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निवेश के मंत्र 77: 2020 में IPO से निवेशकों को हुआ मोटा मुनाफा, इन पांच बातों का रखें ध्यान

Thu, 11 Mar 2021 11:41 AM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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निवेश के मंत्र - फोटो : pixabay
2020 में लॉन्च किए गए 15 मेनलाइन आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में से 14 स्टॉक अभी अपने इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेंड कर रहे हैं। कई मामलों में रिटर्न 200 फीसदी से अधिक है और कुछ में 400 फीसदी भी है। 11 शेयरों ने अपने लिस्टिंग के दिन से लाभ देना शुरू कर दिया और छह स्टॉक ने पहले दिन 70 फीसदी से अधिक का रिटर्न दिया। हालांकि, आईपीओ निवेश कोई आसान नहीं हैं। ऐसे कई फेक्टर हैं, जिन पर आपको यह सुनिश्चित करने के लिए विचार करना चाहिए कि आपका आईपीओ नुकसानदायक होने देने के बजाय लाभदायक है। तो आइए जानते हैं एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड के डीवीपी- इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट श्री ज्योति रॉय के अनुसार आईपीओ में निवेश करने के दौरान पांच महत्वपूर्ण कारकों के बारे में-
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आईपीओ - फोटो : pixabay
विस्तृत रिसर्च करें
आईपीओ तब जारी होता है जब कोई कंपनी पहली बार एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया जा रहा है। लिस्टिंग के बाद जरूर कंपनियों को तिमाही आधार पर अपने प्रमुख वित्तीय आंकड़ों की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है। हालांकि, कंपनी के 'सार्वजनिक होने' से पहले की जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं होती है। कंपनी के सभी प्रासंगिक आंकड़े वास्तव में डीआरएचपी या ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में होते हैं। बस ध्यान रखें कि इस तरह के ड्राफ्ट कंपनियां खुद ही फंड जुटाने के उद्देश्य से बनाती हैं। यह ड्राफ्ट निष्पक्ष बाजार इकाई की ओर से तैयार नहीं किया गया है।

इस वजह से आपको पूरी तरह से अनुसंधान करना चाहिए और कंपनी, उसके प्रमोटरों, उनके आपराधिक रिकॉर्ड (यदि कोई हो), वित्तपोषण, प्रतियोगियों, मीडिया कवरेज, और बड़े पैमाने पर इसकी औद्योगिक गतिविधियों के बारे में जितना हो सके जानकारी जुटानी चाहिए। दूसरे शब्दों में अगर आप आईपीओ में अच्छा रिटर्न चाहते हैं, तो अपने शोध को जितना संभव हो सके उतना गहराई से करें।
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निवेश के मंत्र - फोटो : pixabay
मूल्यांकन पर ध्यान दें
शेयरों का आवंटन प्राप्त करने के लिए जल्दबाजी में यह देखा गया है कि बहुत से निवेशक किसी कंपनी या उसके मौलिक विश्लेषण के मूल्यांकन पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। हालांकि, डीआरएचपी में जो कुछ भी दिया गया है, उसके अलावा किसी कंपनी के लिए मौलिक विश्लेषण करने के लिए कोई अन्य डेटा पॉइंट्स उपलब्ध नहीं होते हैं। सार्वजनिक होने वाली कंपनियां आमतौर पर अपने निवेशकों से बहुत ज्यादा मूल्यांकन की उम्मीद करती है। आप हमेशा इसके बारे में सटीक विचार प्राप्त करने के लिए उस उद्योग में उसके समकक्षों या सामान्य प्रवृत्ति को परख सकते हैं। यदि सार्वजनिक होने वाली कंपनी अपनी तरह की पहली है, तो ऐसे में प्रतिस्पर्धी विश्लेषण करना और भी कठिन हो जाता है।

