अपनाने से इंकार कर दिया था। ऐसी स्थिति में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के सदस्यों को बच्ची दिखाई गई और उन्होंने उसकी गवाही भरी। दरअसल डिलीवरी के बाद जन्मे बच्चे की पहचान के लिए उसके परिजनों को दिखाया जाता है, ताकि बाद में बच्चे के लिंग को लेकर कोई विवाद न हो।
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ऐसे रखा जाएगा बच्ची का ख्याल
नवजात को अपनाने से मना करने के बाद उसकी परवरिश पर सवाल खड़े हो गए हैं। उसके पेरेंट्स शुक्रवार को अधिकारिक तौर पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सरेंडर कर देंगे। उसके बाद कमेटी दो महीने तक पेरेंट्स को समय देगी, ताकि यदि पेरेंट्स का मन बदले तो वह बच्ची को दोबारा से अपने साथ रख सकें। यदि इन दो महीने में पेरेंट्स की ओर से कोई जवाब नहीं आता है तो चाइल्ड वेलफेयर कमेटी नवजात की डिटेल सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स अथॉरिटी में डाल देगा।
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गौरतलब है कि नौंवीं कक्षा की छात्रा के साथ उसी स्कूल के एक शिक्षक ने दुराचार किया था।
सेक्टर 15 के आशियाना में रहेगी नवजात
सेक्टर 15 स्थित आशियाना को चंडीगढ़ प्रशासन के समाज कल्याण विभाग की ओर संचालित किया जाता है। यहां पर पहले से ही 107 बच्चे हैं। जिनका पालन पोषण बहुत ही अच्छे तरीके से हो रहा है। अब इस परिवार में एक और बच्ची शामिल हो जाएगी। बच्ची का पालन पोषण आशियाना में रहने वाली हाउस मदर करेगी। आशियाना में कुल 17 हाउस मदर हैं, जो रोटेशन पर मौजूद रहती हैं और बच्चों की देखरेख करती हैं।
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नवजात शिशु
- फोटो : Getty
मिल्क बैंक से मिलेगा नवजात को मां का दूध
अस्पताल प्रशासन नवजात को मां के दूध की कमी नहीं होने देगा। मेडिकल कॉलेज में एक मिल्क बैंक स्थापित है, जिसमें मां का दूध स्टोरेज होता है। इसमें महिलाएं अपना दूध जमा करती हैं। इससे उन नवजात को दूध मिलता है, जिन्हें मां का दूध नसीब नहीं होता। प्रोफेसर जनमेजा के मुताबिक जब तक नवजात अस्पताल में रहेगी, तब तक उसे मिल्क बैंक से दूध पिलाया जाएगा। अस्पताल जाने के बाद भी यदि जरूरत पड़ी तो मां का दूध उपलब्ध कराया जाएगा।
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भ्रूण हत्या
गोद लेने के लिए उमड़े लोग
जैसे ही नवजात के आने की खबर लोगों के कान पर पड़ी तो नवजात को अपनाने के लिए वे उमड़ पड़े। लोगों ने न सिर्फ अखबारों में फोन किए बल्कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्यों से भी संपर्क किया। कई फोन अमर उजाला दफ्तर में भी आए। सभी चाहते थे कि वे नवजात को गोद ले और उसे अपने परिवार का हिस्सा बनाए। उन्हें इस बात से कतई मतलब नहीं था कि बच्ची के मां बाप कौन हैं। बच्ची का जन्म किस परिस्थिति में हुआ। इससे उन्हें कोई भी लेना-देना नहीं है।
गाजियाबाद के दंपति ने इच्छा जताई
अमर उजाला दफ्तर में सुबह करीब दस बजे गाजियाबाद से एक दंपत्ति का फोन आया। उन्होंने बच्ची को गोद लेने की इच्छा जताई। उन्होंने पूछा कि इसके बारे में किससे संपर्क किया जाए। इसकी क्या प्रक्रिया है। अखबार की तरफ से उन्हें इस बारे में जानकारी दे दी गई। इसी तरह से एक फोन देहरादून से आया। उनकी भी इच्छा थी कि वे बच्ची को अपने परिवार को हिस्सा बनाए। कई ऐसे लोग हैं, जो बहुत ही संपन्न परिवारों से नाता रखते हैं। उन्होंने भी बच्ची को गोद लेने की इच्छा जताई है।
यह होती है गोद लेने की प्रक्रिया
बच्चे के सरेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया जाएगा। दो महीने तक पैरेंट्स को समय दिया जाता है। यदि उनका बच्ची को अपनाने के लिए मूड बदलता है तो बच्ची उन्हें सौंपी जा सकती है। तय समय पूरा होने के बाद बच्ची की डिटेज सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स अथॉरिटी में डाल दी जाएगी। बच्ची की डिटेल देखने के बाद कोई भी उसे गोद लेने के लिए अप्लाई कर सकता है।