इसमें कोई संदेह नहीं है कि मीथेन हाइड्रेट ईंधन का मुख्य स्रोत हो सकता है। ताजा अनुमानों के मुताबिक इसमें कार्बन की कुल मात्रा अन्य जीवाश्म ईंधनों (तेल, गैस और कोयला) की एक तिहाई हो सकती है। कई देश, खास तौर पर जापान, इसे निकालना चाहते हैं। समस्या इसके गैस को निकालने और उसे समुद्र से बाहर लाने में है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के गैस हाइड्रेट प्रोजेक्ट की प्रमुख कैरोलीन रपेल कहती हैं, "हम नीचे जाकर वहां से इस बर्फ जैसे भंडार का खनन नहीं करने वाले।" सारा दारोमदार भौतिकी विज्ञान पर है। मीथेन हाईड्रेट दबाव और तापमान के प्रति इतने संवेदनशील हैं कि सामान्य तरीके से खुदाई करके उसे धरती पर लाना संभव नहीं। यह समुद्र तल से कई सौ मीटर नीचे बनती है, जहां धरती के मुकाबले दबाव बहुत ज्यादा होता है और तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस के करीब। सामान्य परिस्थितियों में बाहर लाने पर यह "बर्फ" टूट जाती है और इस्तेमाल से पहले ही मीथेन बाहर आ जाता है। लेकिन इसका दूसरा तरीका भी है।