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आखिर कुछ खास तरह की आवाजें हमें क्यों डराती हैं?

Sat, 19 Sep 2020 09:35 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
अगर आप कोई डरावनी फिल्म को आवाज म्यूट कर के देखें, तो डरावने से डरावने दृश्य पर भी आपको डर नहीं लगेगा। बल्कि कुछ समय बाद यह फिल्म आपको उबाऊ भी लगने लगेगी। वहीं इस काम को उल्टा करते हुए सीन देखना बंद कर केवल आवाज सुनें, तो डर भले ही कम लगेगा लेकिन खत्म नहीं होगा। यानी डरावनी फिल्म में सीन से ज्यादा उसकी आवाज हमें डराती है। वैज्ञानिकों ने इसपर कई शोध भी किए हैं, जिसके नतीजे ये बताते है कि हमें किस तरह की आवाजों से और क्यों डर लगता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
नॉनलीनियर साउंड
कोई भी संगीत हमें सुकून देने के साथ एंजॉय करने में मदद करता है। लेकिन किसी संगीत में कुछ उतार-चढ़ावों के कारण इतना डरावना क्यों लगने लगता है? कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेनियल ब्लमस्टीन ने इसको लेकर कई सालों तक शोध किया, जिसके नतीजे वैज्ञानिक जर्नल 'बायोलॉजी लेटर्स' में प्रकाशित हुए थे। इस शोध के मुताबिक एक खास पैटर्न की आवाज को नॉनलीनियर साउंड कहते हैं, जो इंसानों में डर जगाती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
धुनों का पड़ता है डरावना प्रभाव
संगीत के शोधकर्ताओं का ऐसा मानना है कि कुछ खास धुनों का कॉम्बिनेशन हमारे कानों और दिमाग को विचलित करता है। ट्राईटोन भी कुछ इसी तरह के धुनों का कॉम्बिनेशन है, जिसे संगीत की दुनिया का शैतान कहा जाता है। इस तरह के धुन से दिमाग का वो स्थान सबसे ज्यादा उत्तेजित हो जाता है, जो हमारे डर और असुरक्षा की भावना को कंट्रोल करता है। हिंदी फिल्मों में पायल और घुंघरू की झंकार, बादल का गरजना, बिजली का कड़कना और हवा का चलना आदि ऐसी धुनें हैं, जो हमारे डरों से साथ ही जुड़ गई हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
क्या कहती है रिसर्च?
कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेनियल ब्लमस्टीन के मुताबिक किसी भी तरह की नॉनलीनियर आवाज डरावनी ही होती है। इन आवाजों को सुनने के बाद इंसानों में एक तरह का तनाव पैदा होता है, जो डर की तरह सामने आता है। इस चीज को साबित करने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने 100 से ज्यादा साउंडट्रैक का अध्ययन किया, जिसमें युद्ध, ड्रामा, हॉरर और एडवेंचर से जुड़ी हुई आवाजें थीं। इस शोध में ये भी पता चला कि जानवरों का रोना या सुरक्षा के लिए आवाज देना भी हमारे भीतर डर जगाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
क्या है नॉनलीनियर साउंड?
नॉनलीनियर साउंड सामान्य म्यूजिक रेंज से काफी ऊंची आवाज होती है, जो साधारण तौर पर जानवरों के वोकल कॉर्ड से ही निकलती है। यह साउंड तो जानवरों को किसी असुरक्षा में सचेत करता है, लेकिन इंसानी मस्तिष्क में इसकी वजह से डर के हार्मोन का स्त्रावण होता है। आवाज से होने वाले डर का भी दो तरह से प्रभाव पड़ता है। अगर हम चिड़ियाघर में शेर की आवाज सुनकर डर जाएं तो ये डर ज्यादा देर तक नहीं रहेगा। क्योंकि हमारा मस्तिष्क तुरंत ही हमें बता देगा। वहीं अंधेरे में या अकेले में आवाज का स्त्रोत नहीं पता चलने पर हार्मोन का स्त्रावण होता रहता है, जिससे कई शारीरिक बदलाव भी दिखते हैं, जैसे पसीना आना, धड़कन बढ़ जाना, आंखों का फैल जाना।
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