रिसर्च में यह भी पता चला है कि चौदह फीसदी लोगों के अपने जन्मदिन के दिन ही मरने की संभावना होती है, जबकि 13 फीसदी लोग कोई बड़ी पेमेंट पाने के बाद मरने की हालत में होते हैं। लेकिन 40 सालों से प्रैक्टिस कर रहे डॉ. चंदर असरानी मानते हैं कि कमजोरी के चलते मौत की बात पूरी तरह से गलत है। वे कहते हैं कि सवेरे 6 से दोपहर 12 के बीच हार्टअटैक की संभावना बहुत ज्यादा होती है। ऐसा ही रात में सोने के दौरान भी होता है, लेकिन इसकी वजह स्लीप एप्निया होती है, यानि एक ऐसी बीमारी है जिसमें सोने के दौरान लोगों की सांसें रुक जाती हैं।