1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से 92 साल से चली आ रही परंपरा पर विराम लग जाएगा। इस बार से रेल बजट आम बजट का हिस्सा बन जाएगा। लेकिन क्या आपको पता है कि रेल बजट 2017 से पहले भी कभी आम बजट का हिस्सा था। जानिए रेल बजट के रोचक तथ्यों के बारे में.....
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1923 तक रेल बजट था आम बजट का हिस्सा
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रेल बजट
रेल बजट 1923 तक आम बजट के साथ ही पेश होता था। अग्रेंजों के समय इसको अलग कर दिया गया था और 92 सालों तक इसी प्रथा को जारी रखा गया। 1920-21 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने ब्रिटिश रेलवे इकनॉमिस्ट विलियम एकवर्थ के नेतृत्व में एक 10 सदस्यों की कमेटी का गठन किया।
इस कमेटी ने सिफारिश की, जिसके बाद रेल बजट को आम बजट से अलग कर दिया गया था। तब इसके पीछे कारण दिया गया था कि रेलवे का दायरा काफी बढ़ गया है, इसलिए इसको अलग से पेश करना चाहिए।
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आजादी के बाद से इसलिए अलग पेश होता रहा रेल बजट
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अंग्रेजों द्वारा जो प्रथा शुरू की गई थी उसको आजादी के बाद भी जारी रखा गया। रेलवे को सुचारू रुप से देखने के लिए रेल मंत्रालय के आधीन रेलवे बोर्ड का गठन किया गया और केंद्र में अलग से रेल मंत्री भी रखा गया। भारी-भरकम बजट और रेलवे के बड़े स्वरुप के कारण इसको 2016 तक अलग से पेश किया गया। हर पार्टी के लिए रेल मंत्री का पद काफी महत्वपूर्ण होता था। कई बार गठबंधन सरकारों में राजनीतिक दल रेल मंत्री का पद पाने के लिए लड़ते थे।
पहले शाम को पांच बजे पेश होता था रेल व आम बजट
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आजादी के बाद 2000 तक बजट पेश करने का समय फरवरी महीने की आखिरी तारीख को शाम 5 बजे होता था। वो इसलिए क्योंकि ब्रिटेन में तब सुबह के 11 बज रहे होते थे और इससे वहां के सांसद भी बजट को आसानी से सुन सकते थे। यह समय औपनिवेशक काल की ध्यान दिलाता था। इसके बाद 2001 से बजट पेश करने का समय सुबह 11 बजे कर दिया गया।
रेल बजट का टीवी पर सीधा प्रसारण 1994 में हुआ। तब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव ने इसे पेश किया था। लालू यादव लगातार 6 बार रेल बजट पेश कर चुकें हैं, जो कि एक रिकॉर्ड है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी पहली महिला रेल मंत्री बनी और उन्होने एक-एक बार यूपीए व एनडीए के शासनकाल में बजट पेश किया था।