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आर्थिक सर्वेक्षण: दालों-खाद्य तेलों का उत्पादन बढ़ाने, आयात कम करने के लिए नीतिगत सुधार होंगे लागू; बड़ी बातें

Sat, 01 Feb 2025 08:16 AM IST
अभिषेक दीक्षित बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Economic Survey: बजट से एक दिन पहले शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण को संसद में पेश किया। इसमें अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और अगले वित्त वर्ष में रफ्तार, महंगाई सहित सभी क्षेत्रों की चुनौतियों और उसके निराकरण पर जोर दिया गया है। 2025-26 में अर्थव्यवस्था की रफ्तार 6.3 से 6.8 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए खाद्य तेलों व दालों का उत्पादन बढ़ाने व अनाज का उत्पादन घटाने का सुझाव दिया गया है।
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निर्मला सीतारमण - फोटो : Amar Ujala
दालों और खाद्य तेलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सुधारों को लागू किया जा सकता है। जबकि अनाज के अधिक उत्पादन को हतोत्साहित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। आर्थिक सर्वेक्षण में यह सुझाव दिया गया है। वर्तमान में घरेलू कमी को पूरा करने के लिए दालों और खाद्य तेलों का बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है।

संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में इस बात पर जोर दिया गया कि विभिन्न विकास पहलों के बावजूद कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास क्षमता है। कमजोर परिवारों की सुरक्षा के लिए अलग तंत्र के साथ किसानों को बाजार से निर्बाध मूल्य संकेत प्राप्त करने की सुविधा दी जानी चाहिए। सर्वेक्षण में जरूरी तीन प्रमुख नीतिगत बदलावों की रूपरेखा दी गई है। इसमें मूल्य जोखिम बचाव के लिए बाजार तंत्र स्थापित करना, ज्यादा खाद के उपयोग को रोकना और पानी व बिजली वाली फसलों के उत्पादन को हतोत्साहित करना है।

इन नीतिगत बदलावों से भूमि और श्रम उत्पादकता को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था में कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारत को दलहन और तिलहन के उत्पादन में लगातार कमी का सामना करना पड़ रहा है। तिलहन की 1.9 प्रतिशत की धीमी वृद्धि दर चिंता पैदा करती है। इससे घरेलू खाद्य तेल की मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। इसे सुलझाने के लिए जलवायु लचीली फसल किस्मों को विकसित करने, उपज बढ़ाने और फसल के नुकसान को कम करने के लिए केंद्रित रिसर्च का सुझाव दिया गया है। चावल वाले क्षेत्रों में दालों के क्षेत्र का विस्तार करने के प्रयासों से मदद मिल सकती है।
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निर्मला सीतारमण - फोटो : ANI
ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने पर जोर
अधिक न्यायसंगत और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए सरकार का जोर ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने पर रहा है। ग्रामीण परिवारों और छोटे व्यवसायों की वित्तपोषण जरूरतों को सूक्ष्म वित्त संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और अन्य वित्तीय मध्यस्थों के माध्यम से पूरा किया जा रहा है।

ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, ग्रामीण आवास, पेयजल और स्वच्छता, स्वच्छ ईंधन, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित करके विभिन्न उपाय किए गए हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी को ले जाना भी ग्रामीण विकास एजेंडे का एक प्रमुख पहलू रहा है। स्वामित्व योजना के माध्यम से बनाए जा रहे डिजिटल भूमि रिकॉर्ड दिखाता है कि ग्रामीण भूमि प्रबंधन और व्यक्तिगत आर्थिक सशक्तीकरण में संरचनात्मक बदलाव आ सकता है।

ग्रामीण आबादी के स्वास्थ्य पैरामीटर पर भी प्राथमिक ध्यान केंद्रित किया गया है। इस पर कोरोना के कारण ज्यादा जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत इस साल 9 जनवरी तक 8,34,695 किमी सड़क की लंबाई मंजूर की गई। 7,70,983 किमी लंबाई की सड़क पूरी हो गई। अब तक 99.6 प्रतिशत लक्षित बस्तियों को कनेक्टिविटी प्रदान की जा चुकी है। 2016 से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत 2.69 करोड़ घर पूरे हो चुके हैं। मिशन अमृत सरोवर के तहत 68,843 जल निकायों का निर्माण किया गया है।

