पुलिस हिरासत में मुर्गा
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मेहमान मुर्गे पुलिस की जेब पर भारी
थाना प्रभारी मुमताज सिरकी का कहना है कि अभियुक्त तो जमानत पर रिहा हो गए थे, लेकिन ये मुर्गे केस प्रोपर्टी की हैसियत से पुलिस के पास रह गए थे और जब तक अदालत इन पर कोई फैसला नहीं करती तब तक उन मुर्गों को सही-सलामत रखने की जिम्मेदारी थाने की थी। थाने में उन मुर्गों को लॉकअप या मालखाने में नहीं रखा गया था, बल्कि उन्हें खुली जगह में रखा गया था, लेकिन उनकी टांग में रस्सी बांध दी गई थी। लेकिन पुलिस की मुश्किल ये है कि ये मुर्गे रोजाना करीब सौ रुपए का बाजरा खा जाते हैं और पुलिस को ये पैसे अपनी जेब से देने पड़ते हैं।
थाने के एक अधिकारी को इन मुर्गों की देख-भाल की जिम्मेदारी दी गई है और अगर वो बीमार पड़ते हैं तो उन्हें लाइवस्टॉक विभाग के डॉक्टर को दिखाया जाता है। एक पुलिसकर्मी के अनुसार इन मुर्गों को बिल्ली और कुत्तों से भी बचाना उनकी अहम जिम्मेदारी का हिस्सा है। क्योंकि अगर उन्हें कोई नुकसान पहुंचता है तो अदालत नाराजगी का इजहार कर सकती है।