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'नो ईएमआई टिल पजेशन' से बढ़ सकता है होम लोन का बोझ

Wed, 13 Nov 2019 09:58 AM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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रियल एस्टेट क्षेत्र में छाई सुस्ती को दूर करने और ग्राहकों को लुभाने के लिए बिल्डर नो ईएमआई टिल पजेशन जैसे ऑफर की पेशकश करते हैं। इसमें ग्राहक को मकान बुक कराने के बाद उसका कब्जा मिलने तक की ईएमआई नहीं चुकानी पड़ती है। सुनने में यह योजना तो काफी आकर्षक लगती है, लेकिन अधिकतर मामलों में यह ग्राहकों के लिए महंगी साबित होती है। 

रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि पहली बार देखने में यह योजना फायदेमंद लगती है, क्योंकि इसमें कब्जा मिलने तक ईएमआई का भुगतान बिल्डर करता है। बावजूद इसके ऐसी योजनाएं बैंक और बिल्डर के लिए ही फायदेमंद होती हैं। बिल्डर को जहां आसानी से सस्ता कर्ज मिल जाता है, वहीं बैंक को भी बिना ज्यादा मशक्कत किए एक साथ ढेरों ग्राहक मिल जाते हैं, जो न सिर्फ बड़ा कर्ज उठाते हैं बल्कि उसका समय पर भुगतान भी कर देते हैं। 
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बिल्डर अपनाते हैं ये फंडा 

ऐसी योजनाओं का आकलन करने से पता चलता है कि इसके कई ऐसे पहलू हैं, जो मकान खरीदने वालों की दिक्कतें बढ़ा सकते हैं। इसमें ज्यादातर बिल्डर एक जैसे ही फ्लैट की कीमत भुगतान योजना के हिसाब से तय करते हैं। यानी एक ही घर के अलग-अलग भाव होते हैं, जिसमें नो ईएमआई महंगी पड़ती है। चूंकि, बिल्डर आपसे ज्यादा पैसे वसूलता है इसलिए उसे ईएमआई का भुगतान करने के बाद भी मुनाफा हो जाता है। इस तरह बिल्डर की ओर से भुगतान की गई ईएमआई भी एक तरह से आपके मकान की कीमत में जुड़ जाती है।
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रियल एस्टेट रेग्युलरटी अथॉरिटी बिल को राज्य सभा में पास - फोटो : Reuters

बैंक भी वसूलते हैं ज्यादा ब्याज 

ऐसी योजनाओं में मंजूर होने वाले कर्ज पर निर्माण के दौरान भी ब्याज लगता है। बिल्डर सिर्फ इसी ब्याज का भुगतान बैंक को करते हैं, जिसे प्री-ईएमआई भी कहते हैं। इस तरह आपके कर्ज का मूलधन कब्जा मिलने के बाद भी उतना ही बना रहता है। चूंकि, ऐसी योजनाओं को चुनिंदा बैंक ही कर्ज देते हैं, जो इस पर सामान्य से ज्यादा ब्याज भी वसूलते हैं। इस तरह कुछ समय के लिए ईएमआई से छूट के चक्कर में उन्हें ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है। 

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तीन सहूलियत 

  • किराये पर रहने वालों को मकान का कब्जा मिलने तक दोतरफा भुगतान नहीं करना होगा।
  • निर्माण के दौरान बढ़ने वाली मकान की कीमत का फायदा मिलता है।
  • जुर्माने से बचने के लिए बिल्डर समय पर कब्जा देने का दबाव रहता है।
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तीन संकट

  • एक ही मकान की अलग-अलग कीमत होने से बिल्डर जैसे पैसे वसूल सकते हैं। 
  • कब्जा मिलने में देरी पर किराये के साथ ईएमआई का भुगतान भी करना पड़ सकता है।
  • इन योजनाओं में ज्यादा जोखिम होने से बैंक अधिक लागत पर देते हैं कर्ज। 
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