आज जिस जगह के बारे में हम आपको बताएंगे उसे दुनिया की छत भी कहा जाता है। कुछ लोगों को शायद अब पता चल गया हो कि हम किस जगह की ओर इशारा कर रहे हैं। यह पृथ्वी के शानदार स्थानों में से एक हैं और सदियों से पर्यटकों के लिए रहस्य व कौतुहल का विषय रहा है। दरअसल, हम यहा तिब्बत की बात कर रहे हैं। एशिया की कुछ बड़ी नदियों का जन्मस्थल और प्राचीन झीलों की ये जगह वाकयी धरती पर स्वर्ग है।
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1.1953 तक ये एक स्वंतत्र देश था मगर फिर...
तिब्बत दुनिया का सबसे ऊंचा पठार है। समुद्र तल से 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह प्रदेश अब चीन का एक महत्वपूर्ण राज्य है लेकिन इस पर चीन ने जबरन कब्जा कर रखा है।
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2. एक अरब से अधिक लोगों के लिए ताजा पीने योग्य पानी का स्रोत्र है ये स्थान
आपको ये बात शायद मालूम भी न हो कि तिब्बत एक अरब से अधिक लोगों के लिए ताजा पीने योग्य पानी का स्त्रोत है। इसका मुख्य कारण यहां से निकलने वाली 6 बड़ी नदियां है। जी हां, यहां से एशिया की छह बड़ी नदियां मेकांग, ब्रहमपुत्र, सिन्धु, यांग्तजे, सलवीन एवं ह्वांग हो का उदगम स्थल है। आर्कटिक एवं अन्टार्टिक के बाद ताजे पानी के विशालतम स्रोत तिब्बत को विश्व के तीसरे ध्रुव के नाम से जाना जाता है।
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4.माउंट एवरेस्ट बाहें फैलाए कर रहा इसका रक्षा
दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत माउंट एवरेस्ट नेपाल एवं तिब्बत की सीमा पर स्थित है। यह इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देता है।
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5. चीन का सबसे बड़ा प्रदेश
तिब्बत चीन का सबसे बड़ा प्रदेश है, लेकिन जनसंख्या के लिहाज से यह चीन में सबसे कम आबादी वाला क्षेत्र है। अधिकांश तिब्बती नागरिक चरवाहे या पारम्परिक किसान हैं।
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6. ट्रेवल परमिट एवं चीन का वीजा अनिवार्य
तिब्बत में अकेले घूमने के लिए भारतीयों पर पाबंदी लगा रखी है। यहां ल्हासा तक की हवाई यात्रा पर पाबंदी है लेकिन अगर आप परिवार या दोस्तों संग यहां घूमना चाहेंगे तो शायद आपको इसकी परमीशन मिल सकती है।
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7. अजूबा पटोला पैलेस, यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट
तिब्बत की राजधानी ल्हासा में, रेड माउंटेन से प्रेरित वर्ष 637 में निर्मित पटोला पैलेस है, जिसका विशाल भवन परिसर पैलेस ऑफ आर्ट भी कहलाता है।
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8. जोखांग मंदिर में पूजा अर्पण
बरखोर स्क्वायर, लहासा में स्थित जोखांग मंदिर में तिब्बती व्यक्तियों द्वारा पूजा अर्पण जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। तिब्बतन बुद्धिज्म में इस मंदिर का स्थान सर्वोच्च है। यहां चीनी टंग डायनेस्टी एवं इंडियन विहार फ्यूज़न पर आधारित वास्तुकला पर्यटकों को अचंभित कर देती है।
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9. पृथ्वी का स्वर्ग है लेक नम्त्सो
यदि किसी को पृथ्वी पर स्वर्ग देखना हो तो, लेक नम्त्सो यानि कि हेवेन लेक ही वह स्थान है। यह चीन की दूसरी विशालतम खारे पानी की झील है और संसार के सबसे खुबसूरत जगहों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार नम्त्सो भगवान इंद्र की पुत्री थी, जिसके दाएं हाथ में एक्वेरियम तथा दूसरे में शीशा है।
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10. यम्द्रोक लेक (जेड लेक) तिब्बत की सबसे पवित्र झीलों में से एक
यम्द्रोक झील का निर्माण 10 लाख वर्ष पूर्व ग्लासिअल रॉक्स और मिटटी द्वारा नदी के प्रवाह को रोक दिए जाने के कारण हुआ था।
