फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काम की खबर: नया साल शुरू होने से पहले कर लें ये काम, वरना बाद में हो जाएगी देर

Mon, 16 Nov 2020 03:26 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
वित्तीय फैसले - फोटो : pixabay
नया साल शुरू होने में करीब डेढ़ महीना शेष है। साल 2020 में सभी की जिंदगी बदली है। कोरोना वायरस महामारी के बीच इस साल कई बदलाव हुए हैं और हमें बहुत कुछ सीखने को मिला है। वित्तीय निर्णयों को लेकर लोगों की सोच बदली है और स्वास्थ्य व जीवन बीमा का महत्व और बढ़ा है। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे निर्णयों या जरूरी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपको नव वर्ष शुरू होने से पहले लेने होंगे। ऐसा नहीं करने पर आपको दुष्परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में। 

विज्ञापन

2 of 6
कर प्रणाली - फोटो : iStock
आयकर रिटर्न दाखिल करना ना भूलें
कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने करदाताओं को राहत देते हुए आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाई थी। व्यक्तिगत करदाताओं के लिए वित्त वर्ष 2019-20 का आयकर रिटर्न भरने की समयसीमा बढ़कर 31 दिसंबर 2020 हो गई है। इसलिए सभी करदाता समय पर आयकर रिटर्न भर लें, ताकि बाद में उन्हें जुर्माना ना भरना पड़े।
विज्ञापन

3 of 6
टैक्स - फोटो : pixabay
नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था का करें चुनाव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020 में करदाताओं को इनकम टैक्स के मोर्चे पर राहत दी थी। बजट के दौरान नई टैक्स व्यवस्था का एलान किया गया। सरकार की ओर से यह व्यवस्था वैकल्पिक है, यानी आपके पास विकल्प है कि आप इस साल पुरानी टैक्स व्यवस्था के हिसाब से टैक्स भरेंगे या नई व्यवस्था के हिसाब से। इसका निर्णय आपको समयसीमा से पहले ही लेना होगा। 

मालूम हो कि नई टैक्स व्यवस्था में पांच से 7.5 लाख रुपये तक की सालाना आय पर टैक्स रेट को घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। 7.5 लाख से 10 लाख रुपये तक की सालाना इनकम वालों के लिए आयकर की दर 15 फीसदी कर दी गई है। 10 से 12.5 लाख रुपये तक की आय वालों पर अब 20 फीसदी और 12.5 लाख रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक की आय वालों पर 25 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा। 15 लाख से ज्यादा की आय पर टैक्स रेट 30 फीसदी रहेगी।

4 of 6
बीमा पॉलिसी - फोटो : pixabay
बीमा पॉलिसी की करें जांच
साल 2020 में लोगों के लिए स्वास्थ्य और जीनव बीमा का महत्व बढ़ा है। कोरोना काल में लोग इंश्योरेंस की ओर ज्यादा आकर्षित हुए हैं। वहीं, जिन लोगों ने पहले से ही बीमा करा रखा था, वे अब हेल्थ इंश्योरेंस का दायरा बढ़ा रहे हैं। अगर आपने भी बीमा करा लिया है, तो यह चेक कर लें कि वह पर्याप्त है या नहीं। बड़े शहरों में रहने वाले लोगों को कम से कम पांच से 10 लाख रुपये तक का बीमा कराना चाहिए। जीवन बीमा की बात करें, तो यह सालाना आय का 10 से 20 गुना होना चाहिए। 

यह भी पढ़ें: आज ही लें ये आठ संकल्प, आर्थिक रूप से होंगे मजबूत, वित्तीय संकट से रहेंगे दूर
विज्ञापन

5 of 6
लोन - फोटो : pixabay
लोन रिफाइनेंसिंग के बारे में सोचें
कोरोना वायरस महामारी के दौरान लोगों को वित्तीय सहायता देने के लिए सरकार व केंद्रीय बैंक (RBI) ने छह महीनों के लिए लोन मोरेटोरियम (किस्तों में छूट) का विकल्प दिया था। वहीं इस दौरान सभी बैंकों ने लोन की दरें सस्ती की हैं। इसलिए आपको लोन रिफाइनेंसिंग के बारे में सोचना चाहिए। इससे आप पर लोन का बोझ थोड़ा कम होगा और काफी पैसा भी बचेगा। इसके लिए आप अपने बैंक से कहें कि वे आपको कम दर पर लोन दें या जिस बैंक में सस्ती दर पर लोन मिल रहा है, उस बैंक में अपना लोन ट्रांसफर कराएं।  

यह भी पढ़ें: काम की खबर: दिवाली पर मिले हैं इतनी कीमत के तोहफे, तो देना पड़ेगा टैक्स
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
क्रेडिट रिपोर्ट - फोटो : pixabay
क्रेडिट स्कोर पर रखें नजर 
हम हमेशा सुनते हैं कि क्रेडिट स्कोर खराब होने पर बैंक या फिर कोई भी वित्तीय कंपनी ऋण नहीं देती है। खराब क्रेडिट स्कोर के चलते क्रेडिट कार्ड भी नहीं बनता है। क्रेडिट इनफॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड (सिबिल) आपको 300 से 900 अंकों के बीच एक स्कोर प्रदान करता है। ये इस आधार पर तय होता है कि आपका पहले का क्रेडिट कार्ड उपयोग कितना है, आप अपना बैंक खाता कैसे रखते हैं, कोई चेक तो बाउंस नहीं हुआ है, मौजूदा लोन, बिना इंश्योरेंस के मौजूदा लोन, लोन के रीपेमेंट और आपने कितनी बार लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन दिया है। इसलिए अपने क्रेडिट स्कोर पर नजर रखें। 

यह भी पढ़ें: निवेश के मंत्र 75: NPS में सभी कर्मचारियों को मिल सकती है छूट , जानिए आपको कैसे होगा फायदा
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें