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यहां कभी नहीं ढलता सूरज, फिर कैसे रोजा रखते हैं मुसलमान? ये रही अब तक की सबसे बड़ी सच्चाई

Wed, 23 May 2018 10:23 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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namaj
ये रमजान का पाक महीना है। इसी महीने के दौरान मुसलमान रोजा रखते हैं। रोजा के दौरान पूरा दिन इन्हें भूखा-प्यासा रहना पड़ता है। वो भी तब तक जब तक कि सूरज छिप नहीं जाता। बता दें मई माह में भीषण गर्भी के दौरान रोजा रखना मुसलमानों के लिए बेहद मुश्किल होता है। लेकिन क्या कभी आपने ऐसी जगह के बारे में सोचा है जहा सूरज कभी नहीं डूबता वहां लोग कैसे रोजा रखते होंगे..?      
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Ramadan
जी हां अगर बात करें भारत की तो गर्मियों में यहां सूरज निकलने के तकरीबन 16-17 घंटे बाद ही छिप जाता है लेकिन यहां तो सूरज महज 55 मिनट के लिए ही छिपता है तो सोचिए लोग कैसे वहां रोजा रखते होंगे..? चौंक गए न जानकर।

शायद आपको इस बारे में न पता हो कि आर्क्टिक सर्कल में आने वाले देशों में मुस्लिम 24 घंटे सूरज की लाइट में रहते हैं। ऐसे में वो कब सहरी खाएं और कब इफ्तार करें और कब नमाज पढ़ें और कब तरावीह यह सब कैसे किया जाता है यह जानना बेहद दिलचस्प है। 
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Ramadan roza
आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि फिनलैंड और स्वीडन उन देशों में से हैं, जहां सूरज बहुत कम वक्त के लिए अस्त होता है। ऐसे में यहां रहने वाले मुसलमान रोजा कैसे रखते हैं यह जरूर जानना चाहिए। बता दें अकेले फिनलैंड में रहने वाले मुसलमानों की जनसंख्या वहां की 5.5 मिलियन आबादी का लगभग 3 प्रतिशत हैं।

वहीं बात करें स्वीडन की तो वहां 6 लाख मुस्लिम आबादी रहती है। फिनलैंड हजारों झीलों और आइलैंड्स से सजा हुआ खूबसूरत देश है। साल के 365 दिनों में से यहां गर्मी के मौसम में केवल 73 दिनों तक सूरज अपनी रोशनी बिखेरता है। 

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namaj in Ramadan
इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक नॉरदर्न फिनलैंड में सूरज गर्मी में 55 मिनट के लिए ही छिपता है। यहां रोजा सुबह के 1:35 बजे शुरू हो जाता है और फिर रात के 12:40 बजे खत्म होता है। यानी महज 55 मिनट खाने पीने के लिए मिलते हैं। पूरे 23 घंटे और 5 मिनट तक रोजा रहता है। आपको इस पर जरूर हैरानी होगी क्योंकि यहां तो रोजा 20 घंटे से ज्यादा का होता है न...
 
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muslims
वाकयी लोगों के लिए इस बात पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। अब आप मन ही मन खुद से उनकी तुलना कर रहे होंगे। है न... जरा सोचिए वहां रोजा रखने वालों के लिए इस कठिन घड़ी को मैनेज करना कितना मुश्किल होता है।

जहां सूरज नहीं ढलता वहां लोगों को तरकीब निकलनी पड़ती है। वे समय के हिसाब से रोजा रखते हैं। कुछ मुस्लिम जो लैपलैंड में रहते हैं, उनमें से ज्यादातर मिडिल ईस्ट के टाइम टेबल को फॉलो करते हैं।
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Ramadan
सभी देशों में रोजे का समय सूरज के निकलने और छिपने की वजह से अलग-अलग होता है। ये समय एक ही देश में अलग-अलग इलाकों में भी अलग-अलग हो सकता है। समय में थोड़ा बहुत फर्क हो सकता है।

तो अब आप जान गए न जहां सूरज कभी नहीं ढलता वहां लोग कैसे रोजा रखते हैं। 
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