6 भारतीयों ने मिलकर दुनिया वो सबसे बड़ी और निराली चीज बनाकर दिखा दी है, जिसे सब देखते ही रह जाएंगे। जज्बा बेहद गजब का है, खुद देख लीजिए अपनी आंखों से।
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पीरियोडिक टेबल
इस उपलब्धि के साथ ही दुनिया में अपनी उपलब्धियों के लिए पहचाने जाने वाले भारत का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। हरियाणा के जिले रोहतक के ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों ने दुनिया की सबसे बड़ी पीरियोडिक टेबल बनाकर देश को यह सम्मान दिलाया है। इस 80 फीट लंबी व 30 फीट चौड़ी व करीब 140 किलाग्राम वजनी पीरियोडिक टेबल को छह सदस्यीय टीम ने आठ महीने 22 दिन में तैयार किया।
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पीरियोडिक टेबल
इसकी खासियत यह है कि इसके एक एलिमेंट में 67 प्रॉपर्टी हैं। इससे न्यूक्लियर रिसर्चर को नई धातु बनाने के लिए जरूरी बारीक जानकारी आसानी से मिल पाएगी। वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया ने लार्जेस्ट पीरियोडिक टेबल तैयार करने का रिकॉर्ड बनाने पर टीम को सम्मानित किया है।
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पीरियोडिक टेबल
क्या है पीरियोडिक टेबल
पीरियोडिक टेबल एक गणना कैलेंडर है। यूनिवर्स में कौन सा एलिमेंट कहां से आया, इसकी जानकारी के लिए पीरियोडिक टेबल लाभदायक है। नई धातु बनाने के लिए न्यूक्लियर रिसर्चर दो धातुओं को टकराते हैं। इस प्रक्रिया में यह टेबल काम आती है। इसमें विद्युतीय चुंबक बनाने की जानकारी भी है। इससे रिसर्चर व केमेस्ट्री विद्यार्थियों को विषय को समझने में आसानी होगी।
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पीरियोडिक टेबल
विज्ञान के क्षेत्र में देश को मिले नई पहचान
पीरियोडिक टेबल बनाने वाली टीम के लीडर केमेस्ट्री शिक्षक रणदीप सिंह नांदल का कहना है कि उनका मकसद देश को विज्ञान के क्षेत्र में नई व बड़ी पहचान दिलाना है। इसलिए यह टेबल बनाई है। दुनिया में हम इसमें सबसे आगे हैं। इस पर तीन लाख 75 हजार रुपये खर्च आया है। यही नहीं स्कूली बच्चों ने इसे तैयार करने के लिए कड़ी मेहनत की है। इसके लिए वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया ने टीम को सम्मानित करते हुए दुनिया की सबसे बड़ी पीरियोडिक टेबल बनाने का प्रमाण पत्र प्रदान किया है।
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पीरियोडिक टेबल
प्रैक्टिकल सीखने के लिए बनाई टेबल
कक्षा 12वीं की छात्रा शेफली गहलावत ने बताया कि केमेस्ट्री विषय को गहनता से समझने के प्रैक्टिकल तरीके से सीखने का प्रयास किया। इसके चलते पहले एक छोटी टेबल बनाई। इसके एक एलिमेंट में आठ प्रॉपर्टी दर्शाई गईं। बाद में बड़ी टेबल बनाई। इसके एक एलिमेंट में 67 प्रॉपर्टी दर्शाई गई हैं। कुल 194 प्रॉपर्टी होती हैं। इन सभी को इसमें शामिल करने पर टेबल बेहद किफायती साबित होगी। इसका प्रयास जारी है।
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पीरियोडिक टेबल
लिम्का बुक में दर्ज हो चुका नाम
दुनिया की सबसे बड़ी पीरियोडिक टेबल बनाने का सम्मान मिलने से पहले टीम को एक बड़ी उपलब्धि मिल चुकी है। यह उपलब्धि लिम्का बुक में नाम दर्ज होने की है। वर्ष 2017 में पीरियोडिक टेबल बनाने पर यह उपलब्धि मिली। इस बड़ी टेबल से पहले टीम ने 14.5 गुणा 12 फीट की टेबल बनाई थी।
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पीरियोडिक टेबल
ये हैं टीम के सदस्य
टीम लीडर बोहर निवासी रणदीप सिंह नांदल हैं। इनके साथ पांच विद्यार्थी भी जुड़े हैं। इसमें खेड़ी साध की 12वीं कक्षा की छात्रा शेफली गहलावत, दसवीं कक्षा का राजीव गहलावत, अजायब निवासी 12वीं कक्षा की कोमल बारवाल, भराण निवासी बीएससी छात्रा पूजा जांगड़ा व चुलियाणा निवासी बीएससी की छात्रा रितिका रोहज शामिल हैं।
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टेबल के लिए विदेश से मंगवाया गया पेंट
पीरियोडिक टेबल बनाने के लिए एक्रीलिक पेंट देश के विभिन्न शहरों के अलावा विदेश से भी मंगवाया गया। इसमें जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस, जापान मुख्य हैं। देश में मुंबई, मेरठ, चेन्नई, कोलकाता, गाजियाबाद शामिल है। इसके अलावा 600 टी-मैक्स बॉल ब्लैक पेन रिफिल, 200 यूनिबॉल व्हाइट पेन, हैंड मेड शीट हैदराबाद से मंगवाई गई। इसके बाद टेबल बन पाई।
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टेबल को डिजिटलाइज्ड करने की जरूरत
टीम लीडर रणदीप सिंह नांदल ने बताया कि भविष्य में टीम पीरियोडिक टेबल को और बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है। इसमें हर एलिमेंट की हर प्रॉपर्टी को दिखाया जा सके, इसके लिए इसे डिजिटलाइज्ड करने की जरूरत है। इस पर धन अधिक खर्च होगा। ऐसे में सरकार इस ओर ध्यान दे। इससे केमेस्ट्री में देश का नाम दुनिया में सर्वोच्च स्थान पर पहुंच जाएगा।
यह खासियत
दुनिया में इतनी अधिक जानकारी वाला पीरियोडिक टेबल नहीं है। सबसे पहले आईसोटोपिक कंपोजिशन, एमिशन स्पेक्ट्रम व टेबल ऑफ न्यक्लाइड्स शामिल किया गया है। सारा पीरियोडिक टेबल हैंडमेड है। हर एलिमेंट की 67 प्रॉपर्टी को बताया गया है। विद्यार्थियों को मेहनत व मल्टीटास्किंग का महत्व और समझाया जा सकता है।