बैंकिंग सिस्टम के हालात
पिछले हफ्ते भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने जब ये घोषणा की तो लोग तमाम सवाल करने लगे कि इस घोषणा का मतलब क्या है, ये किसके लिए है और कौन इसके योग्य है।
हालांकि जानकारों का कहना है कि बैंकिंग रेग्युलेटर आरबीआई का बैंकों को ये सुझाव है और ये कोई आदेश नहीं है। यानी बैंकों को विकल्प दिया गया है कि उन्हें खुद तय करना होगा कि वो ग्राहकों को इसका फायदा कैसे देंगे।
बैंकिंग सिस्टम में अभी जो हालात हैं और डूबते कर्जों की न खत्म होती कहानी जारी है, उसे देखते हुए कई बैंक (खासकर निजी बैंक) अपनी वित्तीय सेहत का हवाला देते हुए रिजर्व बैंक की सलाह की अनदेखी भी कर सकते हैं।
रिजर्व बैंक ने ये भी कहा कि कैसे करना है, ये बैंकों को अपने स्तर पर तय करना है।
अब देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने कहा है कि वो रिजर्व बैंक की घोषणा पर अमल करेगा। एसबीआई के अलावा कई अन्य सरकारी बैंक भी हैं जिन्होंने लोन की किश्त पर मैरिटोरियम की पेशकश की है।
इनमें इंडियन बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और आईडीबीआई बैंक शामिल हैं।