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Tirupati Balaji Temple: तिरुपति बालाजी मंदिर की रहस्यमयी बातें, जिन्हें आजतक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए

Sat, 21 Sep 2024 09:45 AM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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तिरुपति बालाजी मंदिर की रहस्यमयी बातें, जिन्हें आजतक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए - फोटो : अमर उजाला
Tirupati Balaji Temple Mystery: भारत में चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर हैं। मंदिर के रहस्यों का अभी तक वैज्ञानिक भी नहीं पता लगा पाए हैं। इन रहस्यमयी मंदिरों में से एक दक्षिण भारत में स्थित भगवान तिरुपति बालाजी का मंदिर भी है। भगवान तिरुपति बालाजी का चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर भारत समेत पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर भारतीय वास्तु कला और शिल्प कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह खूबसूरत मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमला पर्वत पर स्थित है और यह भारत के मुख्य तीर्थ स्थलों में से एक है।

भगवान तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में मिलने वाला लड्डू इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की जांच रिपोर्ट सामने आई है। इसमें मछली के तेल और जानवरों की चर्बी मिलाने के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना के बीच आज हम आपको भगवान तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े रहस्यों के बारे में बताते हैं...

भगवान तिरुपति बालाजी का वास्तविक नाम श्री वेंकटेश्वर स्वामी है जो स्वयं भगवान विष्णु हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान श्री वेंकटेश्वर अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में निवास करते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान वेंकटेश्वर के सामने प्रार्थना करते हैं, उनकी सभी मुरादें पूरी होती हैं। भक्त अपनी श्रद्धा के मुताबिक, यहां आकर तिरुपति मंदिर में अपने बाल दान करते हैं। इस अलौकिक और चमत्कारिक मंदिर से कई रहस्य जुड़े हैं। 
 
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तिरुपति बालाजी मंदिर की रहस्यमयी बातें, जिन्हें आजतक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए - फोटो : Adobe Stock
बताया जाता है कि भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर बाल लगे हैं जो असली हैं। यह बाल कभी भी उलझते नहीं हैं और हमेशा मुलायम रहते हैं। मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु खुद विराजमान हैं। जब आप मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करेंगे तो ऐसा लगेगा कि भगवान श्री वेंकेटेश्वर की मूर्ति गर्भ गृह के मध्य में है। लेकिन आप जैसे ही गर्भगृह के बाहर आएंगे तो चौंक जाएंगे, क्योंकि बाहर आकर ऐसा प्रतीत होता है कि भगवान की प्रतिमा दाहिनी तरफ स्थित है। अब यह सिर्फ भ्रम है या कोई भगवान का चमत्कार इसका पता आज तक कोई नहीं लगा पाया है। मान्यता है कि भगवान के इस रूप में मां लक्ष्मी भी समाहित हैं जिसकी वजह से श्री वेंकेटेश्वर स्वामी को स्त्री और पुरुष दोनों के वस्त्र पहनाने की परम्परा है। 
 
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तिरुपति बालाजी मंदिर की रहस्यमयी बातें, जिन्हें आजतक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए - फोटो : Adobe Stock
तिरुपति बाला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा अलौकिक है। यह विशेष पत्थर से बनी है। यह प्रतिमा इतनी जीवंत है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे भगवान विष्णु स्वयं यहां विराजमान हैं। भगवान की प्रतिमा को पसीना आता है, पसीने की बूंदें देखी जा सकती हैं। इसलिए मंदिर में तापमान कम रखा जाता है। श्री वेंकेटेश्वर स्वामी के मंदिर से 23 किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है जहां गांव वालों के अलावा कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। इस गांव लोग बहुत ही अनुशासित हैं और नियमों का पालन कर जीवन व्यतीत करते हैं। मंदिर में चढ़ाया जाने वाला पदार्थ जैसे की फूल, फल, दही, घी, दूध, मक्खन आदि इसी गांव से आते हैं।
 

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तिरुपति बालाजी मंदिर की रहस्यमयी बातें, जिन्हें आजतक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए - फोटो : Adobe Stock
गुरुवार को भगवान वेंकेटेश्वर को चंदन का लेप लगाया जाता है जिसके बाद अद्भुत रहस्य सामने आता है। भगवान का श्रृंगार हटाकर स्नान कराकर चंदन का लेप लगाया जाता है और जब इस लेप को हटाया जाता है तो भगवान वेंकेटेश्वर के हृदय में माता लक्ष्मी जी की आकृति दिखाई देती है। श्री वेंकेटेश्वर स्वामी मंदिर में एक दीया हमेशा जलता रहता है और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दीपक में कभी भी तेल या घी नहीं डाला जाता। यहां तक कि यह भी पता नहीं है कि दीपक को सबसे पहले किसने और कब प्रज्वलित किया था। 

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तिरुपति बालाजी मंदिर की रहस्यमयी बातें, जिन्हें आजतक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए - फोटो : Adobe Stock
भगवान वेंकेटेश्वर की प्रतिमा पर पचाई कपूर लगाया जाता है। कहा जाता है कि यह कपूर किसी भी पत्थर पर लगाया जाता है तो पत्थर में कुछ समय में दरारें पड़ जाती हैं। लेकिन भगवान बालाजी की प्रतिमा पर पचाई कपूर का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। मंदिर में मुख्य द्वार के दरवाजे पर दाईं तरफ एक छड़ी है। इस छड़ी के बारे में मान्यता है कि बाल्यावस्था में इस छड़ी से ही भगवान वेंकेटेश्वर की पिटाई की गई थी जिसकी वजह से उनकी ठुड्डी पर चोट लग गई थी। तब से आज तक उनकी ठुड्डी पर शुक्रवार को चंदन का लेप लगाया जाता है। ताकि उनका घाव भर जाए। भगवान वेंकेटेश्वर की मूर्ति पर कान लगाकर सुनें तो समुद्र की लहरों की ध्वनि सुनाई देती है। यह भी कहा जाता है कि भगवान की प्रतिमा हमेशा नम रहती है। 
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