27 जनवरी तक जल जीवन मिशन के तहत लगभग 12.2 करोड़ घरों को नल जल कनेक्शन दिया गया है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 11.8 करोड़ शौचालय और 2.51 लाख सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण किया गया है।
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Budget 2025 - फोटो : PTI
11 करोड़ से अधिक किसान पीएम-किसान से लाभान्वित हुए 31 अक्तूबर, 2024 तक
सरकारी योजनाओं ने कृषि क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव दिखाया है। 31 अक्तूबर, 2024 तक 11 करोड़ से अधिक किसान पीएम-किसान से लाभान्वित हुए और 23.61 लाख किसान पीएम-केएमवाई पेंशन योजना के तहत नामांकित हुए। रिपोर्ट में छोटे किसानों को समर्थन देने और विशेष रूप से दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में खाद्यान्न भंडारण प्रणालियों को आधुनिक बनाने के लिए निजी क्षेत्र के निवेश की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।

जोखिम कम करने में मददगार पशुपालन मत्स्यपालन
पशुपालन, मत्स्य पालन या कृषिवानिकी जैसी संबद्ध गतिविधियां किसानों को जोखिमों को प्रभावी ढंग से कम करने में सक्षम बना सकती हैं। आय विविधीकरण के लिए इन क्षेत्रों और इनसे संबद्ध क्षेत्रों के बढ़ते महत्व पर जोर दिया गया है। हालांकि, इसने जलवायु परिवर्तन और पानी की कमी जैसी चुनौतियों को चिह्नित किया है जिनके लिए लक्षित हस्तक्षेप की जरूरत है।

कृषि क्षेत्र में 3.5 फीसदी वृद्धि
वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पिछली चार तिमाहियों में 0.4-2.0 प्रतिशत की वृद्धि दर से उबर गई। मौजूदा कीमतों पर वित्त वर्ष 2024 के अनंतिम अनुमान के अनुसार, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि का लगभग 16 प्रतिशत योगदान रहा है। कृषि प्रदर्शन को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक मौसम की स्थिति का प्रभाव है।

कृषि में सुधार के लिए लक्षित हस्तक्षेप की जरूरत
किसानों के लिए प्रशिक्षण को बढ़ावा देने, उच्च उपज और रोग प्रतिरोधी बीज किस्मों के उपयोग और दलहन-तिलहन के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में कृषि में सुधार के लिए लक्षित हस्तक्षेप की जरूरत है। खादों का सही तरीके सेे उपयोग कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

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निर्मला सीतारमण - फोटो : amarujala.com
विकसित भारत: कौशल व शिक्षा के लिए रणनीतिक योजना जरूरी
जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कौशल और शिक्षा के लिए एक रणनीतिक योजना जरूरी है। इसमें सीखने से लेकर नौकरी बाजार तक एक सुचारु परिवर्तन को सक्षम करने के लिए शुरुआती व्यावसायिक प्रशिक्षण की वकालत की गई है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि एक मजबूत भविष्य के रोडमैप में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल बनाने के लिए उद्योग-अकादमिक साझेदारी, निरंतर कौशल विकास और लचीले शिक्षण मॉडल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। एक मजबूत दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने और रणनीतिक हस्तक्षेप की जरूरत है।

