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ये हैं दामाद को पछाड़कर टॉपर बनीं 96 साल की पढ़ाकू दादी, कहानी हौसला देगी

Mon, 12 Nov 2018 12:52 PM IST
बीबीसी हिंदी
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AKSHARALEKSHAM DEPARTMENT - फोटो : AKSHARALEKSHAM DEPARTMENT
'अरे शर्मा जी के बच्चे को देखो, क्लास में टॉप किया है।' की बजाय 'अरे 96 साल की दादी को देखो दामाद को पीछे छोड़कर टॉप किया है।' अपने बच्चों को ज्यादा नंबर लाने के लिए उकसाते हुए कही जाने वाली ऊपर लिखी पहली लाइन अब केरल की एक दादी की वजह से बदली जा सकती है।
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Padhaku Dadi - फोटो : AKSHARALEKSHAM DEPARTMENT
96 साल की दादी कार्तियानी अम्मा ने अक्षरलक्ष्यम साक्षरता कार्यक्रम के तहत हुए टेस्ट में 98 फीसदी नंबर हासिल किए हैं। ये कार्यक्रम 'केरल स्टेट लिटरेसी मिशन' के तहत शुरू किया गया है। इस टेस्ट में कार्तियानी की पढ़ने, लिखने और गणित की क्षमताओं को परखा गया। ये कार्यक्रम पहले से अच्छी साक्षरता दर वाले केरल में 100 फीसदी साक्षरता दर को हासिल करने के लिए शुरू किया गया है।
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बीबीसी संवाददाता प्रमिला कृष्णन से बात करते हुए कार्तियानी ने कहा, ''मेरी पढ़ाई अब रुकने नहीं वाली। जल्द मैं चौथी क्लास की पढ़ाई पूरी करूंगी। फिर आठवीं और दसवीं क्लास। जब मेरी उम्र 100 साल होगी, मैं 10वीं क्लास की पढ़ाई पूरी कर लूंगी मुझे और ख़ुशी होगी। मैं चाहती हूं कि इसके बाद मेरी सरकारी नौकरी लग जाए।''

 

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Padhaku Dadi - फोटो : AKSHARALEKSHAM DEPARTMENT
इस परीक्षा में कार्तियानी अकेली नहीं थीं। कार्तियानी के साथ उनके दामाद ने भी तीसरी क्लास की परीक्षा दी थी लेकिन वो अपनी सास से 10 नंबर कम ला पाए। कार्तियानी अम्मा बताती हैं, ''मैं और मेरे दामाद दोनों ने पढ़ाई की थी। हम दोनों ने एग्जाम दिए थे। लेकिन वो एग्जाम में जवाब भूल गए। उन्होंने आधे अधूरे जवाब लिखे। लेकिन मुझे सारे जवाब मालूम थे। मैंने सभी सवालो के सही जवाब दिए'' कार्तियानी के दामाद के इसी परीक्षा में 88 नंबर आए हैं।

 
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डेमो - फोटो : डेमो
कितने लोगों ने दी थी ये परीक्षा?

इस परीक्षा को पास करने पर कार्तियानी को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की तरफ से सर्टिफिकेट मिला है। इस परीक्षा में क़रीब 43 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया था। कार्तियानी इन सभी एग्ज़ाम देने वालों में सबसे बुजुर्ग स्टूडेंट रहीं। कार्तियानी के इस परीक्षा में नंबर कुछ यूं रहे।

गणित: 30/30
राइटिंग: 30/30
ट्रेनिंग: 28/30

 
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result - फोटो : amar ujala
कार्तियानी बताती हैं, ''परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने की वजह से बचपन में पढ़ाई नहीं हो पाई थी।'' कार्तियानी केरल के अलपुज़ा इलाके के चेप्पादू गांव की हैं। कार्तियानी के बच्चे भी हैं और बच्चों के बच्चे भी। पढ़ाई जारी रखने के अलावा कार्तियानी का अगला लक्ष्य कम्प्यूटर सीखने का भी है।

कार्तियानी कहती हैं, ''मैंने बच्चों को पढ़ते हुए देखा और वहीं से मुझे प्रेरणा मिली। अगर मेरी बचपन में पढ़ाई पूरी हुई होती तो आज मैं सरकारी अधिकारी होती।'' कार्तियानी को पढ़ने के लिए प्रेरणा देने वाले लोगों में उनकी बेटी अम्मीनी अम्मा भी हैं। उन्होंने भी 10वीं क्लास की पढ़ाई 62 बरस में पूरी की थी।
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केरल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्कूल जाती छात्राएं
केरल का साक्षरता कार्यक्रम अहम क्यों?

इस कार्यक्रम की निदेशक पीएस श्रीकला ने कहा, ''अब कार्तियानी हज़ारों लोगों के लिए रोल मॉडल की तरह हैं। मौजूदा वक़्त में राज्य के दो हज़ार वॉर्ड्स में कार्यक्रम को चलाया जा रहा है। कार्यक्रम के अगले चरण में हम स्थानीय निकायों को भी इसमें जोड़ेंगे।''

श्रीकला बताती हैं कि इस कार्यक्रम के ज़रिए अगले चार सालों में राज्य के सभी लोगों को साक्षर बनाने की कोशिश की जा रही है। 2011 की जनगणना के मुताबिक़, केरल में क़रीब 18 लाख लोग निरक्षर थे। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, कार्तियानी अम्मा की टीचर साथी कहती हैं- वो हमेशा अपनी किताब तकिए के नीचे रखकर सोती हैं। हमने उन्हें चौथी क्लास में दाखिला दे दिया है। जल्द ही पढ़ाई की सामग्री उन्हें मुहैया कराई जाएगी। पढ़ाई जल्द शुरू होगी। वो जल्द से जल्द 10वीं क्लास की पढ़ाई करना चाहती हैं।''
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