Science News: सूरज बूढ़ा होकर मरने के अरबों साल बाद अपने पुराने ग्रह को चबाकर निगल जाता है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी एक डरावनी घटना देखी है। इस खोज से हमारे अपने सौर मंडल का भविष्य दिखाई देता है। जब सूरज मरेगा, तो वह कुछ ग्रहों को खा जाएगा। खगोलविदों ने यह दृश्य डब्ल्यू. एम. केक वेधशाला से देखा, जो हवाई के माउना की पहाड़ पर बना है।
उन्होंने देखा कि एक सफेद बौना तारा अपने टूटे हए ग्रह के टुकड़ों को खा रहा था। यह तारा सूरज की तरह था और अब मर चुका है। ग्रह को नष्ट होने में 30 अरब साल से अधिक लगे। यह खोज हैरान करने वाली है। कनाडा की मॉन्ट्रियल यूनिवर्सिटी की एस्ट्रोफिजिसिस्ट एरिका ले बोर्डेस ने कहा कि यह ग्रहों के विकास की हमारी समझ को चुनौती देता है। एरिका ले बोर्डेस इस शोध की मुख्य लेखिका हैं।
तारे के साथ क्या हुआ?
LSPM J0207+3331 नाम का यह तारा पृथ्वी से 145 प्रकाश-वर्ष दूर है। सफेद बौना तारे (White Dwarf) सूरज जैसे तारों का आखिरी रूप होते हैं। सूरज जब बूढ़ा होगा, तो वह भी अपनी बाहरी परतें फेंक देगा और सफेद बौना ही बन जाएगा। वैज्ञानिकों ने इस तारे की परत पर 13 भारी तत्व खोजे हैं, जो बहुत ज्यादा हैं।
सामान्यतः हाइड्रोजन से भरे ठंडे सफेद बौने तारों में इतने तत्व नहीं मिलते हैं। एरिका का कहना है कि इनकी हवा अधिक घनी होती है। भारी तत्व जल्दी तारे के अंदर डूब जाते हैं। हमने सोचा था कि सिर्फ कुछ तत्व नजर आएंगे, तो वहीं हीलियम से भरे गर्म सफेद बौने तारों में अधिक समय तक रहते हैं।
हीलियम की हवा पारदर्शी होती है, जिसके कारण तत्व लाखों वर्ष तक नजर आते हैं। लेकिन हाइड्रोजन वाले तारे अधिक होते हैं। वे आकाशगंगा के सबसे पुराने तारे हैं। इसलिए इस खोज से पुराने ग्रहों के विकास को समझने का नया तरीका मिलता है।