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Reverse Engineering: रिवर्स इंजीनियरिंग और पाकिस्तान में क्या है कनेक्शन? दुनियाभर में क्यों हो रही इसकी चर्चा

Tue, 22 Mar 2022 05:03 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रिवर्स इंजीनियरिंग-पाकिस्तान में क्या है कनेक्शन? - फोटो : iStock
भारत की सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल 9 मार्च को पाकिस्तान में जा गिरी थी। इसके बाद दावा किया गया कि पाकिस्तान के शहर चन्नू मियां के पास जो मिसाइल गिरी थी वो भारत की ब्रह्मोस थी। इस घटना के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं पाकिस्तान चीन की मदद से इसकी रिवर्स इंजीनियरिंग कर अपनी क्रूज मिसाइल न बना लें। क्योंकि चीन और पाकिस्तान रिवर्स इंजीनियरिंग करने में माहिर माने जाते हैं। भारत की यह मिसाइल पाकिस्तान में 124 किमी अंदर गिरी थी। 

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में गिरी मिसाइल को लेकर कई विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि मिसाइल के मलबे को इकट्ठा कर पाकिस्तान उसको बनाने का तरीका समझ सकता है। भारत को भी यही चिंता सता रही है। रिवर्स इंजीनियरिंग का मतलब होता है किसी चीज को बनाने के तरीके को समझना। आइए जानते हैं कि रिवर्स इंजीनियरिंग और पाकिस्तान का क्या कनेक्शन है?
 
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रिवर्स इंजीनियरिंग-पाकिस्तान में क्या है कनेक्शन? - फोटो : iStock
दरअसल पाकिस्तान मिसाइल के मलबे को इकट्ठा कर उसकी काॅपी कर सकता है। पाकिस्तान के विशेषज्ञ मिसाइल की गुप्त जानकारी हासिल कर सकते हैं और वैसी ही मिसाइल बना सकते हैं। हमला करने में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसको ही रिवर्स इंजीनियरिंग कहा जाता है। 
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रिवर्स इंजीनियरिंग-पाकिस्तान में क्या है कनेक्शन? - फोटो : iStock
पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा हो रही है जिसकी वजह चीन और पाकिस्तान हैं। कहा जाता है कि दोनों देशों को डुप्लिकेट चीज बनाने में महारत हासिल है। इस बात की चिंता है कि रिवर्स इंजीनियरिंग से चीन और पाकिस्तान मिसाइल का काॅपी वर्जन न तैयार कर लें। 

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रिवर्स इंजीनियरिंग-पाकिस्तान में क्या है कनेक्शन? - फोटो : iStock
पहले ऐसा काम कर चुका है पाकिस्तान

पड़ोसी देश पाकिस्तान पहले भी रिवर्स इंजीनियरिंग की मदद से डुप्लिकेट मिसाइल बना चुका है। पाकिस्तान ने रिवर्स इंजीनियरिंग से अमेरिकी मिसाइल टॉमहॉक क्रूज का डुप्लिकेट वर्जन तैयार किया है जिसका नाम बाबर है। यह पाकिस्तान की पहली क्रूज मिसाइल है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने यह खुलासा किया था।
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रिवर्स इंजीनियरिंग-पाकिस्तान में क्या है कनेक्शन? - फोटो : iStock

जानिए कैसे बनाई मिसाइल 

आतंकी संगठन अल कायदा ने कीनिया और तनजानिया में अमेरिकी दूतावासों पर हमला किया था। साल 1998 में अल कायदा ने अमेरिकी दूतावासों को निशाना बनाया था। इसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में आंतकी संगठनों के ठिकानों पर क्रूज मिसाइल टॉमहॉक से जवाबी हमला किया था। इस दौरान मिसाइल गलती से पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जा गिरी थी। 
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रिवर्स इंजीनियरिंग-पाकिस्तान में क्या है कनेक्शन? - फोटो : iStock
अमेरिका की क्रूज मिसाइल टॉमहॉक के मलबे की मदद से पाकिस्तान ने अपनी पहली क्रूज मिसाइन बाबर बनाई थी जिसका साल 2005 में पाकिस्तान ने टेस्ट भी किया था। 
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रिवर्स इंजीनियरिंग-पाकिस्तान में क्या है कनेक्शन? - फोटो : iStock
सोवियत संघ ने भी बनाई मिसाइल

पाकिस्तान के अलावा सोवियत संघ भी रिवर्स इंजीनियरिंग से मिसाइल बना चुका है। ताइवान ने साल 1958 में अमेरिकी मिसाइल साइड वाइंडर को दागा था, लेकिन यह मिसाइल फट नहीं पाई थी। इसके बाद चीन ने इस मिसाइल को सोवियत संघ को दे दिया जिसके बाद उसने रिवर्स इंजीनियरिंग की मदद ली और के-13 मिसाइल तैयार कर लिया। 
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