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गजब का है ये गांव, यहां पैदा होने वाले जाते हैं सेना में और हर घर में एक सरकारी नौकर

Sat, 23 Jun 2018 05:13 PM IST
नसीब सैनी, अमर उजाला, कैथल(हरियाणा)
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अनोखा गांव गुलियाना
एक गांव का सौभाग्य देखिए, यहां पैदा होने वाले सेना में भर्ती होते हैं और हर घर में एक सरकारी नौकर है। गांव का इतिहास अपने आप में अनोखा है, यकीं नहीं तो देखिए।
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अनोखा गांव गुलियाना
हरियाणा में कैथल जिले के मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर स्थित गांव गुलियाणा के युवाओं ने सरकारी नौकरियों की ऐसी राह पकड़ी की आस-पड़ोस के गांव के युवा भी प्रेरणा लेने लगे हैं। इस गांव में पिछले 6 साल में लगभग 250 से ज्यादा युवाओं ने सरकारी नौकरियां हासिल की हैं। गांव में डीजे पर प्रतिबंध लगाया गया था। युवाओं ने डीजे पर प्रतिबंध की बात तो मान ली, लेकिन अपनी भी बात रखी और कहा कि गांव में शराब भी नहीं बिकेगी, जिसे पूरे गांव ने स्वीकार कर लिया।
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Haryana unique village - फोटो : अमर उजाला
फैसला लिया गया कि कोई अपने घर बैठकर शराब पीना चाहे तो पी सकता है, लेकिन शराब पीकर हुड़दंग नहीं मचाएगा। गांव में न तो शराब बिकेगी और न ही 2 बोतल से अधिक कोई शराब लेकर चलेगा। शुरू में लगभग दर्जन भर लोगों को 11 हजार रुपये का जुर्माना भी हुआ। जिसका नतीजा यह है कि आज गांव की सीमा में शराब नहीं बिकती और न ही कोई ठेका है। इसी बीच सेना में काम कर रहे युवाओं ने बेरोजगार युवाओं को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी।

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अनोखा भारतीय गांव
बिना किसी सरकारी सहायता के गांव की खाली पड़ी जमीन में 24 घंटे, हर तरह के मौसम में व सुबह, शाम, रात, दोपहर को युवाओं को भर्ती के लिए कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। लकड़ियों के माध्यम से दंड बैठक निकालने के जुगाड़ सहित देसी ढंग से तैयार किए गए ट्रेक पर 300 से अधिक युवा खूब पसीना बहाते हैं। प्रशिक्षण अभियान से जुड़े युवा मजेंद्र सिंह, आनंद राविश ने बताया कि 6 साल में 250 से अधिक युवा नौकरी हासिल कर चुके हैं।
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अनोखा गांव - फोटो : अमर उजाला
भारतीय सेना, एयरफोर्स, नेवी, बीएसएफ, हरियाणा, दिल्ली व चंडीगढ़ पुलिस सहित कई विभागों में युवाओं की नौकरी लगी हैं। पूरे गांव में लगभग 1200 परिवार हैं, जिसमें से आज 700 से अधिक परिवारों में सरकारी नौकर हैं। अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद की जाती है। इसके लिए युवा क्लब व जयहिंद क्लब बनाया गया है। आज आलम ये हैं कि कोई भी भर्ती ऐसी नहीं जाती, जिसमें गांव के युवाओं का सिलेक्शन न होता हो।
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अनोखा गांव गुलियाना
अब स्टेडियम की है मांग
इस गांव के युवाओं की एक ही मांग है कि जब वे अपने स्तर पर इतनी नौकरियां हासिल कर सकते हैं तो यहां स्टेडियम बन जाए तो सफलता की दर ओर अधिक बढ़ जाएगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, धर्मपाल शर्मा सहित कई नेता यहां स्टेडियम का ऐलान कर चुके हैं। लेकिन आज तक यहां स्टेडियम तो क्या सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं दी गई। इस गांव के पृथ्वी राविश जहां विदेशों में राजदूत रह चुके हैं। वहीं इस समय राजनारायण डायरेक्ट आईएएस भी चयनित हुए हैं। साथ ही कई बड़े अधिकारी कई विभागों में कार्यरत हैं।
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अनोखा गांव गुलियाना
शराब बिक्री बंद हुई तो बंद हो गए झगड़े
सरपंच राजेंद्र सिंह का कहना है कि शराब की बिक्री, डीजे बजाने पर आज भी प्रतिबंध है। युवाओं का रुझान खुद ही नौकरियों की ओर बढ़ा है। शराब बंदी का पूरा असर देखने को मिला। युवा जब-जब किसी मदद को कहते हैं, पंचायत तैयार रहती है। पिछले पांच-छह सालों में एक भी ऐसा मामला नहीं आया, जिसमें किसी ने शराब पीकर झगड़ा किया हो। एसएचओ राजौंद रामकुमार का कहना है कि गांव गुलियाणा पूरी तरह से शांतिप्रिय गांव है। इस गांव में अपराध के संबंध में केस ना के बराबर दर्ज हैं। छोटे-मोटे झगड़े गांव में ही निपट जाते हैं।
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अनोखा गांव गुलियाना
ये हैं गांव के सर्वसम्मति से लिए गए फैसले
शादियों में डीजे पर प्रतिबंध, डीजे बजाने पर 11000 रुपये जुर्माना। गांव की हद में शराब बिक्री पर रोक, 2 बोतल से अधिक शराब कोई लेकर नहीं चल सकता-शराब बेचते हुए पाए जाने पर 11000 हजार रुपये जुर्माना।  शराब पीकर गांव में चिल्लाने व झगड़ा करने पर 2100 रुपये जुर्माना। गांव में लाउड स्पीकर व किसी भी माध्यम से ऊंची आवाज में गाने बजाने पर 2100 रुपये। म्यूजिक सिस्टम लगाकर ऊंची आवाज में सामान बेचने वाले फेरी वालों को पहली बार में छूट, दूसरी बार में 2100 रुपये जुर्माना।
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