हर शख्स यह चाहता है कि उसकी मौत के बाद उसका क्रिया करम उसी जमीं पर हो जहां पर उसका जन्म हुआ है। ज्यादातर ऐसा होता भी है लेकिन क्या आपको पता है दुनिया में एक ऐसी जगह है जहां पर लोगों के मरने पर ही मनाही है। यह बात आपको पढ़ने में जितनी अजीब लग रही है इसके पीछे की वजह उतनी ही हैरान करने वाली है।
विज्ञापन
2 of 5
bizarre
नार्वे देश के एक कस्बे में यही प्रथा है। यह कस्बा नार्वे के द्वीप स्वालवर्ड की राजधानी लॉन्गइयरबेन है। खबरों की मानें तो कस्बे में 1950 में यह कानून लागू किया गया था और तब से लेकर आजतक इस कस्बे में लोगों का मरना गैरकानूनी है।
विज्ञापन
3 of 5
bizarre
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा विचित्र कानून यहां क्यों लागू किया गया। दरअसल, नार्वे में तापमान काफी कम रहता है। निधन के बाद जब किसी की लाश को दफनाया जाता है तो वह कई साल तक वैसी ही बनी रहती हैं यानी की मिट्टी में सम्मिलित नहीं होती।
4 of 5
bizarre
ऐसे में अगर किसी शख्स की मौत बीमारी की वजह से हुई है तो शव के मिट्टी में सम्मिलित न होने की वजह से बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। कहा जाता है कि इस कस्बे में साल 1918 में स्पेनिश फ्लू की वजह से मौत हो गई थी और लाखों लोगों की कब्रें बनी हुई हैं।
इस वजह से अगर किसी शख्स की तबीयत बहुत खराब होती है और ऐसा लगता है कि वह बच नहीं पाएगा तो उसे किसी और स्थान पर भेज दिया जाता है। इस कस्बे में अभी तक कोई अस्पताल भी नहीं है जिस वजह से महिलाओं को भी डिलीवरी के लिए दूसरी जगह जाना पड़ता है।