Gold Prices: वैश्विक बाजार में सोने की कीमत फरवरी में 2,900 डॉलर प्रति औंस से ऊपर एक नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। इस साल की शुरुआत से अब तक अब तक सोने का भाव 12 प्रतिशत तक चढ़ा है। 20 फरवरी को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 89,450 रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। सोने की कीमत में लगातार इजाफा होने के क्या कारण हैं, इसकी कीमतें कैसे तय होती हैं, अमेरिका में ट्रंप सरकार के फैसले सोने के भाव पर कैसे असर डाल रहे हैं, आइए जानते हैं सबकुछ।
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त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी
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वैश्विक बाजार में सोने की कीमत फरवरी में 2,900 डॉलर प्रति औंस से ऊपर एक नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। इस साल की शुरुआत से अब तक अब तक सोने का भाव 12 प्रतिशत तक चढ़ा है। भारत की बात करें तो दिल्ली में सोने की कीमत मंगलवार को 250 रुपये मजबूत होकर 89,350 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले 20 फरवरी को 99.9 प्रतिशत और 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत क्रमश: 89,450 रुपये और 89,050 रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई थी।
सोने की कीमत में लगातार इजाफा होने के क्या कारण हैं, इसकी कीमतें कैसे तय होती हैं, अमेरिका में ट्रंप सरकार के फैसले सोने के भाव पर क्या असर डाल रहे हैं, आइए जानते हैं सबकुछ।
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सोने-चांदी के भाव
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2024 में सोने की कीमतों में कितना इजाफा हुआ?
बीते एक महीने में सोने का प्रदर्शन भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजारों से भी बेहतर रहा है। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक बीएसई सेंसेक्स की बात करें तो इसमें बीते एक महीने के दौरान 1.01% की गिरावट दर्ज की गई है। एक महीने में अमेरिकी शेयर सूचकांक एसएंडपी500 में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और वहीं, ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजार सूचकांक एएसएक्स 200 ने भी महज 2 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बीते एक महीने में सोने की कीमतों की बात करें तो इसमें करीब 8% तक का इजाफा हुआ है। इससे पहले 2024 में भी सोने ने लोगों को मालामाल किया था। बीते साल बहुमूल्य धातु की कीमत में असाधारण उछाल आया था, इसमें 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, जो 14 वर्षों में की सबसे बड़ी वृद्धि है।
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Gold Silver Price
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सोने की हालिया तेजी का कारण क्या है?
सोने की कीमतों के उछाल में कई कारण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बीते एक डेढ़ वर्षों में सोने की कीमतों में उछाल के कई मुख्य कारण हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और मुद्रास्फीति का भय, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ धमकियों के कारण और बढ़ गया है। अमेरिका की ओर से अलग-अलग देशों पर टैरिफ लगाए जाने के एलान के बाद सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है। दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों की ओर से भी सोने की मांग बढ़ने से कीमतों में उछाल आया है।
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सोने-चांदी के भाव
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सोने की कीमतों में बढ़ोतरी पर क्या है जानकारों की राय?
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वित्त विभाग के प्रोफेसर डिर्क बाउर के अनुसार, सोने की खानों से उत्पादन और रिसाइकलिंग के जरिए पीली धातु की आपूर्ति समय के साथ अपेक्षाकृत स्थिर रही है। लेकिन इस तुलना में मांग कहीं ज्यादा परिवर्तनशील है। सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले चार मुख्य घटक हैं- आभूषण, तकनीक, निवेश और केंद्रीय बैंकों की मांग। 2024 में, आभूषणों की कुल मांग में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रही, प्रौद्योगिकी या औद्योगिक मांग 5 प्रतिशत रही, वहीं निवेश के लि सोने की मांग 25 प्रतिशत और केंद्रीय बैंकों की मांग 20 प्रतिशत रही। निवेश मांग से तात्पर्य उन निवेशकों से है जो इसे एक परिसंपत्ति के रूप में खरीदते हैं। वहीं, केंद्रीय बैंक आम तौर पर अपने रिजर्व होल्डिंग्स में विविधता लाने के लिए सोना खरीदते हैं।
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gold
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मांग और आपूर्ति के गणित के कारण सोने की कीमतों पर दबाव
सोने की मांग के ये सभी चार घटक समय के साथ बदलते रहते हैं। सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव कभी आभूषणों की मांग से, कभी निवेशकों की मांग से, और कभी-कभी- जैसा कि हाल के महीनों में हुआ है- केंद्रीय बैंक की मांग से संचालित होते हैं। मुश्किल यह है कि सोने की आपूर्ति और मांग दोनों वैश्विक हैं। यह आपूर्ति दुनिया भर की सोने की खदानों, अफ्रीका के उभरते देशों और ऑस्ट्रेलिया व कनाडा जैसे औद्योगिक देशों से आती है। मांग के मामले में भी यही फॉर्मूला लागू होता है। आभूषणों की मांग में चीन और भारत का दबदबा है, लेकिन मांग कई देशों से आती है, साथ ही निवेश की मांग भी कई देशों से आती है। केंद्रीय बैंक की ओर से सोने की मांग भी मांग दुनिया भर के बड़े और छोटे केंद्रीय बैंकों से आती है।
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सोने में निवेश से लाभ की आस (सांकेतिक तस्वीर)
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हाल के महीनों में क्यों बढ़ रही है सोने की मांग?