कम कुशल श्रमिकों की चुनौती है प्रमुख
कौशल परिदृश्य में प्रमुख चुनौती कम कुशल श्रमिकों की है, जो शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर शैक्षिक परिणामों की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार है। कार्यबल में कम शैक्षिक कौशल उनकी शैक्षणिक योग्यता और नौकरी बाजार की मांगों के बीच बेमेल है। इस बेमेल के कारण 53 फीसदी से अधिक स्नातक व 36 फीसदी से अधिक स्नातकोत्तर शैक्षणिक योग्यता से नीचे की भूमिकाओं में बेरोजगार हो गए हैं। सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया है कि कौशल व रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने वाली लक्षित योजनाएं कौशल अंतर को पाटने और सही प्रोत्साहन के माध्यम से रोजगार सृजन को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं। महिलाओं-लड़कियों पर केंद्रित दीर्घकालिक रणनीति अपनाने से उन्हें नौकरी के बढ़ते अवसरों के लिए तैयार किया जाएगा।

रोजगार क्षमता में सुधार की जरूरत
व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिये रोजगार क्षमता में सुधार के लिए शिक्षा का प्रारंभिक व्यावसायीकरण किया जा सकता है। नीतियों को पारंपरिक से गैर-पारंपरिक भूमिकाओं में परिवर्तन को प्रोत्साहित करते हुए उभरते क्षेत्रों के लिए लक्षित कौशल विकास और समर्थन को प्राथमिकता देनी चाहिए। 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम और 28 वर्ष की औसत आयु के साथ जनसांख्यिकीय लाभांश इसे वैश्विक प्रतिभा केंद्र बनाता है, बशर्ते कि यह रोजगार योग्य, उद्योग-प्रासंगिक कौशल के साथ कार्यबल तैयार कर सके।

यह अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करता है, विकास को प्रोत्साहित करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है व भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है। ऑटोमेशन, एआई और डिजिटलीकरण जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियां उद्योगों को नया आकार दे रही हैं।
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निर्मला सीतारमण - फोटो : ANI
कंपनियों ने जमकर मुनाफा कमाया पर कर्मचारियों का वेतन कम बढ़ाया
अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कॉरपोरेट मुनाफे में वृद्धि मजदूरी के अनुरूप होनी चाहिए। दोनों के बीच ज्यादा असमानताएं मांग पर अंकुश लगाकर अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा करती हैं। कंपनियों ने जमकर मुनाफा कमाया है, पर वेतन वृद्धि उस तरह से नहीं हुई। कॉरपोरेट मुनाफे में असंगत वृद्धि बड़ी कंपनियों के बीच आय असमानता के बारे में चिंता पैदा करती है। सतत आर्थिक विकास रोजगार आय को बढ़ाने पर निर्भर करता है, जो सीधे ग्राहक खर्च को व उत्पादन क्षमता में निवेश को बढ़ावा देता है।

सर्वे के अनुसार, दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पूंजी व श्रम के बीच आय का सही वितरण जरूरी है। यह मांग को बनाए रखने व मध्यम से लंबी अवधि में कॉरपोरेट राजस्व व लाभप्रदता वृद्धि का समर्थन करने के लिए जरूरी है।

निफ्टी-500 कंपनियों का मुनाफा 15 साल के शीर्ष पर
निफ्टी 500 कंपनियों का जीडीपी के अनुपात में लाभ वित्त वर्ष 2003 में 2.1 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 24 में 4.8 प्रतिशत हो गया। यह वित्त वर्ष 2008 के बाद सबसे अधिक है। वित्त वर्ष 24 में मुनाफा 22.3 प्रतिशत बढ़ गया, लेकिन रोजगार में केवल 1.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कर्मचारियों का खर्च 2023 में 17 प्रतिशत से घटकर केवल 13 प्रतिशत बढ़ा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
हवाई यातायात में सुधार
नए हवाई अड्डों और क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी योजना के साथ हवाई कनेक्टिविटी में काफी सुधार हुआ है। हवाई अड्डे के डेवलपर्स और ऑपरेटरों ने वित्त वर्ष 2020-25 के लिए लक्षित 91,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का 91 प्रतिशत हासिल कर लिया है। बढ़ती हवाई यातायात मांग के बीच घरेलू एयरलाइंस ने  1,700 से अधिक विमानों का ऑर्डर दिया है। उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) के तहत अब तक दो जल हवाई अड्डों और 13 हेलीपोर्टों सहित 88 हवाई अड्डों को जोड़ने वाले 619 मार्गों का संचालन किया जा चुका है।
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रियल एस्टेट - फोटो : अमर उजाला
रियल एस्टेट: मांग में तेजी से 2036 तक 9.3 करोड़ यूनिट आवास पहुंचने की उम्मीद
सर्वे में कहा गया है कि आर्थिक स्थिरता, सड़कों और मेट्रो नेटवर्क जैसे भौतिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के कारण मजबूत मांग से रियल एस्टेट बाजार ने अच्छा प्रदर्शन किया है। इस सुधार के कारण न केवल टियर 1 और टियर 2 शहरों में बल्कि, पूरे देश में रियल एस्टेट की मांग उभर रही है। आवास की मांग 2036 तक 9.3 करोड़ यूनिट तक पहुंचने की उम्मीद है। 2024 के पहले छह महीनों में आवासीय रियल एस्टेट बाजार बिक्री 11 साल के उच्चतम स्तर पर रही।

