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Super El Nino: क्या फिर मचेगी 1877 जैसी तबाही? जब खत्म हो गई थी दुनिया की 4 फीसदी आबादी, सुपर अल नीनो ने डराया

Mon, 27 Apr 2026 06:02 PM IST
Dharmendra Kumar Singh फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Super El Nino: दुनियाभर में तापमान बढ़ने के बाद भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा रहा है। अब इस बीच वैज्ञानिकों ने डराने वाली चेतावनी दी है। उनका कहना है कि प्रशांत महासागर की सतह के तापमान में तेजी से वृद्धि होने से अल नीनो विकसित हो सकता है। 
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क्या फिर मचेगी 1877 जैसी तबाही? जब खत्म हो गई थी दुनिया की 4 फीसदी आबादी - फोटो : AI
Super El Nino: भारत समेत दुनियाभर में तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसकी वजह से लोगों को भयानक गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती गर्मी के बीच वैज्ञानिकों ने बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि 2026 में सुपर अल नीनो  (Super El Nino) बन सकता है। यह एक मौसमी पैटर्न है, जिसने 1877-78 में तबाही मचाई थी। करीब 150 साल पहले यह विनाशकारी अल नीनो आया था, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर अकाल और सूखा पड़ा था और लाखों लोगों की मौत हुई थी। एक बार फिर बढ़ता समुद्र का तापनान और जलवायु परिवर्तन के बीच इसके विकसित होने की संभावना ने चिंता में डाल दिया है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अल नीनो एक मौसमी घटना है। इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी इलाके का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इसके कारण वैश्विक स्तर मौसम के पैटर्न में बदलावा होता है। इसके कारण कहीं सूखा पड़ता है, तो कहीं बाढ़ आती है। यह मानसून को कमजोर करता है, जिसकी वजह से भारत जैसे देशों में बारिश होती है। इसके बाद तापमान तेजी से बढ़ता है। 
 
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क्या फिर मचेगी 1877 जैसी तबाही? जब खत्म हो गई थी दुनिया की 4 फीसदी आबादी - फोटो : Adobe Stock
क्या 2026 में आएगा अल नीनो? 

वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर की सतह के तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है। यह अल नीनो के विकसित होने का संकेत हैं। विश्व मौसम संगठन (WMO) ने भी संभावना जताई है कि 2026 के मध्य तक अल नीनो वापस आ सकता है। विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो यह एक सुपर अल नीनो बन सकता है। इससे 2027 तक वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सकता है।
 
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क्या फिर मचेगी 1877 जैसी तबाही? जब खत्म हो गई थी दुनिया की 4 फीसदी आबादी - फोटो : Adobe Stock
1877-78 के दौरान क्या हुआ था? 

1877-78 में अल नीनो मानव इतिहास के सबसे घातक जलवायु संकटों में से एक था। इस दौरान भयानक गर्मी और सूखा पड़ा था, जिससे फसलों को नुकसान हुआ था। इसकी वजह से दुनिया की करीब 4 फीसदी आबदी खत्म हो गई थी। इससे घटना से साबित हुआ है कि समुद्री तापमान में बदलाव होने से दुनिया को गहरा संकट झेलना पड़ सकता है। 
 

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क्यों भारत के लिए है खतरा? 

अल नीनो का भारत पर भी असर होगा, जिससे कमजोर मानसून का खतरा है। 2026 में सामान्य से कम बारिश, ज्यादा समय तक हीटवेव और पानी की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे खेती प्रभावित होगी, खाद्य उत्पादन में कमी होगी और महंगाई बढ़ने का खथरा है। काफी हद तक भारत की अर्थव्यवस्था मानसून पर निर्भर है, जिस पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। 

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क्या फिर मचेगी 1877 जैसी तबाही? जब खत्म हो गई थी दुनिया की 4 फीसदी आबादी - फोटो : संवाद
भारतीय मौसम विभाग ने क्या चेतावनी दी है?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने शुरुआती संकेत दिया है कि 2026 में मानसून सामान्य से करीब 92 फीसदी रह सकता है, जो कम श्रेणी में शामिल है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में लवणता (salinity) बढ़ रही है। इससे अल नीनो और मजबूत हो सकता है। उनका कहना है कि इसे अभी सुपर अल नीनो कहना गलत होगा, लेकिन जरूरी है कि हम तैयार रहें। 

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क्या फिर मचेगी 1877 जैसी तबाही? जब खत्म हो गई थी दुनिया की 4 फीसदी आबादी - फोटो : Adobe Stock

दुनिया को करना पड़ सकता है जलवायु संकट का सामना 

वैज्ञानिकों ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि 2026 का अल नीनो 1877-78 जितना खतरनाक होगा या नहीं। हालांकि, मिल रहे संकेत बेहद गंभीर है। अगर इसी तरह समुद्र का तापमान बढ़ा, तो दुनिया को फिर से बड़े जलवायु संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए समय रहते ही तैयारी कर लेनी चाहिए, जो बचाव के लिए जरूरी है। 
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