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पेट्रोल के बढ़ते दाम से दुखी हैं तो जर्मनी से लें सबक, मजबूर होकर सरकार को वापस लेना पड़ा था फैसला

Fri, 25 May 2018 08:11 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Petrol
भारत में पेट्रोल की कीमत बढ़ने से लोग परेशान हैं। वे जमकर सरकार को कोस रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी सरकार की फिरकी ली जा रही है। मगर इन सब से क्या होगा? जर्मनी की सरकार ने सालों पहले जब इसी तरह पेट्रोल और डीजल महंगा कर लोगों को परेशान किया, तो जनता ने भी ऐसा काम किया कि मजबूर होकर सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। 
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petrol
मामला साल 2000 का है।  इस साल यूरोप के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमत में बढोतरी हुई थी। वैसे तो हर जगह इसका विरोध हुआ, मगर जर्मनी के लोग तो सीधे अपनी गाड़ी लेकर सड़क पर उतर आए। वहीं, दूर दराज गांवों में रहने वाले लोग भी करीब 250 ट्रक लेकर राजधानी बर्लिन आ गए।



 
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पेट्रोल-डीजल
सभी लोगों ने सड़क पर ही अपनी कार और गाड़ी छोड़ दी और वहां से चले गए। देखते ही देखते कई शहरों में जाम लग गया। गाड़ियों की लंबी कतार से कई रास्ते ब्लॉक हो गए। लेइपजिंग सिटी में तो सड़क को बंद करने के लिए करीब 300 किसान खड़े हो गए।

 

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petrol pump
जर्मनी-बेल्जियम के बॉर्डर पर मौजूद दो कार फैक्ट्रीज में भी काम ठप हो गया। जनता के विरोध में विपक्ष भी शामिल हो गया। देखते ही देखते सरकार पर इतना दबाव बढ़ गया कि उसे फ्यूल (पेट्रोल, डीजल) पर टैक्स लगाने का फैसला वापस लेना पड़ा।
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Petrol-Diesel
हालांकि, इन दिनों वॉट्सऐप पर एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें सड़क पर कारों की लंबी कतार नजर आ रही है। दावा किया जा रहा है कि यह फोटो जर्मनी में हुए उसे विरोध-प्रदर्शन के दौरान ली गई थी। असल में वह तस्वीर जर्मनी की नहीं, चीन की है। साल 2010 में यहां करीब 100 किलोमीटर तक लंबा जाम लगा,तो लोग गाड़ी वहीं छोड़कर चले गए। 


 
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