कूबर पेडी गांव, ऑस्ट्रेलिया
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कूबर पेडी में माइनिंग का काम साल 1915 में शुरू हुआ था। दरअसल, यह एक रेगिस्तानी इलाका है, इसलिए यहां पर गर्मियों में तापमान बहुत ज्यादा और सर्दियों में बहुत कम हो जाता है। इस कारण यहां रहने वाले लोगों को बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ता था। इसका यह हल निकला कि लोग माइनिंग के बाद खाली बची खदानों में रहने के लिए चले गए।