6 जनवरी, 2025 तक, लगभग 1.38 लाख रियल एस्टेट परियोजनाएं और 95,987 रियल एस्टेट एजेंट रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। देशभर में रेरा द्वारा 1.38 लाख शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है।

नियामकों को बेहतर संतुलन बनाए रखने की जरूरत
वित्तीय क्षेत्र के नियामकों को वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए स्थिरता और नवाचार के बीच एक बेहतर संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। नियामक ढांचे को पुनरीक्षण और संशोधित करने की जरूरत होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई का उपयोग सामाजिक मूल्यों के साथ हो। जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ नवाचार को संतुलित किया जा सके।

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eye Health - फोटो : istock
स्वास्थ्य: सात साल में स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च 19% बढ़ा  
स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती देने के लिए सालाना सरकारी खर्च में इजाफा हो रहा है। बीते सात साल में स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च में 19 फीसदी वृद्धि हुई। 2015 से 2022 के बीच खर्च में सरकार का हिस्सा 29 से बढ़कर 48 फीसदी हो गया है। 2016 से 2022 के बीच पूंजीगत खर्च के हिस्से में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे पर व्यय में वृद्धि हुई है। आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थी परिवार को सालाना पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा देने से मरीजों ने 1.25 लाख करोड़ से अधिक की बचत की है। इस योजना के तहत 2018 से अब तक करीब 8 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों ने इलाज कराया है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 72.81 करोड़ मरीजों के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते बनाए गए हैं, जहां उनका चिकित्सा रिकार्ड ऑनलाइन सुरक्षित रखा है।
  • वित्तीय वर्ष 2022 में कुल स्वास्थ्य खर्च 9.04 लाख करोड़ रुपये रहा जो जीडीपी का करीब 3.8 फीसदी रहा है। वर्तमान स्वास्थ्य खर्च 7.89 लाख करोड़ और पूंजीगत व्यय 1.15 लाख करोड़ रुपये है।
  • आयुष्मान भारत ने 40 फीसदी कमजोर आबादी को स्वास्थ्य कवरेज दिया है। 15 जनवरी तक 40 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक भी इस योजना में पंजीयन करा चुके हैं। प्रधानमंत्री मुफ्त डायलिसिस योजना जैसी अन्य पहलों से 25 लाख मरीजों को लाभ हुआ है।
  • भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई तकनीक को अपनाने की काफी संभावनाएं हैं। 2023 से भारत में 34 फीसदी स्वास्थ्य सेवा संगठन एआई योजनाओं का संचालन कर रहे हैं और 16 फीसदी ने अपनी जेनरेटिव एआई पहल को उत्पादन में स्थानांतरित किया।

