सावन के महीने में हर तरफ कांवड़ियों को टोली दिख रही है। नाचते-झूमते वे सारे भोले बाबा का जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। मगर इसी बीच देश की राजधानी दिल्ली में भगवन शिव की ऐसी झांकी देखने को मिली जिसमें कंकाल और इंसान के कटे सिर लटकटे नजर आ रहे हैं। जिसकी भी नजर इस पर पड़ रही है, वह वही ठिठक कर उसे घूर रहा है।
विज्ञापन
2 of 5
कांवड़ यात्रा 2018
- फोटो : अमर उजाला
हालांकि, गौर से देखने पर ही यह साफ हो जाएगा कि ये कंकाल और नमुंड असली नहीं हैं। झांकी की सजावट के लिए नकली कंकाल का इस्तेमाल किया गया है। फिर भी यह सवाल उठना तो लाजमी है कि एक देवता की अराधना के लिए ऐसी अशुभ चीजों का इस्तेमाल क्यों किया गया?
विज्ञापन
3 of 5
कांवड़ यात्रा 2018
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, माना जाता है कि वैरागी शिव को भूत-प्रेत भी प्रिय हैं। यही वजह है कि उनकी झांकी में भी प्रतिकात्मक रूप में उनका इस्तेमाल किया गया।बता दें कि मेरठ के सिवाया टोल प्लाजा पर हर साल की तरह इस बार भी कांवड़ सेवा शिविर लगी है। इसकी खासियत ये है कि यह श्मशान में लगाया गया है। शिवभक्तों के लिए जो खाना बनाया जा रहा है।उसकी लिए भट्ठी भी श्मशान में ही चढ़ाई गई है।
4 of 5
कांवड़ यात्रा 2018
- फोटो : अमर उजाला
मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की बारात में भी भूत प्रेतों की टोली नाचते गाते हुए गई थी। हर कोई अपनी कांवड़ को अनोखा बनाने में लगा है। वहीं कुछ लोगों ने तो देशभक्ति की थीम पर भगवान की झांकी तैयार की है।डीजे की धुन पर डांस करते ये भक्त अपनी मंजिल तक पहुंच रहे हैं। वहीं जहां-जहां से ये गुजर रहे हैं, लोग ठहर कर उन्हें निहार रहे हैं।
कांवड़ की परंपरा भगवान परशुराम ने शुरू की थी। वह भगवान शिव के परम भक्त थे। वह हर सोमवार को भोले बाबा को जल चढ़ाते थे।सावन का महीना भगवान को प्रिय है।यही वजह है कि इस महीने में हजारों लोग कांवड़ लेकर निकलते हैं। वे पवित्र नदी का पानी या गंगाजल से भगवान का जलाभिषेक करते हैं। इनकी सहूलियत के लिए प्रशासन से लेकर आम लोग भी जगह-जगह आराम और खान-पान की व्यवस्था करते हैं।