फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर पूर्व एथलीट मिल्खा सिंह ने भावुक होकर बताई अपनी आखिरी हसरत। उन्होंने कहा कि, 'मेरे हाथ से 60 साल पहले फिसले ओलंपिक मेडल को देखने की हसरत दिल में ही रह गई। दुख होता है हम इतने साल बाद भी देश की 125 करोड़ आबादी से दूसरा मिल्खा सिंह तैयार नहीं कर सके। मेरी आखिरी हसरत मरने से पहले ओलंपिक का मेडल हाथों में देखने की है।
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भावुक हो मिल्खा सिंह ने बताई आखिरी हसरत
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सोमवार को सेक्टर-23 स्थित बाल भवन में मिल्खा सिंह नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड की ओर से दृष्टिहीन विद्यार्थियों के लिए आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे। स्क्रीन पर भाग मिल्खा भाग... फिल्म में 1960 में पाकिस्तान में हुई एशियन दौड़ में जीत के सीन को देखकर उनकी आंखों से आंसू टपकने लगे।
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मिल्खा सिंह ने कहा कि देश में अच्छे धावक तैयार करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी नहीं है, लेकिन दूसरा मिल्खा सिंह सिर्फ देश के गांव और गलियों से ही मिलेगा। उन्होंने गेल कंपनी द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
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फ्लाइंग सिख ने कहा कि दुनिया में उन्होंने 80 इंटरनेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और सभी में हिंदी में ही इंटरव्यू या बातचीत की है। मिल्खा ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि अपनी भाषा का आदर करना चाहिए और बोलने में फर्क महसूस हो।
मिल्खा ने बताया कि जिंदगी में उन्हें तीन बार रोना पड़ा, पहली बार माता-पिता का साथ छूटने, दूसरी बार ओलंपिक में मेडल हाथ से छूटने और तीसरी बार भाग मिल्खा भाग ..फिल्म देखकर आंखों से खुद ब खुद आंसू निकल पड़ते हैं। 85 वर्षीय मिल्खा ने कहा कि वह आज भी दूसरा मिल्खा तैयार करने के लिए एकेडमी खोलने वालों की हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं।