आज आपको मिलवाते हैं 86 वर्षीय एक ऐसी वृद्ध महिला से जो इंडिया कि 'शूटर दादी' या 'रिवाल्वर दादी' के नाम से जानी जाती है। इनका यह नाम कैसे पड़ा इसके पीछे एक दिलचस्प और हैरान कर देने वाली कहानी है। जी हां, रिवाल्वर दादी ऐसी दादी हैं जो न सिर्फ अच्छे-अच्छों की खटिया खड़ी कर देती हैं बल्कि घर के काम में भी नम्बर 1 हैं। रिवाल्वर दादी को दुनिया की सबसे उम्रदराज शूटर कहते हैं।
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Revolver Dadi
बता दें चंद्रो तोमर ने आम खिलाड़ियों की तरह युवा अवस्था से शूटिंग शुरू नहीं की, बल्कि बुजुर्ग अवस्था में इम मैदान में कदम रखा। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक रिवाल्वर दादी चंद्रो अपनी पोती शेफाली को निशानेबाजी सिखाने के लिए उसके साथ डॉ राजपाल की जोहड़ी गांव में शूटिंग रेंज पर उसके साथ जाना शुरू किया। यहां दादी ने भी एक दिन वहां रखी पिस्टल से निशाना लगाया, उसे देखकर सब अचंभित रह गए। पहली बार में ही दादी ने पिस्टल से टारगेट भेद दिया, सभी ने दादी के निशाने को काफी सराहा और दादी को शूटिंग करने की सलाह दी। ऐसे में उनके मन में भी कुछ कर गुजरने की आई और यहां से चंद्रो तोमर एक आम दादी से 'रिवाल्वर दादी' बन गई।
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बता दें उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के जोहड़ी गांव की रहने वाली चंद्रो की उम्र तकरीबन 84 साल है। चंद्रो के 6 बच्चे हैं और 15 नाती-पोते हैं। इस दादी ने अपनी गन चलाने की ट्रेनिंग 65 साल की उम्र में ली। निशानेबाजी से लेकर गाय का दूध निकालने तक का सारा काम करने के साथ-साथ वह पूरे घर का खाना बनाती हैं। इसके बाद दादी दूसरों को निशानेबाजी की ट्रेनिंग देती हैं।
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पोती को देख-देखकर ही निशानेबाजी सीख ली
दो दिन देखा, तीसरे दिन शैफाली गन लोड नहीं कर पाई तो दादी ने गन लोड करके खुद ही निशाना लगा दिया, जी हां वो भी एकदम सटीक। निशाना दस अंकों पर लगा देख वहां मौजूद सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए। सभी ने एक साथ कहा- वाह दादी कमाल कर दिया। अब तो तू भी शूटिंग शुरू कर दे। फिर दादी ने ऐसी शुरुआत की कि निशानेबाजी में 25 राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप के खिताब अपने नाम कर दिखाए।
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बच्चों ने बढ़ाया हौसला
दादी को शूटिंग के लिए बच्चों ने काफी प्रेरित किया। शुरू में दादी ने लोकलाज के कारण मना किया मगर बच्चों ने कहा, गांव में किसी से नहीं कहेंगे। तब जाकर दादी ने प्रेक्टिस शुरू की। दादी ने रात को शूटिंग सीखने के लिए टाइम निकाला। जब परिवारवाले सो जाते थे तब वह भूसा कोठरी में जाकर पानी से भरा जग घंटों हाथ में लेकर खड़ी रहती थी। जिससे गन से निशाना लगाते समय हाथ सधा रहे।
ऐसे हुई मशहूर
एक दिन दादी जब एकेडमी में शूटिंग की कोचिंग ले रही थी, तब उनकी फोटो किसी पत्रकार ने अखबार में निकलवा दी। इससे देखकर दादी परेशान हो गई। लेकिन बाद में लोगों ने उनके इस जज्बे की तारीफ की तो उन्हें हिम्मत मिली। आज दादी बढ़े ही चाव से शूटिंग करती भी है और सिखाती भी है।