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तलाक न हो इसके लिए काम आता था ये कमरा, गांव में अपनाया जाता था बेहद अजीब नुस्खा

Mon, 24 Sep 2018 04:21 PM IST
बीबीसी हिंदी
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पिछले दिनों तलाक का मसला सुर्खियां बना हुआ था। मुस्लिम समुदाय में प्रचलित तीन तलाक की प्रथा को लेकर सियासी माहौल भी गरम था। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर सुनवाई की। मुस्लिम समुदाय की रवायतों को छोड़ दें तो, आज के दौर में तलाक का मसला आम-तौर पर कोर्ट पहुंच जाता है। पश्चिमी देशों में शादी और तलाक को लेकर कानून बेहद उदार हैं। मसला कोई भी हो, जल्द सुलझ जाता है।

यूरोप में जहां आज तलाक आम बात है, वहीं मध्य काल में इससे बचने की हर मुमकिन कोशिश की जाती थी। पूर्वी यूरोपीय देश रोमानिया के एक गांव में तो तलाक को रोकने के लिए बेहद अजब नुस्खा अपनाया जाता था। इस गांव का नाम है बियर्टन। ये गांव रोमानिया के ट्रांसिल्वेनिया इलाके में स्थित है। यहां आकर यूं लगता है जैसे वक्त सदियों से ठहरा हुआ है। आज भी बियर्टन के लोग घोड़ा गाड़ी में चलते हैं। सामान के लेन-देन से अपना काम चलाते हैं। इसके लिए गांव के बीच में एक बाजार जैसा इलाका बना हुआ है।
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बियर्टन में पंद्रहवीं सदी का एक गिरजाघर है। ये गिरजाघर छोटे से किले जैसा है। जो पूजा में भी काम आता था और किसी खतरे से बचने के काम भी आता था। इस पांच सौ साल पुराने चर्च के परिसर में ही एक छोटी सी इमारत है। इसी इमारत में एक छोटा सा कमरा है। ये कमरा एक रसोईघर के बराबर ही होगा। ये कमरा ही तीन सौ सालों तक मियां-बीवी के झगड़ों के निपटारे में काम आता था।

इमारत पर अच्छी रूहों का साया
यहां उन दंपतियों को 6 हफ्ते के लिए बंद कर दिया जाता था, जिनमें तलाक की नौबत आ चुकी होती थी। इन छह हफ्तों में जोड़ों को अपना विवाद आपस में निपटाना होता था। आज की तारीख में इस कमरे को देखें, तो ये कैदखाने से भी बुरा दिखेगा। मगर तीन सदियों तक ये कमरा तलाक को टालने का काम करता रहा था। बियर्टन के मौजूदा पुजारी उल्फ जीग्लर कहते हैं कि इस इमारत पर अच्छी रूहों का साया है। उन्हीं के असर से तलाक के मसले एक छोटे से कमरे में निपटा लिए जाते थे।

आज ये कमरा एक संग्रहालय की तरह सहेजकर रखा गया है। इसमें कुछ आदमकद पुतले रखे हुए हैं। कमरे की दीवारें बेहद नीची हैं। मोटी सी दीवार में ही सामान रखने के लिए एक अल्मारी बनाई गई है। एक छोटा सा बेड है, जिसे देखकर लगता है कि ये किसी बच्चे का बिस्तर होगा। इसके अलावा यहां छोटी सी मेज और एक कुर्सी भी रखी है।
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ये कमरा इतना छोटा है और इसमें इतना कम सामान है कि यहां रहने वाले दो लोगों को हर चीज आपस में साझा करनी पड़ती थी। इसमें खाने से लेकर बिस्तर तक शामिल था। मध्य काल में इस इलाके में ईसाई धर्म की सुधारवादी शाखा यानी प्रोटेस्टेंट का असर था। यहां जर्मन सुधारक मार्टिन लूथर के मानने वाले लोग रहते थे। उनका मानना था कि तलाक बुरी चीज है और इसे हर कीमत पर टालने की कोशिश की जानी चाहिए।

इसीलिए बियर्टन में ये जेल की कोठरी बनाई गई थी। जिसमें मियां-बीवी को छह हफ्तों के लिए कैद करके उन्हें आपसी झगड़ा सुलझाने का मौका दिया जाता था। उस दौर में कुछ खास वजहों जैसे बेवफाई की वजह से ही तलाक की इजाजत थी। इसके अलावा जिस दंपति को तलाक चाहिए होता था वो चर्च के बिशप के पास जाते थे। उन्हें इसी कमरे में कैद कर दिया जाता था। अगर छह हफ्ते बाद भी विवाद नहीं सुलझता था तो फिर दोनों को तलाक लेने को कह दिया जाता था।

 

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तलाक पर आधी संपत्ति का हिस्सा
पादरी उल्फ जीग्लर कहते हैं कि तलाक टालना महिलाओं और बच्चों के लिए राहत की बात होती थी। अगर तलाक होता था तो मर्द को अपनी औरत को संपत्ति का आधा हिस्सा देना पड़ता था। दिलचस्प बात ये कि अगर कोई दूसरी शादी करता था। फिर दूसरी बीवी से भी अगर तलाक की नौबत आती थी, तो दूसरी बीवी को पति से कुछ भी नहीं मिलता था।

बारहवीं सदी में फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम और लग्जेमबर्ग से आए लोगों को हंगरी के राजा ने रोमानिया के ट्रांसिल्वेनिया इलाक़े में बसाया था। इन लोगों की मदद से हंगरी के राजा, तुर्कों और तातारों के हमलों से निपटते थे। उस दौर में बियर्टन कारोबार और संस्कृति का बड़ा केंद्र बन गया था।

 
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1510 में इसकी आबादी पांच हजार से ज्यादा थी। आज भी इसकी गलियों से गुजरते हुए उस दौर का एहसास होता है। यूरोप ने इतनी तरक्की कर ली है। मगर बियर्टन के निवासियों के लिए वक्त वैसा ही है। चर्च उसी दौर का है। जिंदगी भी उसी दौर की मालूम होती है। यहां आज भी लोग पुराने तरीके से ही खेती करते हैं। आस-पास के पहाड़ों में चरवाहे बसते हैं। ये सब लोग साप्ताहिक बाजार में आपस में सामान का लेन-देन करके काम चलाते हैं।

बदलाव शायद यही आया है कि अब झगड़ने वाले दंपतियों को चर्च के उस कमरे में कैद नहीं किया जाता। तलाक को लेकर लोगों के ख्यालात भी बदले हैं। पादरी उल्फ जीग्लर बताते हैं कि आज भी कई लोग उनके पास आते हैं कि उन्हें उसी कोठरी में कैद कर दिया जाए, ताकि वो आपसी झगड़ा सुलझा सकें। तो कभी मौका लगे तो आप भी घूम आइए। शायद वो कमरा आपके भी काम आ जाए। 
 
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