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Mysterious Temple: इस मंदिर में चढ़ाया प्रसाद हो जाता है गायब, भूख से दुबले हो जाते हैं भगवान, क्या है रहस्य

Thu, 19 Jun 2025 02:29 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Mysterious Temple: भगवान श्रीकृष्ण के इस मंदिर से कई किवदंतियां जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि वनवास के दौरान पांडव, भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति की पूजा करते और उन्हें भोग लगाते थे। पांडवों ने वनवास खत्म होने के बाद थिरुवरप्पु में ही इस भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को छोड़कर चले गए थे, क्योंकि यहां के मछुआरों ने मूर्ति को यही छोड़ने का अनुरोध किया था।
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इस मंदिर में चढ़ाया प्रसाद हो जाता है गायब, भूख से दुबले हो जाते हैं भगवान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
Mysterious Temple: भारत में कई चमत्कारिक और रहस्यमयी मंदिर हैं। इनमें कई ऐसे हैं जिनके रहस्यों को अभी तक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए हैं। ऐसा ही एक दक्षिण भारतीय राज्य केरल के थिरुवरप्पु में एक रहस्यमयी मंदिर है। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण का है। माना जाता है कि यह मंदिर 1500 साल पुराना है। इसके रहस्य के बारे में जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। आइए जानते हैं कि आखिर मंदिर का क्या रहस्य है? 

भगवान श्रीकृष्ण के इस मंदिर से कई किवदंतियां जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि वनवास के दौरान पांडव, भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति की पूजा करते और उन्हें भोग लगाते थे। पांडवों ने वनवास खत्म होने के बाद थिरुवरप्पु में ही इस भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को छोड़कर चले गए थे, क्योंकि यहां के मछुआरों ने मूर्ति को यही छोड़ने का अनुरोध किया था। मछुआरों ने भगवान श्रीकृष्ण की ग्राम देवता के रूप में पूजा करनी शुरू कर दी। हालांकि, मछुआरे एक बार संकट से घिर गए, तो एक ज्योतिष ने उनसे कहा कि आप सभी पूजा ठीक तरह से नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को एक समुद्री झील में विसर्जित कर दिया।
 
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इस मंदिर में चढ़ाया प्रसाद हो जाता है गायब, भूख से दुबले हो जाते हैं भगवान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
क्यों हमेशा लगाया जाता है भोग? 

केरल के एक ऋषि विल्वमंगलम स्वामीयार नाव से एक बार यात्रा कर रहे थे, लेकिन उनकी नाव एक जगह अटक गई। लाख कोशिशों के बाद भी नाव आगे नहीं बढ़ पाई, तो उनके मन में सवाल खड़ा होने लगा कि ऐसा क्या है कि उनकी नाव आगे नहीं बढ़ रही है। इसके बाद उन्होंने पानी में नीच डुबकी लगाकर देखा तो वहां पर एक मूर्ति पड़ी हुई थी। ऋषि विल्वमंगलम स्वामीयार ने मूर्ति को पानी में से निकाली और अपनी नाव में रख ली। इसके बाद वह एक वृक्ष के नीचे आराम करने के लिए रुके और मूर्ति को वहीं रख दी। जब वह जाने लगे तो मूर्ति को उठाने की कोशिश की, लेकिन वह वहीं पर चिपक गई। इसके बाद वहीं पर मूर्ति स्थापित कर दी गई। इस मूर्ति में भगवान कृष्ण का भाव उस समय का है जब उन्होंने कंस को मारा था तब उन्हें बहुत भूख लगी थी। इस मान्यता की वजह से उन्हें हमेशा भोग लगाया जाता है। 
 
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इस मंदिर में चढ़ाया प्रसाद हो जाता है गायब, भूख से दुबले हो जाते हैं भगवान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
दिन में 10 बार लगाता है भोग

मान्यता है कि यहां पर स्थित भगवान के विग्रह को भूख बर्दाश्त नहीं होती है जिसकी वजह से उनके भोग की विशेष व्यवस्था की गई है। भगवान को दिन में 10 बार भोग लगाया जाता है। अगर भोग नहीं लगाया जाता है तो उनका शरीर सूख जाता है। यह भी मान्यता है कि प्लेट में से थोड़ा-थोड़ा करके चढ़ाया गया प्रसाद गायब हो जाता है। यह प्रसाद भगवान श्रीकृष्ण खुद ही खाते हैं।

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इस मंदिर में चढ़ाया प्रसाद हो जाता है गायब, भूख से दुबले हो जाते हैं भगवान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
कभी नहीं बंद होता है मंदिर

पहले इस मंदिर को आम मंदिरों की तरह ही ग्रहण काल में बंद कर दिया जाता था, लेकिन एक बार ऐसा कुछ हुआ जिसे देखकर सभी लोग हैरान रह गए। ग्रहण खत्म होते-होते उनकी मूर्ति सूख जाती है, कमर की पट्टी भी खिसककर नीचे चली गई थी। इस बात की जानकारी आदिशंकराचार्य को हुई तो वह खुद इस स्थिति को देखने और समझने के लिए वहां पहुंचे। सच्चाई जानकर वह भी आश्चर्यचकित हो गए। इसके बाद उन्होंने कहा कि ग्रहण काल में भी मंदिर खुला रहना चाहिए और भगवान को समय पर भोग लगाए जाए। 

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इस मंदिर में चढ़ाया प्रसाद हो जाता है गायब, भूख से दुबले हो जाते हैं भगवान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
सिर्फ 2 मिनट के लिए बंद होता है मंदिर

आदिशंकराचार्य के आदेश के मुताबिक, यह मंदिर 24 घंटे में सिर्फ 2 मिनट के लिए ही बंद किया जाता है। मंदिर को 11.58 मिनट पर बंद किया जाता है और उसे 2 मिनट बाद ही ठीक 12 बजे खोल दिया जाता है। मंदिर के पुजारी को ताले की चाबी के साथ ही कुल्हाड़ी भी दी गई है। पुजारी से कहा गया है कि अगर ताला खुलने में समय लगे तो वह कुल्हाड़ी से ताला तोड़ दें, लेकिन भगवान को भोग लगने में देरी ना हो। 

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इसके अलावा भगवान का जब अभिषेक किया जाता है, तो विग्रह का पहले सिर और फिर पूरा शरीर सूख जाता है। क्योंकि अभिषेक में समय लगता है और उस समय भोग नहीं लगाया जा सकता है। इस घटना को देखकर लोगों को अचरज होता है। 
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