Kanaka Greenland
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चूंकि यहां 'पर्माफ्रॉस्ट' यानी सब कुछ जम जाने वाले हालात रहते हैं, तो यहां पर बर्फीली जमीन के ऊपर ही मकान बनाए गए। डेनमार्क की कोपेनहेगेन यूनिवर्सिटी के सेबेस्टियन जैस्ट्रज्नी कहते हैं कि, 'चट्टान के मुकाबले मिट्टी और दलदली इलाकों में पानी होता है। ये बड़ी चुनौती होती है। जब पर्माफ्रॉस्ट के हालात होते हैं, तो जमीन जम जाती है। फिर ये पिघल भी जाती है। यानी ये ऊपर-नीचे होती रहती है। इसकी वजह से मकान धंस जाते हैं, लुढ़क जाते हैं या फिर गिर भी जाते हैं।'
जलवायु परिवर्तन की वजह से यहां की जमीन पर जमी बर्फ पिघल रही है। इसकी वजह से स्थानीय निवासी ओर्ला क्लीस्ट के मकान को नुकसान पहुंचा है। उनके मकान के लिविंग रूम और गुसलख़ाने की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। बाथरूम का फर्श इतना ऊबड़-खाबड़ हो गया है कि मकान की टाइलें टूट रही हैं। ओर्ला के रसोईघर की दीवारें तो इतनी फट गई हैं कि उनसे हवा घर के भीतर आती है।
बहुत से लोगों ने अपने मकानों की दीवारों पर टेप चिपका दिए हैं ताकि सर्द हवा घर में न घुसे। बर्फ पिघलने और जमने का जो चक्र लंबे फासले पर चलता था वो बड़ी तेजी से घूमने लगा है। 2018 में ग्रीनलैंड में कई दिन ऐसे रहे, जब तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया। ये 1958-2002 के बीच के औसत तापमान से ज्यादा है। पूरे उत्तरी आर्कटिक इलाके में तापमान में ये उछाल देखा जा रहा है। दुनिया का औसत तापमान करीब एक डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। मगर उत्तरी ध्रुव पर औसत तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है।