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11. सम्डिंग मोनेस्ट्री
यम्द्रोक झील के किनारे पर स्थित सम्डिंग मोनेस्ट्री, किसी महिला द्वारा संचालित तिब्बत की एकमात्र मोनेस्ट्री है।
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12. यार्लिंग त्संग्पो ग्रैंड कैनियन विश्व का सबसे गहरा खड्डा
अधिकतर लोगों को पता नहीं है कि यार्लिंग त्संग्पो ग्रैंड कैनियन विश्व का सबसे गहरा खड्डा है। यह ग्रैंड कैनियन पृथ्वी पर किसी अन्य कैनियन से अधिक गहरा है, परन्तु इसकी अधिक खोज नहीं की गई है।
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13. गरम पानी के झरनों का शहर
तिब्बत का एक छोटा सा शहर यांगबजिंग, पृथ्वी पर गरम पानी के झरनों की सबसे ऊंची जगह है। आकाश को छूते उबलते झरने तथा गरम एवं ठंडे पानी का फैलाव एक अदभुत प्राकर्तिक दृश्य पैदा करता है।
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14. नोर्बुलिंग्काः समर पैलेस ऑफ़ दलाई लामा
तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद निष्काषित दलाई लामा धर्मशाला, भारत में निवास करते हैं। 36 एकड़ व 374 कमरों वाला यह खुबसूरत महल, तिब्बत की अशांत स्थिति को दर्शाता है।
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15. 2000 मठवासियों की मोनेस्ट्री
तशिल्हुन्पो, वर्ष 1447 से तिब्बत की चार बड़ी गेलुग्पा मोनेस्टरी में से एक है, जिसमें हज़ारों मठवासी मैत्रेय बुद्धा की 26.2 मीटर ऊंची प्रतिमा के समक्ष मंत्रों का उच्चारण करते हैं।
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16. पठार पर स्थित सबसे खुबसूरत वन
लुलांग वन पठार पर स्थित विश्व के सबसे खुबसूरत वनों में से हैं। पाइन, फर वृक्ष एवं बड़े झाड़ों वाले इस वन को ड्रैगन किंग वैली के नाम से जाना जाता है।
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17. हर जगह ड्रैगन का निवास
तिब्बत्ती मान्यताओं के मुताबिक हर झील में ड्रैगन का निवास है तथा हर पत्थर में आत्मा है। पर्वतों की परिक्रमा से पापों का नाश होकर निर्वाण की प्राप्ति होती है। तिब्बती बहुत नम्र व धार्मिक होते हैं तथा बहुत जल्द खुश हो जाते हैं।
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18. माउंट कैलाश यानि गंग्रेंबोकी
मध्य तिब्बत में स्थित माउंट कैलाश हिन्दू, जैन एवं बौद्ध अनुयायियों द्वारा पूज्य एवं पवित्र माना जाता है। यहां लंबे समय से लोग जाते रहे हैं। इसका पिरामिड का आकार, पूरे साल बर्फ से ढकी चोटी तथा बादल एक अदभुत दृश्य उत्पन्न करते हैं।
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19. ताज़े पानी की सबसे ऊंची झील है मानसरोवर
मानसरोवर झील सिन्धु, सतलज, ब्रहमपुत्र एवं करनाली नदियों की स्त्रोत है। इस झील में स्नान करना किसी भी तिब्बती के लिए बड़ा धार्मिक कृत्य है। इस 60 किमी चौड़ी झील का चक्कर लगाने में चार से पांच दिन लगते हैं।
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20. ताजे पानी की सबसे बड़ी झील
पूर्वी तिब्बत में स्थित बसुम झील ताजे पानी की सबसे बड़ी झील है और बौद्ध धर्म के चार बड़े विद्यालयों में से एक, न्यिन्गमा तिब्बतन बुद्धिस्ट्स इसे अत्यन्त पवित्र मानते हैं।
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21. खारे पानी की झील
मानसरोवर के नजदीक स्थित खारे पानी की झील राक्सस ताल (डेविल लेक), देवताओं और दानवों में सम्बन्ध का प्रतीक है। दोनों झील आपस में जुडी हुई हैं पर एक का पानी मीठा और साफ है तथा दूसरी का पानी खारा और गन्दा है।
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22. अनोखा है अंतिम संस्कार
तिब्बती अपने मृतकों का अंतिम संस्कार स्काई ब्युरियल द्वारा करते हैं।
23. विश्वप्रसिद्ध मक्खन चाय तिब्बती पेय है
तिब्बतियों को चाय में फैट मिला कर पीने के फायदे के बारे में लंबे समय से पता है। यह चाय पूरे संसार में अत्यंत लोकप्रिय है।