इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला एक मामला उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में सामने आया है। बता दें इस मामले को भी बिहार के मुजफ्फपुर जिले में सामने आए बालिका गृह जैसा ही बताया जा रहा है। अब देवरिया में एक शेल्टर होम की करतूतों का खुलासा किया गया है। ये खौफनाक सच उस समय सामने आया जब कुछ बच्चियों ने आगे आकर अपने खिलाफ हो रहे उत्पीड़न को लेकर अपनी जुबान खोली।
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मीडिया रिपोर्टों की मानें तो देवरिया के मां विंध्यवासिनी संरक्षलग्जरी गाड़ियोंण गृह में एक 10 साल की मासूम बच्ची ने पुलिस के सामने होश उड़ा देने वाला खुलासा किया है। उसने अपने बयान में कहा कि यहां पिछले काफी समय से देह व्यापार चल रहा है। रविवार शाम को मासूम किसी तरह महिला थाने पहुंची और शेल्टर होम की करतूत का खुलासा किया। ये बच्ची जन्म से ही शेल्टर होम में रह रही है।
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उसने पुलिस को बताया कि रोज शाम चार बजे बड़ी-बड़ी गाड़ियों में लोग आते थे और 15 साल के ऊपर की लड़कियों को ले जाते थे। सुबह जब लड़कियां आती थीं तो वे कुछ नहीं बोलती थीं। बस वे रो रही होती थीं। इसके अलावा उन्हें दूसरे के घरों में झाड़ू-पोछा जैसे तमाम घरेलू कामों के लिए भी भेजा जाता था।
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फिलहाल, पुलिस ने संचालिका गिरिजा त्रिपाठी और पति मोहन को गिरफ्तार कर लिया है। बेटी कंचन लता त्रिपाठी की तलाश की जा रही है। मामले में पुलिस लड़कियों के बयान के आधार पर मानव तस्करी, देह व्यापार जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर रही है। मौके पर डीएम और अन्य अधिकारी भी मौजूद हैं। संरक्षण गृह के हर कमरे की तलाशी ली जा रही है।
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एसपी रोहन पी कनय ने बताया कि बिहार के बेतिया जिले की रहने वाली 10 साल की वह मासूम बच्ची जन्म से ही शेल्टर होम में रह रही थी। उसके जन्म के बाद ही मां की मौत हो गई थी। उसके पिता ने उसे नानी के पास छोड़ दिया था लेकिन ननिहाल वालों ने भी उसे अपनी बेटी की मौत का जिम्मेदार मानते हुए शेल्टर होम के हवाले कर दिया। तब से वह इसी होम में रह रही थी। उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली और वह कभी-कभी बेटी से मिलने आता था। वह शेल्टर होम को बेटी को पालने क लिए पैसे भी देता था।
वहीं संरक्षण गृह की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि इस शेल्टर में कोई भी अनैतिक काम नहीं हो रहा था। जो लड़कियां पुलिस के कब्जे में हैं, उनसे जो चाहें कहलवा लें। रजिस्टर में जितनी लड़कियों के नाम दर्ज हैं, मौके पर पुलिस को उतनी ही लड़कियां मिली थीं। जहां तक संस्था की मान्यता की बात है तो वह खत्म नहीं की गई है। मान्यता स्थगित है और मामला अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में पुलिस का कहना है कि संरक्षण गृह से 24 लड़कियों को छुड़ाया गया है जबकि रजिस्टर में 42 लड़कियों के नाम दर्ज हैं। बाकी की 18 लड़कियों का पता लगाया जा रहा है।