1980 के दौर में कई पॉर्न स्टार्स की एड्स की वजह से मौत हो गई थी। अब उनकी सेहत को लेकर कई कड़े नियम बना दिए गए हैं। 'क्वोरा' के मुताबिक पॉर्न इंडस्ट्री से जुड़े हर शख्स के लिए एक गाइडलाइन जारी की गई है जिसका पालन कर वे खुद को यौन संबंधों की वजह से होने वाली बीमारियों से बचा सकते हैं। इसके अलावा, हर महीने औसतन दो बार पॉर्न स्टार्स की जांच भी होती है। हर फिल्म की शूटिंग से पहले एक्टर्स का एचआईवी टेस्ट कराया जाता है।
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एक आम इंसान को 'सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज' यानी यौन संबंधों की वजह से होने वाली बीमारियों के बारे में जितना पता होता है, उससे कहीं ज्यादा पॉर्न स्टार्स को इसकी जानकारी होती है। ना सिर्फ सेहत बल्कि करियर की वजह से भी पॉर्न स्टार्स इस मामले में काफी सजग होते हैं।
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जब भी किसी पॉर्न फिल्म की शूटिंग शुरू होती है, स्टूडियो में कुछ खास तरह के लोगों को बुलाता जाता है। इनका काम एक्टर्स को उत्तेजित करना होता है ताकि वे अच्छी परफॉर्मेंस दे सकें। ऐसे एक्सपर्ट्स को फ्लफर कहा जाता है। एक शोध के मुताबिक इंटरनेट से जितनी भी चीजें डाउनलोड की जाती हैं, उनमें से 35 फीसदी पॉर्न कंटेंट होता है।
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porn addiction
'लिस्ट 25' के मुताबिक अमेरिका में हर साल 13 हजार से ज्यादा पॉर्न वीडियो बनता है जो 13 बिलियन डॉलर का प्रॉफिट देता है। कहा जाता है कि एडल्ट फिल्म इंडस्ट्री की कमाई फुटबॉल, बास्केट बॉल और बेसबॉल इंडस्ट्री को मिलाकर होने वाली आय से कहीं ज्यादा होती है।
'क्वोरा' के मुताबिक कई देश में पोर्न वीडियोज देखते पाए जाने पर मौत की सजा दी जाती है। इन देशों में ऐसी फिल्मों पर बैन लगा है- बोट्सवाना, मिस्र, नाइजीरिया, सुडान, यूगांडा, बंग्लादेश, उत्तर कोरिया, सऊदी अरब, तुर्कनेनिस्तान, बेलारुस, यूक्रेन, पापुआ न्यू गिनी, ओमान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान, इराक, जॉर्डन, सीरिय, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बाहरेन, मलेशिया, इंडोनेशिया, मोरक्को, सिंगापुर।