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आईपीओ - फोटो : pixabay
क्यूआईबी भागीदारी को मॉनिटर करें
सार्वजनिक होने वाली कोई भी कंपनी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) या योग्य संस्थागत खरीदारों के लिए विशेष पिच बनाती है। क्यूआईबी सेबी-रजिस्टर्ड फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, बैंक, म्यूचुअल फंड और एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) हैं जो आमतौर पर दूसरों की ओर से धन का निवेश करते हैं। स्टॉक की क्षमता का पता लगाने के लिए समर्पित नेटवर्क होने के साथ-साथ इस प्रक्रिया में एक पार्टी होने के नाते क्यूआईबी की भागीदारी को अक्सर स्टॉक के भविष्य के प्रदर्शन का बैरोमीटर माना जाता है।

हालांकि, आपको इस आंकड़े पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि क्यूआईबी का भी इसमें अपना नफा-नुकसान हो सकता है। उदाहरण के लिए, पिछले साल सूचीबद्ध कंपनियों में से एकमात्र शेयर जो इस समय अपने इश्यू प्राइज से नीचे कारोबार कर रहा है, क्यूआईबी की ओर से लगभग 10 गुना ओवरसब्स्क्राइब हुआ है। यदि आप इस तरह के ओवरसब्सक्रिप्शन को लंबी दौड़ में रिटर्न (या अंडरपरफॉर्मेंस) की गारंटी मानते हैं, तो आप बाद में खुद को नुकसान में पा सकते हैं।
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निवेश के मंत्र - फोटो : pixabay
डीआरएचपी को अच्छे से पढ़ें
सभी कंपनियों को सार्वजनिक रूप से अपने बिजनेस ऑपरेशंस, राजस्व, संपत्ति, देनदारियों, बाजार परिदृश्य का विस्तृत विवरण देना अनिवार्य है, और वे अपने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में अपनी बढ़ी हुई पूंजी का उपयोग कैसे करेंगे, यह भी बताना होता है। निवेशकों को हर चीज के बारे में जानकारी देनी होती है ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें। हालांकि, डीआरएचपी में भी कई तथ्य छिपे होते हैं, यदि आप विवरण को विस्तार से और गहराई से देखते हैं, तो आप निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण टेकअवे भी प्राप्त कर सकते हैं। ऐतिहासिक प्रदर्शन जैसे फेक्टर के साथ ही कंपनी अपने फंड का उपयोग कैसे करेगी, इस पर विशेष ध्यान दें। यदि यह अपने इच्छित उद्देश्य के रूप में आरएंडडी या व्यावसायिक विस्तार का दावा करता है, तो यह एक अच्छा संकेत है क्योंकि इससे भविष्य में विकास संभव है। लेकिन अगर धन उगाहने की पहल देनदारियों का भुगतान करना है, तो कंपनी की बैलेंस शीट और इसमें इसकी हिस्सेदारी का अधिक विस्तृत विश्लेषण करना बेहतर है।
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निवेश के मंत्र - फोटो : pixabay
टेक्नोलॉजी का लाभ उठाएं
आईपीओ और इन-डेप्थ एनालिसिस में जिस डायनामिज्म की आवश्यकता होती है, उसे देखते हुए त्रुटियों के लिए कम गुंजाइश छोड़ते हुए किसी को काम करने देना बेहतर होगा। आज, भारत में निवेश की सिफारिश करने वाले इंजन हैं जो 1 बिलियन से अधिक डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण करके बेंचमार्क नतीजों को सामने रखते हैं। अच्छी खबर यह है कि वे आईपीओ-केंद्रित सलाह भी देते हैं। आप यह समझने के लिए उन पर भरोसा कर सकते हैं कि किस आईपीओ में भाग लेना है और किसमें भाग नहीं लेना है।

कोई आईपीओ जितना आकर्षक हो सकता है, उससे जुड़ा रिस्क फेक्टर भी कुछ ऐसा है जिससे आपको सावधान रहना चाहिए। बस उपर्युक्त कारकों को ध्यान में रखें। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि आईपीओ आपके लिए हमेशा लाभकारी अवसर हों, आपको कोई आवंटन प्राप्त करना चाहिए।
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