E20
- फोटो : Amar Ujala
ई-20 पेट्रोल अच्छी चीज स्पष्ट रोडमैप भी जरूरी
'85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है भारत'
(नरेंद्र तनेजा, ऊर्जा संबंधी मामलों के विशेषज्ञ)
अभी सिर्फ पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण किया जा रहा है, जिसकी पेट्रोलियम ईंधन में हिस्सेदारी 10-13% है। 45% हिस्सेदारी वाले डीजल में इथेनॉल मिश्रण शुरुआती चरण में है। दुनिया में तेल खपत में भारत तीसरे स्थान पर है। भारत रोज 55 लाख बैरल तेल खपत करता है, जिसमें 85% आयात से आता है। इस पर 170-230 अरब डॉलर खर्च होते हैं।
गन्ना, मक्का या चावल से बने इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर इससे निपटने की कोशिश हो रही है। लेकिन, पुरानी गाड़ियों के उपभोक्ता ई-20 के कारण माइलेज, परफॉर्मेंस और इंजन की सुरक्षा को लेकर अधिक चिंतित हैं। हालांिक, इथेनॉल लॉन्च से दो साल पहले ही वाहन निर्माताओं को ई-20 पेट्रोल के अनुकूल इंजन तैयार करने के निर्देश दे दिए गए थे। वर्ष 2023 के बाद से गाड़ियों के इंजन ई-20 के अनुकूल बन रहे हैं। कंपनियां दावा करती हैं कि मेंटेनेंस ठीक रखने पर परफॉर्मेंस में भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि, इस पर अभी और अध्ययन की जरूरत है। पेट्रोल की खपत सालाना 4-5% बढ़ रही है, जिससे इथेनॉल की मांग भी बढ़ेगी। इलेक्ट्रिक वाहनों, सीएनजी और हाइड्रोजन ईंधन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्पष्ट नहीं कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। भविष्य में इथेनॉल से इलेक्ट्रिक वाहनों पर फोकस शिफ्ट होता है, तो गन्ना किसानों का क्या होगा? इथेनॉल को बढ़ावा देना अच्छा है, पर खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और उपभोक्ताओं के लिए वाजिब दाम सुनिश्चित करना होगा। सरकार को 10 साल का स्पष्ट रोडमैप बनाना चाहिए, जिसमें कंपनियां, राज्य सरकारें, किसान और वाहन उपभोक्ताओं के मत शामिल हों। बेहतर परफॉर्मेंस, कम ईंधन खपत वाले इंजन और ग्रीन फ्यूल पर भी रिसर्च हो।