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इतने साल बाद सूरज की होगी मौत और पृथ्वी समेत सभी ग्रहों को निगल जाएगा? वैज्ञानिकों के नई खोज से मची हलचल

Tue, 11 Nov 2025 04:15 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Science News: सूरज बूढ़ा होकर मरने के अरबों साल बाद अपने पुराने ग्रह को चबाकर निगल जाता है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी एक डरावनी घटना देखी है। इस खोज से हेमारे अपने सौर मंडल का भविष्य दिखाई देता है। जब सूरज मरेगा और वह ग्रहों का खा जाएगा।
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इतने साल बाद सूरज की होगी मौत और पृथ्वी समेत सभी ग्रहों को निगल जाएगा? - फोटो : Adobe Stock
Science News: सूरज बूढ़ा होकर मरने के अरबों साल बाद अपने पुराने ग्रह को चबाकर निगल जाता है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी एक डरावनी घटना देखी है। इस खोज से हमारे अपने सौर मंडल का भविष्य दिखाई देता है। जब सूरज मरेगा, तो वह कुछ ग्रहों को खा जाएगा। खगोलविदों ने यह दृश्य डब्ल्यू. एम. केक वेधशाला से देखा, जो हवाई के माउना की पहाड़ पर बना है। 

उन्होंने देखा कि एक सफेद बौना तारा अपने टूटे हए ग्रह के टुकड़ों को खा रहा था। यह तारा सूरज की तरह था और अब मर चुका है। ग्रह को नष्ट होने में 30 अरब साल से अधिक लगे। यह खोज हैरान करने वाली है। कनाडा की मॉन्ट्रियल यूनिवर्सिटी की एस्ट्रोफिजिसिस्ट एरिका ले बोर्डेस ने कहा कि यह ग्रहों के विकास की हमारी समझ को चुनौती देता है। एरिका ले बोर्डेस इस शोध की मुख्य लेखिका हैं।  

तारे के साथ क्या हुआ? 

LSPM J0207+3331 नाम का यह तारा पृथ्वी से 145 प्रकाश-वर्ष दूर है। सफेद बौना तारे (White Dwarf) सूरज जैसे तारों का आखिरी रूप होते हैं। सूरज जब बूढ़ा होगा, तो वह भी अपनी बाहरी परतें फेंक देगा और सफेद बौना ही बन जाएगा। वैज्ञानिकों ने इस तारे की परत पर 13 भारी तत्व खोजे हैं, जो बहुत ज्यादा हैं। 

सामान्यतः हाइड्रोजन से भरे ठंडे सफेद बौने तारों में इतने तत्व नहीं मिलते हैं। एरिका का कहना है कि इनकी हवा अधिक घनी होती है। भारी तत्व जल्दी तारे के अंदर डूब जाते हैं। हमने सोचा था कि सिर्फ कुछ तत्व नजर आएंगे, तो वहीं हीलियम से भरे गर्म सफेद बौने तारों में अधिक समय तक रहते हैं। 

हीलियम की हवा पारदर्शी होती है, जिसके कारण तत्व लाखों वर्ष तक नजर आते हैं। लेकिन हाइड्रोजन वाले तारे अधिक होते हैं। वे आकाशगंगा के सबसे पुराने तारे हैं। इसलिए इस खोज से पुराने ग्रहों के विकास को समझने का नया तरीका मिलता है। 
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नासा ने लॉन्च की अंतरिक्ष दूरबीन - फोटो : Freepik
कैसा था खत्म होने वाला ग्रह? 

इस ग्रह की चौड़ाई कम से कम 200 किलोमीटर थी। इसमें चट्टानी बाहरी परत और धातु का केंद्र था ठीक पृथ्वी की तरह। वैज्ञानिकों को शोध में पता चला है कि ग्रह के केंद्र का वजन कुल ग्रह का 55 फीसदी था। तुलना के लिए, बुध का केंद्र 70 प्रतिशत है, तो वहीं पृथ्वी का 32 प्रतिशत। 
 
 
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इतने साल बाद सूरज की होगी मौत और पृथ्वी समेत सभी ग्रहों को निगल जाएगा? - फोटो : Freepik
ग्रहों को सीधे देखना कठिन है और उनकी रासायनिक संरचना पता लगाना और भी ज्यादा मुश्किल है। जब सफेद बौने तारे ग्रह को निगलते हैं, तो उसके टुकड़े तारे की साफ हाइड्रोजन हवा में घुल जाते हैं। इससे तत्वों के निशान मिलते हैं। इस तरीके से ग्रहों की संरचना का पता चलता है। 

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इतने साल बाद सूरज की होगी मौत और पृथ्वी समेत सभी ग्रहों को निगल जाएगा? - फोटो : Freepik
क्या हमारे सौर मंडल के लिए चेतावनी है?

30 अरब साल पुरानी यह घटना हमारे सौर मंडल को चेतावनी देती है। 50 अरब साल बाद सूरज भी सफेद बौना बनेगा। उस समय ग्रहों की कक्षाएं अस्थिर हो सकती हैं। बाल्टीमोर के स्पेस टेलीस्कोप साइंस इंस्टीट्यूट के खगोलविद जॉन डेब्स का कहना है कि तारे की मौत के बहुत बाद इस सिस्टम में कुछ गड़बड़ हुई। शायद तारे का वजन कम होने की वजह से कक्षाएं बिगड़ गईं या सिस्टम के दूसरे ग्रहों ने इसे ढकेल दिया।

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इतने साल बाद सूरज की होगी मौत और पृथ्वी समेत सभी ग्रहों को निगल जाएगा? - फोटो : Freepik
इस खोज से ग्रहों के निर्माण और विकास को आकाशगंगा के पैमाने पर जांचने में सहायता मिलेगी। हम पृथ्वी जैसे ग्रहों के जन्म, विकास और मौत के रहस्य के बारे में पता लगा सकेंगे। एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में यह रिसर्च छपी है। वैज्ञानिक अब और ऐसे 'मृत' सिस्टमों की खोज करेंगे। जहां तारे अपने ग्रहों को निगल रहे हों। एक अन्य शोध के मुताबिक, बुध, शुक्र और पृथ्वी सूरज में समाएंगे। बाकी ग्रह बचे रहेंगे। प्लूटो और नेपच्यून जैसे ग्रहों और तमाम उपग्रहों पर जीवन लायक हालात बन जाएंगे। जहां जीवन पनप सकता है।
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