silver tips imperial tea
- फोटो : KALPANA PRODHAN
महारानी एलिजाबेथ को गिफ्ट
हाल ही में पीएम मोदी ने ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ को इस चाय का एक पैकेट गिफ्ट किया था। सिल्वर टिप्स इम्पीरियल चाय को 2014 के फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान भी बेचा गया था। इस चाय को तैयार होते ही ब्रिटेन, अमरीका और जापान के खरीदार ले जाते हैं।
वैसे तो दार्जिलिंग के कई चाय बागानों में सिल्वर टिप्स इम्पीरियल चाय तैयार होती है। मगर मकाईबाड़ी में ही इसे पूर्णिमा की रात को तोडा जाता है। मकाईबाड़ी का चाय बागान भारत के उन गिने-चुने टी एस्टेट में से एक है, जो कभी भी अंग्रेजों के कब्जे में नहीं रहा।
इसे 159 साल पहले जीसी बनर्जी ने स्थापित किया था। आज इस बागान को उनके पडपोते राजा बनर्जी चलाते हैं। स्वस्थ मिट्टी से इंसान सेहतमंद रहता है। राजा बनर्जी कहते हैं कि 'हमारे पास ऐसे विकास के तमाम औजार मौजूद हैं, जो धरती की आबो-हवा को नुकसान नहीं पहुंचाते।'
जब उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में अंग्रेजों ने दार्जिलिंग को पहाडी रिजॉर्ट के तौर पर बसाया और चाय के बागान लगवाए, तो उन्होंने इसे पहाडों की रानी का नाम दिया था। मगर, दुनिया की बेहतरीन और महंगी चाय पैदा करने वाले इस इलाके के लोगों की हालत बहुत खराब है। खास तौर से मकाईबाड़ी बागान के इर्द-गिर्द तो गुरबत का बसेरा है।
मकाईबाड़ी बागान के ढलान बडे तीखे हैं। मॉनसून के सीजन में बहुत मिट्टी कट कर बह जाती है। आज इस बागान के केवल 33 फीसद हिस्से पर ही चाय की खेती होती है। बाकी में पेड लगा दिए गए हैं।
159 साल तक एक ही परिवार के पास रहने के बाद मकाईबाड़ी का बागान और इसकी चाय एक नए सफर पर चलने की तैयारी कर रहे हैं। इसी साल राजा बनर्जी ने एलान किया था कि वो 47 साल के कार्यकाल के बाद कंपनी के चेयरमैन का पद छोड देंगे। वो इसके शेयर मकाईबाड़ी में काम करने वाले 600 लोगों में बांट देंगे।
मकाईबाड़ी को सिल्वर टिप्स इम्पीरियल का राज खोलने में कई दशक लग गए थे। अब इस खुशबू को दुनिया तक पहुचाने वाले ही इसके मालिक होंगे।