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Share Market - फोटो : ANI
शेयर बाजार में तेजी से बढ़े निवेशक, 11 करोड़ के पार
कॉरपोरेट की बेहतर आय और ऑनलाइन डिजिटल निवेश प्लेटफार्मों ने पूंजी बाजार में निवेशकों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया है। इससे यूनिक निवेशकों की संख्या बढ़कर 11 करोड़ के पार हो गई है। इक्विटी से उत्पन्न मजबूत लाभ ने पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण घरेलू संपत्ति बनाई है। एनएसई के अनुमान के अनुसार, 2020 से सितंबर, 2024 तक भारतीय इक्विटी में घरेलू संपत्ति में 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि हुई है। दिसंबर, 2024 के अंत में सालाना आधार पर डीमैट खातों की संख्या 33 प्रतिशत बढ़कर 18.5 करोड़ हो गई है। म्यूचुअल फंड उद्योग में यूनिक निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2021 में 2.9 करोड़ से दोगुनी होकर दिसंबर 2024 तक 5.6 करोड़ हो गई है। फोलियो की कुल संख्या बढ़कर दिसंबर 2024 के अंत में 22.5 करोड़ हो गई। खुदरा निवेशकों के पास 18.6 लाख करोड़ रुपये की म्यूचुअल फंड यूनिट्स थी।

वित्तीय बाजारों के बुलबुले से सावधान रहने की जरूरत
20 47 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नीति और व्यापक आर्थिक परिणामों को आकार देने में वित्तीय बाजारों के प्रभुत्व से सावधान रहने की जरूरत है। वित्तीयकरण के परिणाम उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में स्पष्ट हैं, जहां इसने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के कर्ज को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचा दिया है। हम वित्तीयकरण और परिसंपत्ति मूल्य बुलबुले के जोखिम के प्रति भी सावधान करते हैं जो पश्चिमी देशों में हो रहा है। यही कारण है कि भारत के नियामकों ने निवेशकों के लिए अत्यधिक और वित्तीय रूप से विनाशकारी सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए जो कुछ उपाय किए, वे प्रणालीगत स्थिरता के लिए आवश्यक थे। अत्यधिक वित्तीयकरण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है।

भारत जैसे निम्न-मध्यम आय वाले देश के लिए लागत विशेष रूप से अधिक हो सकती है। भारत को एक ओर वित्तीय क्षेत्र के विकास और विकास और दूसरी ओर वित्तीयकरण के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। भारत को घरों में वित्तीय बचत के स्तर, इसकी निवेश जरूरतों और वित्तीय साक्षरता के स्तर पर विचार करते हुए अपना रास्ता तय करना होगा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई
बुनियादी उद्योगों की उत्पादन वृद्धि सुस्त
देश के आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों की उत्पादन वृद्धि दिसंबर, 2024 में सुस्त पड़कर चार फीसदी रह गई। एक साल पहले की समान अवधि में इन उद्योगों का उत्पादन 5.1 फीसदी बढ़ा था। मासिक आधार पर भी बुनियादी उद्योगों की वृद्धि की रफ्तार सुस्त रही। नवंबर, 2024 में इन उद्योगों का उत्पादन 4.4 फीसदी रहा था।

शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कोयला, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक और इस्पात की उत्पादन वृद्धि क्रमशः 5.3 फीसदी, 2.8 फीसदी, 1.7 फीसदी एवं 5.1 फीसदी रही। एक साल पहले की समान अवधि में कोयला की उत्पादन वृदि्ध 10.8 फीसदी, रिफाइनरी उत्पाद की 4.1 फीसदी, उर्वरक की 5.9 फीसदी और इस्पात की 8.3 फीसदी रही थी। हालांकि, दिसंबर में सीमेंट और बिजली क्षेत्र का उत्पादन क्रमश: चार फीसदी एवं 5.1 फीसदी बढ़ा है। 

आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि में आठ बुनियादी क्षेत्रों  कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली का उत्पादन 4.2 फीसदी की दर से बढ़ा है। बीते वित्त वर्ष की समान अवधि में इन क्षेत्रों का उत्पादन 8.3 फीसदी बढ़ा था। आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों की औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 40.27 फीसदी हिस्सेदारी है।
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