वित्त वर्ष 2020 के लिए वित्तीय समेकन लक्ष्य पर बने रहना स्पष्ट रूप से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र होगा जिस पर अंतरिम बजट में विचार किया जा सकता है क्योंकि सरकार के पास सीमित वित्तीय क्षेत्र है। इस तरह, वित्त वर्ष 2020 में यदि उच्च बाजार उधारी के जरिये किसी जनवादी घोषणा को वित्त पोषित किया जाता है तो इससे उच्च ब्याज दर एवं उच्च महंगाई दर के परिदृश्य को बढ़ावा मिलेगा, और यह वित्तीय क्षेत्र के लिए नकारात्मक होगा।
कंपनियों के लिए फायदेमंद नहीं रहा करों का प्रावधान
इसके अलावा, पिछले बजट में पेश किया गया लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) निवेशकों एवं वित्तीय क्षेत्र के परिदृश्य से नकारात्मक रहा है और यह सिक्युरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) अदा करने के बाद दोहरे कराधान (टैक्सेशन) को बढ़ावा देता है। इस तरह, तीन साल या अधिक समय के लिए रखी जाने वाली प्रतिभूतियों पर एलटीसीजी वसूलने का कोई मतलब नहीं है।
इसी तरह डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) कॉरपोरेट कमाई पर तिहरे कराधान को बढ़ावा देता है और इसलिए प्राप्त्किर्ता पर लेवी के बजाय इससे विदड्रॉ करना ज्यादा बेहतर है। इनके अतिरिक्त स्टॉक एक्सचेंज ट्रांजेक्शन पर स्टांप ड्यूटी को खत्म करना एक लंबे समय से किया जा रहा अनुरोध है।
सरकार आयकर छूट की सीमा को भी दोगुना कर 5 लाख रुपये कर सकती है और धारा 80सी के तहत डिडक्शन लिमिट को बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये किया जा सकता है ताकि बढ़त को बढ़ावा मिलेगा जो कि वित्तीय क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम होगा।
चिराग जैन, सीईओ, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, अशिका ग्रुप