सोने की लोकप्रियता का एक मुख्य कारण यह है कि से एक सुरक्षित भंडार माना जाता है। सोने की कीमतें मुद्रास्फीति के साथ बढ़ती रहती हैं, लंबे समय तक अपना मूल्य बनाए रखती हैं। इससे निवेशकों का पैसा बहुत हद तक महंगाई के असर से अछूता रहता है। दूसरे शब्दों में, एक औंस सोने से आज से 20 साल पहले ही जितनी ही वस्तुएं (या उससे ज्यादा) खरीदी जा सकती हैं। हालांकि यह बाद भारत जैसी विकासशील देशों पर तो लागू होती है पर अमेरिकी या ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसे मुद्रा (या फिएट करेंसी) के मामले में लागू नहीं होती। मुद्रास्फीति के कारण, पैसे का मूल्य स्थिर नहीं रहता बल्कि समय के साथ घटता जाता है। चूंकि सोना अपना मूल्य बनाए रखता है, इसलिए यह मुद्रास्फीति के प्रभाव से बचा रहता है।
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सोने-चांदी के दाम में बढ़ोतरी
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वैश्विक चुनौतियों के समय कैसे बढ़ता है सोने का भाव?
सोने की सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। इसका मतलब है कि जब निवेशक किसी झटके या संकट के से मुकाबला कर रहे होते हैं तो वे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने को चुनते हैं। ऐसे में खरीदारी बढ़ने से सोने की कीमतें और बढ़ जाती हैं। उदाहरण के लिए, निवेशकों ने 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों, 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट की शुरुआत और 2020 में कोविड महामारी की शुरुआत के दौरान प्रतिक्रिया देते हुए बड़े पैमाने पर सोना खरीदा। हालांकि, सोने की कीमतों पर सुरक्षित आश्रय से जुड़ा प्रभाव आमतौर पर अल्पकालिक होता है, जिसके परिणामस्वरूप अक्सर लगभग 15 दिनों के बाद सोने की कीमतों में गिरावट आ जाती है।
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सोने-चांदी के भाव
- फोटो : amarujala.com
केंद्रीय बैंक सोने की कीमत पर कैसे असर डाल रहे?
फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और उसके बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों- विशेष रूप से विदेशों में रूस के विदेशी सरकारी बांड होल्डिंग्स को फ्रीज करने के कदम ने सरकारों के लिए विदेशी मुद्रा होल्डिंग्स तक पहुंच खोने का जोखिम पैदा किया। इसे देखते हुए कुछ सरकारों या केंद्रीय बैंकों ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोने की खरीद बढ़ा दी। इसके असर से 2022 में केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीद 1,082 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। वर्ष 2023 में इतिहास में दूसरी सबसे अधिक वार्षिक खरीद 1,051 टन हुई, इसके बाद 2024 में 1,041 टन सोना केंद्रीय बैंकों की ओर से खरीदा गया। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के प्रति केंद्रीय बैंकों की संभावित प्रतिक्रिया, सुरक्षित पनाह की तलाश करने वाले निवेशकों के समान है, लेकिन केंद्रीय बैंकों के लिए यह एक नई घटना है।
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सोने-चांदी की कीमतें
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क्या डॉलर की कमजोरी से भी सोना मजबूत हो रहा?
केंद्रीय बैंकों की ओर से अमेरिकी डॉलर खर्च कर सोना खरीदने से सोने की कीमतों पर एक और दूसरा प्रभाव भी पड़ता है। सोने के लिए अमेरिकी डॉलर बेचने का मतलब है कि अमेरिकी डॉलर कमजोर हो रहा है, जिससे सोने की कीमत बढ़ जाती है। अगर अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो आपको सोना खरीदने के लिए ज्यदा अमेरिकी डॉलर की जरूरत होगी। सोने की कीमतों और मुद्राओं के बीच विपरीत संबंध भी सोने को मजबूत बनाता है। इसका मतलब यह है कि सोना निवेशकों को अस्थिर विनिमय दरों के कारण होने वाले संभावित नुकसान से बचा सकता है। यह प्रभाव ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी अस्थिर मुद्राओं पर विशेष रूप से लागू होती है।
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सोने-चांदी का भाव
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क्या ट्रंप के फैसलों से भी सोना मजबूत हो रहा?
ऐसे तो यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के कारण उत्पन्न पैदा हुई परिस्थितियों के अलावे, सोने की कीमतों में हाल ही में हुई वृद्धि को किसी एक घटना से जोड़ना कठिन है। लेकिन, अमेरिका में हालिया सत्ता परिवर्तन से इस पर खासा असर पड़ा है। डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद न केवल टैरिफ और व्यापार युद्ध के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने का जोखिम बढ़ गया है, बल्कि इससे भू-राजनीतिक जोखिम भी बढ़ गया है। अमेरिकी सरकार अन्य देशों के साथ अपने गठबंधनों का पुनर्मूल्यांकन कर रही है। अपने पूर्ववर्तियों और आम तौर पर राजनेताओं की तुलना में ट्रम्प की अलग सोच ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इससे सोने की कीमतों में वृद्धि हो तो यह आश्चर्य की बात नहीं होगी। सोने की कीमतों का हालिया रुझान बताता "सोने को बुरी खबरें पसंद हैं"।
सोने की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कैसी खबर?
डिर्क बाउर के अनुसार, सोने की कीमतें भू-राजनीतिक झटकों या उच्च मुद्रास्फीति की आशंका पैदा कर रही हैं। महामारी के बाद महंगाई बढ़ने से पहले सोने की कीमतें काफी बढ़ गईं थी और 2022 में मुद्रास्फीति के चरम पर पहुंचने पर गिरना शुरू हो गईं। हालांकि यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि 2025 में सोना सर्वकालिक उच्च स्तर पर क्यों पहुंच गया है, लेकिन संभवतः यह विश्व अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर नहीं है।